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दंड का मकसद सुधार होना चाहिए, केवल कारावास नहीं: हाईकोर्ट

Tue, 20 Jan 2026 11:43 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jan 2026 11:43 PM IST
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The purpose of punishment should be reformation, not mere imprisonment: High Court
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि आपराधिक न्याय प्रणाली का मुख्य उद्देश्य अपराधियों में सुधार लाना होना चाहिए, साथ ही पीड़ित और आरोपी दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखना भी आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फटकार, परिवीक्षा जैसे सुधारात्मक उपाय भविष्य की दिशा हैं। यह टिप्पणी अदालत ने पटियाला निवासी 87 वर्षीय बुजुर्ग की सजा कम करते हुए की।
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जस्टिस अमन चौधरी ने दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए आरोपी की सजा को घटाकर पहले से भुगती गई अवधि 5 माह 19 दिन तक सीमित कर दिया। हालांकि, अदालत ने जुर्माने की राशि 1,000 से बढ़ाकर 10,000 कर दी और निर्देश दिया कि बढ़ी हुई राशि घायल/शिकायतकर्ता को अदा की जाए।
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मामला अगस्त 2009 का है। अदालत को बताया गया कि शिकायतकर्ता जब नहर के पानी से अपने खेतों की सिंचाई करने गया तो पड़ोसियों की ओर से तय समय से पहले पानी लेने पर उसने आपत्ति की। इसके बाद कथित तौर पर उस पर हमला किया गया, जिससे उसे चोटें आईं। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 2012 में याची को तीन साल की सजा सुनाई थी।
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याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती को केवल सजा की मात्रा तक सीमित रखा और आग्रह किया कि सजा को पहले से भुगती गई अवधि तक कम किया जाए। याची ने कहा कि वह पहली बार का अपराधी है, समाज के गरीब तबके से ताल्लुक रखता है। वह परिवार का एकमात्र कमाने वाला है और उसने कभी जमानत का दुरुपयोग नहीं किया। 16 वर्षों से अधिक समय तक लंबी कानूनी कार्यवाही की पीड़ा झेली है।

इन दलीलों को स्वीकार करते हुए अदालत ने रिकॉर्ड किया कि आरोपी ने सजा का एक बड़ा हिस्सा पहले ही भुगत लिया है और लंबित कार्यवाही के दौरान उसका आचरण भी संतोषजनक रहा है। न्यायमूर्ति चौधरी ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता की सजा को पहले से भुगती गई अवधि तक घटा दिया जाए तो न्याय के उद्देश्य पर्याप्त रूप से पूरे होंगे।
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