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मलेरिया व डेंगू के मरीजों के लिए सामान्य अस्पतालों में होंगे डेडीकेटिड वार्ड
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चंडीगढ़। राज्य में मलेरिया व डेंगू के मरीजों की सुविधा के लिए नागरिक अस्पतालों में समर्पित वार्ड व बेड भी आरक्षित रखे जाएंगे। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। साथ ही बारिश के सीजन को देखते हुए राज्य में वेक्टरजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रदेश के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में फॉगिंग कराने के लिए कहा गया है।
मंगलवार को विज यहां राष्ट्रीय वेक्टरजनित बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम, हरियाणा के संबंध में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 8 जुलाई तक मलेरिया के केवल 5 मामलेे आए हैं, जबकि पिछले वर्ष 8 जुलाई तक 10 मलेरिया के मामले थे। इसकी रोकथाम के लिए बुखार की जांच, मच्छर के लारवा की उत्पति, इत्यादि गतिविधियों को घर-घर जाकर टीमों द्वारा जांच किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लारवा को समाप्त करने के लिए राज्य में संचालित 112 फिश हेचरीज़ संचालित हैं जिसके अंतर्गत 7169 तालाबों व जोहड़ों में गंबूजिया मछलियों को छोड़ा गया है। बैठक में राष्ट्रीय वेक्टरजनित बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम, हरियाणा की वार्षिक रिपोर्ट 2021 को भी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जारी किया।
सात जिलों में किसी को नहीं हुआ मलेरिया
मलेरिया रोकथाम के लिए वर्ष 2021 के दौरान 7 जिलों नामत: अंबाला, भिवानी, जींद, कैथल, रोहतक, करनाल, कुरुक्षेत्र को ‘ज़ीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ प्राप्त हुआ है। मतलब इन 7 जिलों में रहने वाले हरियाणा के निवासियों में मलेरिया बीमारी नहीं हुई है। वर्ष 2016 से अब तक राज्य में किसी भी व्यक्ति की मृृत्यु भी मलेरिया से नहीं हुई है। इसके अलावा, वर्ष 2019 से लगातार तीन वर्षों से कैथल जिला को ‘जीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ और पिछले दो वर्षों से अंबाला व जींद को ‘जीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ मिला है। वर्ष 2021 के दौरान राज्य के 331 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों ने भी ‘जीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ हासिल किया है।
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राज्य में 27 डेगूं टेस्टिंग लैब संचालित
राज्य में 27 डेंगू टेस्टिंग लैब संचालित हैं। नागरिक अस्पतालों में भर्ती डेगूं के मरीजों के लिए सिंगल डोनर प्लेटलेटस नि:शुल्क उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। राज्य के 5 जिलों पंचकूला, गुरूग्राम, रोहतक, करनाल व सोनीपत में सिंगल डोनर प्लेटलेटस की सरकारी अफेरेसिस सुविधा उपलब्ध है जिन्हें सभी जिलों के साथ मैप किया गया है।
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मंगलवार को विज यहां राष्ट्रीय वेक्टरजनित बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम, हरियाणा के संबंध में एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव अरोड़ा उपस्थित थे। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष 8 जुलाई तक मलेरिया के केवल 5 मामलेे आए हैं, जबकि पिछले वर्ष 8 जुलाई तक 10 मलेरिया के मामले थे। इसकी रोकथाम के लिए बुखार की जांच, मच्छर के लारवा की उत्पति, इत्यादि गतिविधियों को घर-घर जाकर टीमों द्वारा जांच किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लारवा को समाप्त करने के लिए राज्य में संचालित 112 फिश हेचरीज़ संचालित हैं जिसके अंतर्गत 7169 तालाबों व जोहड़ों में गंबूजिया मछलियों को छोड़ा गया है। बैठक में राष्ट्रीय वेक्टरजनित बीमारी नियंत्रण कार्यक्रम, हरियाणा की वार्षिक रिपोर्ट 2021 को भी स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने जारी किया।
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सात जिलों में किसी को नहीं हुआ मलेरिया
मलेरिया रोकथाम के लिए वर्ष 2021 के दौरान 7 जिलों नामत: अंबाला, भिवानी, जींद, कैथल, रोहतक, करनाल, कुरुक्षेत्र को ‘ज़ीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ प्राप्त हुआ है। मतलब इन 7 जिलों में रहने वाले हरियाणा के निवासियों में मलेरिया बीमारी नहीं हुई है। वर्ष 2016 से अब तक राज्य में किसी भी व्यक्ति की मृृत्यु भी मलेरिया से नहीं हुई है। इसके अलावा, वर्ष 2019 से लगातार तीन वर्षों से कैथल जिला को ‘जीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ और पिछले दो वर्षों से अंबाला व जींद को ‘जीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ मिला है। वर्ष 2021 के दौरान राज्य के 331 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों ने भी ‘जीरो इंडीजीनियस केस स्टेटस’ हासिल किया है।
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राज्य में 27 डेगूं टेस्टिंग लैब संचालित
राज्य में 27 डेंगू टेस्टिंग लैब संचालित हैं। नागरिक अस्पतालों में भर्ती डेगूं के मरीजों के लिए सिंगल डोनर प्लेटलेटस नि:शुल्क उपलब्ध करवाने का प्रावधान है। राज्य के 5 जिलों पंचकूला, गुरूग्राम, रोहतक, करनाल व सोनीपत में सिंगल डोनर प्लेटलेटस की सरकारी अफेरेसिस सुविधा उपलब्ध है जिन्हें सभी जिलों के साथ मैप किया गया है।