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गड़बड़ी का निपटारा : निजी अस्पतालों ने मानी गलती, 17.83 लाख रुपये लौटाए, निगरानी कमेटी के सदस्यों ने बिलों की थी औचक जांच, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष से लोगों ने की थी शिकायत
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पंचकूला। शहर के निजी बड़े अस्पतालों ने ओवर चार्जिंग के मामले में प्रशासन द्वारा गठित जांच कमेटी के सामने घुटने टेक दिए हैं। नोटिस और ऑडिट के बाद तीन निजी अस्पतालों ने मरीजों से ओवरचार्जिंग के 17 लाख 83 हजार 648 रुपए लौटा दिए हैं। इतना ही नहीं जिन मरीजों और उनके परिजनों को रुपये लौटाए गए हैं प्रशासन ने बाकायदा उनकी सूची जारी की है। हालांकि ओवर चार्जिंग का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
यही कारण है कि हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता के निर्देश पर प्रशासन द्वारा गठित निगरानी कमेटी के पास अभी भी लगातार शिकायतें आ रही हैं। निगरानी कमेटी के सदस्य ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर जांच कर रहे हैं। मरीजों को पैसे लौटाने वालों में अल्केमिस्ट, पारस और विंग अस्पताल शामिल हैं। सेक्टर-21 स्थित अल्केमिस्ट ने चार लोगों को 49715 रुपये लौटाए हैं, जबकि सेक्टर-25 स्थित विंग अस्पताल ने तीन लोगों को ओवरचार्ज के 177654 रुपये लौटाए हैं। सबसे ज्यादा सेक्टर-25 स्थित पारस अस्पताल प्रबंधन ने 11 लोगों को 1108843 रुपये लौटाए हैं।
प्रशासन द्वारा गठित आठ सदस्यीय कमेटी ने शिकायत के आधार पर तीनों अस्पतालों में कोरोना मरीजों के बिलों की जांच की थी। इसमें कई बिलों में गड़बड़ी मिली थी। कमेटी के सदस्यों ने जांच के दौरान पाया कि जो मरीज किसी मेडिक्लेम के तहत अपना इलाज करवा रहे हैं उनके बिल बहुत ज्यादा हैं, जबकि जो सामान्य रूप से इलाज करवा रहे हैं उनके बिल कम हैं। इसके बाद निगरानी कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी थी।
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इस पर कड़ा संज्ञान लेकर अतिरिक्त उपायुक्त ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। शहर के तीनों अस्पताल प्रबंधन ने प्रशासन के सामने पर्सनल हियरिंग के दौरान ओवर चार्जिंग को लेकर गलती स्वीकार की थी। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने तर्क दिया था कि बिल में गड़बड़ी गलती से हुई है, जिसकी वह जांच कर रहे हैं। यदि बिल अधिक लेना पाया गया तो वह लौटा देंगे। पर्सनल हियरिंग के बाद प्रशासन ने तीनों अस्पतालों के संचालकों को स्वयं बिलों का ऑडिट करने का आदेश दिया था।
केस निपटाने को प्रशासन ने एक सप्ताह का दिया था समय
निगरानी कमेटी ने जिन बिलों को लेकर निजी अस्पतालों को नोटिस थमाया था, उनमें लाखों की ओवर चार्जिंग मिली। निगरानी कमेटी ने हिदायत दी थी कि ओवर चार्जिंग की रकम मरीजों को एक हफ्ते में लौटाई जाए। निगरानी कमेटी की सख्ती के बाद तीन अस्पतालों ने 18 मरीजों को 18 लाख 83 हजार 648 रुपये लौटा दिए हैं।
सरकार ने निर्धारित किए थे इलाज के दाम
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश सरकार ने कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज के दाम तय किए थे। सरकार ने आदेश जारी किया था कि यदि किसी अस्पताल ने मरीजों से निर्धारित शुल्क से ज्यादा वसूल किए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता के पास कई शिकायतें पहुंचीं, जिसे उन्होंने गंभीरता से लिया। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भी पत्र लिखा था। इतना ही नहीं उन्होंने प्रशासन को एक निगरानी कमेटी गठित करने के निर्देश भी दिए थे।
