चंडीगढ़। हरियाणा की 21 माइक्रोब्रेवरी की बियर में एल्कोहल की मात्रा ही पता नहीं है। इनकी बीयर के नमूने सरकारी आबकारी प्रयोगशाला में विश्लेषण के लिए नहीं भेजे जा रहे। बीयर की गुणवत्ता पर भी संदेह है। इन माइक्रोब्रेवरी में 2 फरीदाबाद, 15 गुरुग्राम पूर्व, 2 गुरुग्राम पश्चिम और 2 पंचकूला की हैं। भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक यानी कैग ने अपनी रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। 31 मार्च 2021 को समाप्त वित्त वर्ष की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश सरकार ने 2020-21 की आबकारी नीति में हर महीने एक बार माइक्रोब्रेवरी से बीयर के नमूने लेकर पास की सरकारी आबकारी प्रयोगशाला में भेजने का प्रावधान किया था। इसके पीछे मकसद कम अल्कोहल वाली शराब पीने की आदत लोगों में डालना था। अल्कोहल की मात्रा और गुणवत्ता रिपोर्ट माइक्रोब्रेवरी के बाहर प्रदर्शित की जानी थी।
कैग ने गुुरुग्राम पूर्व, पश्चिम, फरीदाबाद और पंचकूला आबकारी जिले के दस्तावेजों को जुलाई से दिसंबर 2021 के बीच जांचा, जिसमें पाया गया कि बीयर के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला में नहीं भेजे जा रहे। जिससे माइक्रोब्रेवरी में परोसी जाने वाली बीयर में एल्कोहल की मात्रा और गुणवत्ता का पता नहीं लगाया जा सका। आबकारी एवं कराधान विभाग ने नीति में शामिल प्रावधानों को सख्ती से लागू कराने के लिए कड़े कदम भी नहीं उठाए। चारों जिलों के उप आबकारी एवं कराधान आयुक्तों ने कैग को दिए अपने जवाब में कहा है कि लेखापरीक्षा के दौरान उठाए गए बिंदुओं पर अमल करेंगे। भविष्य में बीयर के नमूनों को हर महीने जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा जाएगा।