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Panchkula News: पीपीएच, हृदय और ब्रेन संबंधी बीमारी से गई तीन महिलाओं की जान

Fri, 07 Aug 2026 01:58 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 01:58 AM IST
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Three women lost their lives due to PPH, heart-related ailments, and brain-related conditions.
तीन प्रसूताओं और नवजात की मौत पर स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट, अलग-अलग बीमारियां बनीं वजह
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परिवारों की शिकायतों पर पीएमओ ने शुरू की अलग जांच
तीनों मेटरनल डेथ का रिव्यू कर रिपोर्ट डीजीएचएस को भेजी गई
आदित्य शर्मा
पंचकूला। सेक्टर-6 नागरिक अस्पताल में बीते 28 दिनों के दौरान डिलीवरी से जुड़े तीन मातृ मृत्यु (मेटरनल डेथ) और एक नवजात की मौत के मामलों की स्वास्थ्य विभाग की रिव्यू रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार एक महिला की मौत पोस्टपार्टम हेमरेज (पीपीएच), दूसरी की हृदय रोग और तीसरी की ब्रेन डिजीज के कारण हुई। वहीं नवजात की मौत की वजह हृदय संबंधी बीमारी बताई गई है। परिवारों की शिकायतों के बाद पीएमओ कार्यालय ने अलग से जांच शुरू कर दी है और रिकॉर्ड की समीक्षा की जा रही है।

पीपीएच और नवजात की मौत पर उठे सवाल
बूंगा गांव की 24 वर्षीय महिला के मामले में रिव्यू के दौरान सामने आया कि प्रसव से पहले उसे ब्रेन हेमरेज हुआ था, जिससे गंभीर रक्तस्राव शुरू हो गया। अस्पताल में चार यूनिट रक्त चढ़ाने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हुआ तो उसे पीजीआई रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत पीपीएच के कारण हुई। इसी महिला के 10 दिन के नवजात की भी मौत हो गई। डॉक्टरों के अनुसार बच्चे को अचानक हार्ट अटैक आया था। हालांकि परिजनों ने उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
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डिलीवरी के 10 दिन बाद रुकी हृदय गति
रायपुररानी के भूड़ गांव निवासी महिला की मौत के मामले में रिपोर्ट में बताया गया कि वह पहले से हृदय रोग से पीड़ित थी। डिलीवरी के करीब 10 दिन बाद अचानक तबीयत बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
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ब्रेन कैल्सिफिकेशन से गई तीसरी महिला की जान
बरवाला के भरेली गांव की महिला की मौत का कारण ब्रेन कैल्सिफिकेशन और दिमाग में बढ़ा दबाव पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार महिला हाई रिस्क श्रेणी में थी। तबीयत बिगड़ने पर उसे मुलाना और बाद में अंबाला के अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को शिकायत देकर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

बढ़ता दबाव, डॉक्टरों की कमी
एमसीएच में गायनी वार्ड शिफ्ट होने के बाद प्रतिदिन 400 से 500 मरीज पहुंच रहे हैं। वर्तमान में वार्ड में तीन नियमित डॉक्टर, दो कंसल्टेंट और 22 डीएनबी डॉक्टर तैनात हैं। स्वास्थ्य विभाग ने अतिरिक्त स्टाफ की भर्ती के लिए डीजीएचएस को प्रस्ताव भेज रखा है।


किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई
सिविल सर्जन डॉ. मुक्ता ने कहा कि रिव्यू में इलाज में देरी, मरीज को समय पर न देखने या इमरजेंसी सेवाओं में किसी प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आई है। वहीं पीएमओ डॉ. आरएस चौहान ने बताया कि शिकायतों के आधार पर सभी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है और किसी स्तर पर चूक मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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