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अमेरिका में नीलाम होने जा रहीं पंजाब विधानसभा की दो विरासती मेजें
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पंजाब विधानसभा की दो मेजों की अमेरिका में 21 अक्तूबर को नीलामी होने जा रही है। इस संबंध में हैरिटेज प्रोटेक्शन सेल चंडीगढ़ के सदस्य एडवोकेट अजय जग्गा ने पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पंजाब विधानसभा के स्पीकर राणा केपी सिंह, ड्रग और अपराध के संबंधित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय यूएनओडीसी की कार्यकारी निदेशक जी. वेली, अमेरिका में भारतीय उच्चायुक्त को पत्र लिखकर नीलामी को रुकवाने और दोनों धरोहर मेजों को वापस लाने की मांग की है। नीलामी के दौरान यह मेज 3500-4500 अमेरिकी डॉलर (लगभग 2.63-3.39 लाख रुपये) में बिकने की संभावना है।
अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि अमेरिका के लॉस एंजिलिस में हो रही नीलामी में चंडीगढ़ में पंजाब विधानसभा के दो मेज (जोकि विरासती वस्तुएं हैं) की नीलामी की जा रही है। यह हैरानी की बात है कि भारतीय संविधान और गृह मंत्रालय के 22 फरवरी, 2011 के आदेशों का उल्लंघन कर विरासती मेजों को किसने बेचा और उन्हें कौन अमेरिका लेकर गया, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
इन मेजों पर गुरमुखी (पंजाबी) में संख्या लिखी गई है, जो साफ दिखाई भी दे रही है। 1968 में बनी दोनों मेज टीकवुड से निर्मित हैं। इनमें से एक विधानसभा के रिसेप्शन रूम की और दूसरी एंट्री रूम की मेज हैं। पत्र में मांग की गई है कि गृह मंत्रालय की ओर से पंजाब और अमेरिका में कानून लागू करने वाली एजेंसियों से इस मामले की पूरी जांच कराई जाए कि मेजें वहां कैसे पहुंचीं, जबकि ऐसी विरासती वस्तुओं के निर्यात पर भारत में प्रतिबंध है। एडवोकेट जग्गा ने इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
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अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि अमेरिका के लॉस एंजिलिस में हो रही नीलामी में चंडीगढ़ में पंजाब विधानसभा के दो मेज (जोकि विरासती वस्तुएं हैं) की नीलामी की जा रही है। यह हैरानी की बात है कि भारतीय संविधान और गृह मंत्रालय के 22 फरवरी, 2011 के आदेशों का उल्लंघन कर विरासती मेजों को किसने बेचा और उन्हें कौन अमेरिका लेकर गया, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।
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इन मेजों पर गुरमुखी (पंजाबी) में संख्या लिखी गई है, जो साफ दिखाई भी दे रही है। 1968 में बनी दोनों मेज टीकवुड से निर्मित हैं। इनमें से एक विधानसभा के रिसेप्शन रूम की और दूसरी एंट्री रूम की मेज हैं। पत्र में मांग की गई है कि गृह मंत्रालय की ओर से पंजाब और अमेरिका में कानून लागू करने वाली एजेंसियों से इस मामले की पूरी जांच कराई जाए कि मेजें वहां कैसे पहुंचीं, जबकि ऐसी विरासती वस्तुओं के निर्यात पर भारत में प्रतिबंध है। एडवोकेट जग्गा ने इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
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