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हरियाणाः अतिथि अध्यापकों ने मांगा 'समान काम, समान वेतन', बोले- इतना अंतर स्वीकार नहीं

Fri, 31 Jan 2020 02:13 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 31 Jan 2020 02:13 PM IST
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difference in salary of teachers and guest lecturers in Haryana
प्रतीकात्मक तस्वीर
हरियणा के सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में कार्यरत गेस्ट टीचर्स और लेक्चरर को वेतन अदायगी में पिक एंड चूज चल रहा है। जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी और कॉलेज लेक्चरर एक ही भर्ती नीति के तहत नियुक्त हुए हैं, लेकिन वेतन असमान है।
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लगभग एक हजार गेस्ट लेक्चरर को समान काम, समान वेतन के तहत 57700 रुपये की अदायगी की जा रही है, जबकि जेबीटी गेस्ट टीचर्स को स्कूल शिक्षा विभाग 26000 रुपये व आठ प्रतिशत डीए, गेस्ट टीजीटी को 30000 रुपये व 8 प्रतिशत डीए व स्कूलों में कार्यरत गेस्ट पीजीटी को 36 हजार रुपये व 8 प्रतिशत डीए हर महीने दिया जा रहा है। इससे गेस्ट टीचर्स खफा हैं। चूंकि, गेस्ट की 58 साल तक सेवा सुरक्षित रखने का कानून तक सरकार विधानसभा में बना चुकी है, बावजूद इसके उन्हें समान काम, समान वेतन नहीं दिया जा रहा।
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बुधवार को शिक्षा निदेशालय में निदेशक मौलिक शिक्षा में हुई गेस्ट टीचर्स की बैठक में भी यह मुद्दा जोरशोर से उठा। निदेशक ने गेस्ट टीचर्स की नियुक्ति पर सवाल उठाए तो हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ के शिक्षक नेता राजेंद्र शास्त्री ने तथ्य पेश कर विभाग के अधिकारियों को चुप करा दिया। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि पांच मार्च 2005 से नवंबर 2005 तक लगभग बैठकें करने के बाद सरकार ने गेस्ट शिक्षकों की भर्ती के लिए नीति बनाई थी। दिसंबर में नीति को अंतिम रूप देकर 21 दिसंबर 2005 से भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई।
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उन्हें समान काम, समान वेतन से वंचित रखा गया है, गेस्ट लेक्चरर को इसका लाभ देने के साथ ही तीन साल की नियमितीकरण पॉलिसी के तहत पक्का भी किया जा रहा है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल शर्मा व प्रदेश प्रवक्ता डॉ. अजय लोहान ने कहा कि गेस्ट टीचर्स को भी कॉलेज कैडर के कर्मचारियों की तरह नियमित होने तक समान काम, समान वेतन मिलना चाहिए। उनकी मांगों को पूरा कर शोषण बंद किया जाए। सरकार ने अपने वादे के बावजूद 14000 अतिथि अध्यापकों को रेगुलर नहीं किया है।


पीएफ, एलटीसी से महरूम, सरप्लस को नहीं मिल रहा वेतन
पीएफ, एलटीसी, मेडिक्लेम पॉलिसी का लाभ भी नहीं दिया जा रहा। तीन सौ से ज्यादा गेस्ट टीचर अन्य जिलों में कार्यरत हैं। वे प्रतिदिन 100 से 200 किलोमीटर घर से दूर जाने को विवश हैं। उनको वापस गृह जिले में भेजा जाए। राजेंद्र शास्त्री ने कहा है कि अनेक जिलों में काफी संख्या में गेस्ट टीचर सरप्लस हैंउनको कई महीनों से वेतन नही दिया जा है। उनको वेतन दिया जाए व उनका समायोजन जिला स्तर पर हो। गेस्ट टीचर्स के बकाया वेतन को जारी करने का पत्र जल्दी जारी हो। उन्होंने शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर से भी मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा है।
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