निगरानी कमेटी में ये हैं शामिल
एडीसी मोहम्मद इमरान रजा, डीईडीसी संजीव राठी, डीसीएस/आईडीएसपी डॉ. राजीव नरवाल, एसएमओ डॉ. अंगिला ढिंगरा, एसडीएस डॉ. शिवानी हुड्डा, आरएमओ डॉ. अर्चना अग्रवाल, एओ नरेंद्र कंडोला और हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल सदस्य बीबी सिंघल शामिल हैं।
निगरानी कमेटी की जांच में कई अस्पतालों के बिलों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इंश्योरेंस, मेडिक्लेम के अंतर्गत इलाज करवाने वाले मरीजों के बिल में दो से तीन का अंतर पाया गया है। अस्पतालों द्वारा बिलों में एक्सरे, लेबोरेट्री, डॉक्टर फीस, इंजेक्शन और दवाइयों के दाम अधिक लगाए गए हैं। अस्पतालों को 25 जून 2020 से लेकर अब जितने भी कोरोना मरीजों का इलाज किया गया है सभी के बिल खुद चेक करके रिपोर्टर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को सौंपने के लिए कहा गया है। इसके बाद निगरानी कमेटी एक बार फिर बिलों की जांच करेगी। - बीबी सिंघल, मेंबर, हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल, जांच कमेटी
कोरोना महामारी से जो लोग पीड़ित थे। ऐसे समय में उनको किसी प्रकार से कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए था। उनके दुख को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए थी। मानवता के नाते महामारी के समय में लोग सेवा में तत्पर थे। ऐसे समय में अस्पतालों द्वारा कोरोना मरीजों से ओवर चार्जिंग निंदनीय और दुखदायी है। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। भविष्य में भी किसी भी मरीज से कोई अस्पताल ओवर चार्जिंग न करे इसके लिए निगरानी कमेटी के सदस्यों को हमेशा सक्रिय रहना चाहिए और वह बिलों की जांच करते रहें।
- ज्ञानचंद गुप्ता, अध्यक्ष हरियाणा विधानसभा।
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यही कारण है कि हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता के निर्देश पर प्रशासन द्वारा गठित निगरानी कमेटी के पास अभी भी लगातार शिकायतें आ रही हैं। निगरानी कमेटी के सदस्य ऐसे मामलों को गंभीरता से लेकर जांच कर रहे हैं। मरीजों को पैसे लौटाने वालों में अल्केमिस्ट, पारस और विंग अस्पताल शामिल हैं। सेक्टर-21 स्थित अल्केमिस्ट ने चार लोगों को 49715 रुपये लौटाए हैं, जबकि सेक्टर-25 स्थित विंग अस्पताल ने तीन लोगों को ओवरचार्ज के 177654 रुपये लौटाए हैं। सबसे ज्यादा सेक्टर-25 स्थित पारस अस्पताल प्रबंधन ने 11 लोगों को 1108843 रुपये लौटाए हैं।
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प्रशासन द्वारा गठित आठ सदस्यीय कमेटी ने शिकायत के आधार पर तीनों अस्पतालों में कोरोना मरीजों के बिलों की जांच की थी। इसमें कई बिलों में गड़बड़ी मिली थी। कमेटी के सदस्यों ने जांच के दौरान पाया कि जो मरीज किसी मेडिक्लेम के तहत अपना इलाज करवा रहे हैं उनके बिल बहुत ज्यादा हैं, जबकि जो सामान्य रूप से इलाज करवा रहे हैं उनके बिल कम हैं। इसके बाद निगरानी कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट अतिरिक्त उपायुक्त को सौंपी थी।
