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Panchkula News: अवैध हिरासत की शिकायत पर वारंट अफसर को तुरंत मिलेगी सीसीटीवी फुटेज
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-पुलिस स्टेशन पहुंचने वारंट ऑफिसरों को लेकर हाईकोर्ट के सख्त निर्देश
-पासवर्ड रखने वाले अधिकारी के आने का इंतजार नहीं कराया जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत की शिकायतों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में नियुक्त वारंट अफसर को थाने की सीसीटीवी व्यवस्था और रिकॉर्डिंग तक तत्काल पहुंच मिलनी चाहिए। इसके लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति या पासवर्ड रखने वाले अधिकारी का इंतजार नहीं कराया जा सकता।
जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि न्यायिक आदेश लागू करने में विभागीय अनुमति प्रक्रिया बाधा नहीं बन सकती। अदालत ने पंजाब और हरियाणा के पुलिस महानिदेशकों को सीसीटीवी तक 24 घंटे तत्काल पहुंच की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। यह मामला फाजिल्का जिले के अमीर खास पुलिस थाना से जुड़ा है।
एक व्यक्ति ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी जोगिंदर कौर और बेटी ममता कंबोज को अवैध हिरासत में रखा गया है। हाईकोर्ट ने वारंट अफसर नियुक्त कर थाने का निरीक्षण करने का आदेश दिया था। वारंट अफसर ने 22 अगस्त 2026 को निरीक्षण किया, तब दोनों महिलाएं थाने में नहीं मिलीं। हालांकि, निरीक्षण के दौरान सामने आई परिस्थितियों ने अवैध हिरासत की शिकायत को गंभीर बना दिया।
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वारंट अफसर की रिपोर्ट :
वारंट अफसर की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता और चार स्थानीय लोगों ने बयान दिया कि महिलाओं को 21 अगस्त को जबरन थाने ले जाया गया था। याचिकाकर्ता का भाई, जो पंजाब पुलिस में सहायक उप निरीक्षक है, भी निरीक्षण के दौरान थाने में हिरासत में मिला। एक अन्य व्यक्ति ने भी पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया। अदालत ने कहा कि सीसीटीवी तक पहुंच को सामान्य विभागीय अनुमति प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जा सकता। वारंट अफसर के साथ सहयोग न करने पर उच्च अधिकारियों को सूचना देने की व्यवस्था भी की जाए।
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-पासवर्ड रखने वाले अधिकारी के आने का इंतजार नहीं कराया जा सकता
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस हिरासत की शिकायतों की जांच को लेकर महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में नियुक्त वारंट अफसर को थाने की सीसीटीवी व्यवस्था और रिकॉर्डिंग तक तत्काल पहुंच मिलनी चाहिए। इसके लिए किसी वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति या पासवर्ड रखने वाले अधिकारी का इंतजार नहीं कराया जा सकता।
जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि न्यायिक आदेश लागू करने में विभागीय अनुमति प्रक्रिया बाधा नहीं बन सकती। अदालत ने पंजाब और हरियाणा के पुलिस महानिदेशकों को सीसीटीवी तक 24 घंटे तत्काल पहुंच की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए हैं। यह मामला फाजिल्का जिले के अमीर खास पुलिस थाना से जुड़ा है।
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एक व्यक्ति ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी जोगिंदर कौर और बेटी ममता कंबोज को अवैध हिरासत में रखा गया है। हाईकोर्ट ने वारंट अफसर नियुक्त कर थाने का निरीक्षण करने का आदेश दिया था। वारंट अफसर ने 22 अगस्त 2026 को निरीक्षण किया, तब दोनों महिलाएं थाने में नहीं मिलीं। हालांकि, निरीक्षण के दौरान सामने आई परिस्थितियों ने अवैध हिरासत की शिकायत को गंभीर बना दिया।
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वारंट अफसर की रिपोर्ट :
वारंट अफसर की रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता और चार स्थानीय लोगों ने बयान दिया कि महिलाओं को 21 अगस्त को जबरन थाने ले जाया गया था। याचिकाकर्ता का भाई, जो पंजाब पुलिस में सहायक उप निरीक्षक है, भी निरीक्षण के दौरान थाने में हिरासत में मिला। एक अन्य व्यक्ति ने भी पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने का आरोप लगाया। अदालत ने कहा कि सीसीटीवी तक पहुंच को सामान्य विभागीय अनुमति प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जा सकता। वारंट अफसर के साथ सहयोग न करने पर उच्च अधिकारियों को सूचना देने की व्यवस्था भी की जाए।