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Panchkula News: पिंजरे में बंद गिद्धों को नहीं थी उड़ने की आदत, 25 हुए आजाद सात ही उड़े

Wed, 18 Dec 2024 12:12 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Dec 2024 12:12 AM IST
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The vultures locked in the cage were not used to flying, out of 25 released, only seven flew
पिंजौर में पिंजरे के बाहर बैठे गिद्ध। संवाद 
पंचकूला/पिंजौर। जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र से 25 गिद्धों को आजाद किया गया। पिंजरे से बाहर खुले आसमान में पहली बार गिद्धों ने उड़ने की काफी कोशिश की लेकिन सात गिद्ध ही उड़ान भर सके। इन्हें आजाद करने के लिए मंगलवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और वन एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह पहुंचे थे। उनके साथ कालका की विधायक शक्ति रानी शर्मा भी थीं।
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इससे पहले जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के कर्मचारियों ने कुछ गिद्धों को पिंजरे से जबरन बाहर निकाला। इस दौरान अधिकांश गिद्ध पिंजरे में रहे जबकि काफी जद्दोजहद के बाद दो घंटे में एक-एक कर सात ने खुले आसमान में उड़ान भरी। केंद्र के अधिकारियों ने बताया कि लंबे समय से पिंजरे में रहने की आदत होने की वजह से गिद्ध उड़ान नहीं भर पा रहे हैं। धीरे-धीरे पिंजरे से बाहर निकल कर आसमान में ऊंची उड़ान भरेंगे। बता दें कि वर्तमान समय में जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र में 378 गिद्ध हैं।
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केंद्र में सफेद पीठ वाले 97 व लंबी चोंच वाले 219 गिद्ध

मुख्यमंत्री ने कहा कि गिद्धों के संरक्षण के लिए बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी ने हरियाणा सरकार के साथ समझौता किया है। इसके तहत पिंजौर में गिद्धों की संख्या नेचुरल और कृत्रिम प्रजनन विधि से बढ़ाने का लक्ष्य था। जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र एशिया का सबसे बड़ा केंद्र है। इस केंद्र में सफेद पीठ वाले 97, लंबी चोंच वाले 219 और पतली चोंच वाले 62 गिद्ध हैं। नवंबर 2024 तक केंद्र में पैदा हुए इन प्रजातियों के चूजों की संख्या 404 है। केंद्र में 8 नर्सरी एवियरी, 6 कॉलोनी एवियरी, 8 होल्डिंग एवियरी, 2 डिस्पले एवियरी, 4 अस्पताल एवियरी, 8 प्रजनन एवियरी, एक ग्रीन एवियरी और एक रिलिज एवियरी हैं। मुख्यमंत्री ने जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र के अधिकारी किशोर रीठे और उनकी टीम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने गौरैया के संरक्षण के लिए कार्य करने को कहा। सीएम ने कहा कि गौरैया के संरक्षण के लिए सरकार की तरफ से हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
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