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इस पर कड़ा संज्ञान लेकर अतिरिक्त उपायुक्त ने कारण बताओ नोटिस जारी किया था। शहर के तीनों अस्पताल प्रबंधन ने प्रशासन के सामने पर्सनल हियरिंग के दौरान ओवर चार्जिंग को लेकर गलती स्वीकार की थी। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने तर्क दिया था कि बिल में गड़बड़ी गलती से हुई है, जिसकी वह जांच कर रहे हैं। यदि बिल अधिक लेना पाया गया तो वह लौटा देंगे। पर्सनल हियरिंग के बाद प्रशासन ने तीनों अस्पतालों के संचालकों को स्वयं बिलों का ऑडिट करने का आदेश दिया था।
केस निपटाने को प्रशासन ने एक सप्ताह का दिया था समय
निगरानी कमेटी ने जिन बिलों को लेकर निजी अस्पतालों को नोटिस थमाया था, उनमें लाखों की ओवर चार्जिंग मिली। निगरानी कमेटी ने हिदायत दी थी कि ओवर चार्जिंग की रकम मरीजों को एक हफ्ते में लौटाई जाए। निगरानी कमेटी की सख्ती के बाद तीन अस्पतालों ने 18 मरीजों को 18 लाख 83 हजार 648 रुपये लौटा दिए हैं।
सरकार ने निर्धारित किए थे इलाज के दाम
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश सरकार ने कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज के दाम तय किए थे। सरकार ने आदेश जारी किया था कि यदि किसी अस्पताल ने मरीजों से निर्धारित शुल्क से ज्यादा वसूल किए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता के पास कई शिकायतें पहुंचीं, जिसे उन्होंने गंभीरता से लिया। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री मनोहर लाल और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भी पत्र लिखा था। इतना ही नहीं उन्होंने प्रशासन को एक निगरानी कमेटी गठित करने के निर्देश भी दिए थे।
निगरानी कमेटी में ये हैं शामिल
एडीसी मोहम्मद इमरान रजा, डीईडीसी संजीव राठी, डीसीएस/आईडीएसपी डॉ. राजीव नरवाल, एसएमओ डॉ. अंगिला ढिंगरा, एसडीएस डॉ. शिवानी हुड्डा, आरएमओ डॉ. अर्चना अग्रवाल, एओ नरेंद्र कंडोला और हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल सदस्य बीबी सिंघल शामिल हैं।
निगरानी कमेटी की जांच में कई अस्पतालों के बिलों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इंश्योरेंस, मेडिक्लेम के अंतर्गत इलाज करवाने वाले मरीजों के बिल में दो से तीन का अंतर पाया गया है। अस्पतालों द्वारा बिलों में एक्सरे, लेबोरेट्री, डॉक्टर फीस, इंजेक्शन और दवाइयों के दाम अधिक लगाए गए हैं। अस्पतालों को 25 जून 2020 से लेकर अब जितने भी कोरोना मरीजों का इलाज किया गया है सभी के बिल खुद चेक करके रिपोर्टर स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को सौंपने के लिए कहा गया है। इसके बाद निगरानी कमेटी एक बार फिर बिलों की जांच करेगी। - बीबी सिंघल, मेंबर, हरियाणा स्टेट फार्मेसी काउंसिल, जांच कमेटी
कोरोना महामारी से जो लोग पीड़ित थे। ऐसे समय में उनको किसी प्रकार से कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए था। उनके दुख को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए थी। मानवता के नाते महामारी के समय में लोग सेवा में तत्पर थे। ऐसे समय में अस्पतालों द्वारा कोरोना मरीजों से ओवर चार्जिंग निंदनीय और दुखदायी है। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। भविष्य में भी किसी भी मरीज से कोई अस्पताल ओवर चार्जिंग न करे इसके लिए निगरानी कमेटी के सदस्यों को हमेशा सक्रिय रहना चाहिए और वह बिलों की जांच करते रहें।
- ज्ञानचंद गुप्ता, अध्यक्ष हरियाणा विधानसभा।