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पूर्व विधायक प्रदीप चौधरी के रास्ते अभी नहीं हुए बंद, भाजपा देख रही अवसर
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चंडीगढ़। कालका से पूर्व कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की विधानसभा सदस्यता बहाली के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। हिमाचल प्रदेश के बद्दी की निचली अदालत के दोषसिद्धि व दंडादेश पर हाईकोर्ट अगर रोक लगा देता है तो उनकी सदस्यता फिर बहाल हो जाएगी। इस संभावना के बावजूद भाजपा कालका सीट को खाली मानते हुए उपचुनाव में जीत के अवसर देख रही है।
विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने प्रदीप चौधरी की सदस्यता शनिवार को रद्द कर दी थी। उन्हें बद्दी की अदालत ने 3 साल की सजा सुनाने के साथ ही 85 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। बिना नोटिस के स्पीकर द्वारा विधायक को अयोग्य घोषित करने पर कांग्रेस हमलावर हो गई है । उसने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रदीप को दोबारा विधायक पर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने पर ही मिलेगा। चूंकि, दिसंबर 2019 में मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक की सदस्यता हाईकोर्ट के दोषसिद्धि व दंडादेश स्टे करने पर बहाल हो चुकी है।
पंजाब - हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि बद्दी की अदालत ने ही प्रदीप चौधरी एवं अन्य दोषियों के विरुद्ध दिया दंडादेश दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी ) 1973 की धारा 389 के अंतर्गत 28 फरवरी तक स्थगित कर दिया है ताकि सभी दोषी ऊपरी अदालत (सोलन जिले की सेशन कोर्ट) में इसको चुनौती देते हुए अपील दायर कर सकें। लेकिन, निचली अदालत के दंडादेश के विरुद्ध स्थगन आदेश (स्टे ) प्राप्त करना ही चौधरी के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अगर उन्हें अपनी विधानसभा सदस्यता बहाल करवानी है, तो उन्हें अपनी दोषसिद्धि के आदेश का अपीलेट कोर्ट से स्थगन भी करवाना होगा। उन्हें राहत प्रदान करना या न करना अदालत के विवेकाधिकार पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार ऐसे मामलों में सजा के आदेश या दंडादेश को अपीलेट कोर्ट (सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट) तत्काल स्टे कर सकती है, मगर दोषसिद्धि को कुछ विशेष या उपयुक्त परिस्थितियों में ही अपीलेट कोर्ट द्वारा लिखित कारण स्पष्ट कर ही स्थगित किया जाता है।
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मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक को मिल चुकी राहत
एडवोकेट हेमंत ने बताया कि सवा वर्ष पूर्व 31 अक्तूबर 2019 को मध्य प्रदेश की एक अदालत ने प्रदेश विधानसभा के मौजूदा भाजपा विधायक प्रह्लाद लोधी को दो वर्ष का कारावास सुनाया था। जिसके दो दिन बाद ही 2 नवंबर 2019 को प्रदेश के तत्कालीन विधानसभा स्पीकर ने लोधी को सदन से अयोग्य घोषित कर दिया। हालांकि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने लोधी के विरुद्ध न केवल दंडादेश, बल्कि दोषसिद्धि को भी स्थगित कर दिया, जिसकी अवधि आज तक बढ़ाई जा रही है। इस पर स्पीकर को दिसंबर 2019 में ही लोधी की सदस्यता बहाल करनी पड़ी थी।
लतिका की कालका में लग सकती है लॉटरी
प्रदीप चौधरी के अयोग्य घोषित होने के बाद अगर कालका सीट पर उपचुनाव होता है तो पूर्व भाजपा विधायक लतिका शर्मा की लॉटरी लग सकती है। लतिका बीते विधानसभा चुनाव में हार के बाद से क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रदेश में भाजपा गठबंधन की सरकार है, ऐसे में उपचुनाव जीतने के लिए पार्टी पूरा दमखम लगा देगी ताकि उसका संख्या बल और बढ़ जाए। सरकार की नजर ऐलनाबाद उपचुनाव में जीत दर्ज करने पर भी है।
स्पीकर ने छुट्टी वाले दिन जल्दबाजी में सुनाया फैसला : सैलजा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने ट्वीट कर कहा है कि कालका से कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की सदस्यता रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। विधानसभा अध्यक्ष ने आनन फानन में छुट्टी वाले दिन उन्हें नोटिस दिए बिना, बिना सुने, बिना ऊपरी अदालत में जाने का मौका दिए एकतरफा फैसला सुनाया है। यह निंदनीय है।
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विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने प्रदीप चौधरी की सदस्यता शनिवार को रद्द कर दी थी। उन्हें बद्दी की अदालत ने 3 साल की सजा सुनाने के साथ ही 85 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। बिना नोटिस के स्पीकर द्वारा विधायक को अयोग्य घोषित करने पर कांग्रेस हमलावर हो गई है । उसने कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पूरे घटनाक्रम के बाद अब प्रदीप को दोबारा विधायक पर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलने पर ही मिलेगा। चूंकि, दिसंबर 2019 में मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक की सदस्यता हाईकोर्ट के दोषसिद्धि व दंडादेश स्टे करने पर बहाल हो चुकी है।
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पंजाब - हरियाणा हाईकोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि बद्दी की अदालत ने ही प्रदीप चौधरी एवं अन्य दोषियों के विरुद्ध दिया दंडादेश दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी ) 1973 की धारा 389 के अंतर्गत 28 फरवरी तक स्थगित कर दिया है ताकि सभी दोषी ऊपरी अदालत (सोलन जिले की सेशन कोर्ट) में इसको चुनौती देते हुए अपील दायर कर सकें। लेकिन, निचली अदालत के दंडादेश के विरुद्ध स्थगन आदेश (स्टे ) प्राप्त करना ही चौधरी के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अगर उन्हें अपनी विधानसभा सदस्यता बहाल करवानी है, तो उन्हें अपनी दोषसिद्धि के आदेश का अपीलेट कोर्ट से स्थगन भी करवाना होगा। उन्हें राहत प्रदान करना या न करना अदालत के विवेकाधिकार पर निर्भर करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के अनुसार ऐसे मामलों में सजा के आदेश या दंडादेश को अपीलेट कोर्ट (सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट) तत्काल स्टे कर सकती है, मगर दोषसिद्धि को कुछ विशेष या उपयुक्त परिस्थितियों में ही अपीलेट कोर्ट द्वारा लिखित कारण स्पष्ट कर ही स्थगित किया जाता है।
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मध्यप्रदेश में भाजपा विधायक को मिल चुकी राहत
एडवोकेट हेमंत ने बताया कि सवा वर्ष पूर्व 31 अक्तूबर 2019 को मध्य प्रदेश की एक अदालत ने प्रदेश विधानसभा के मौजूदा भाजपा विधायक प्रह्लाद लोधी को दो वर्ष का कारावास सुनाया था। जिसके दो दिन बाद ही 2 नवंबर 2019 को प्रदेश के तत्कालीन विधानसभा स्पीकर ने लोधी को सदन से अयोग्य घोषित कर दिया। हालांकि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की एकल पीठ ने लोधी के विरुद्ध न केवल दंडादेश, बल्कि दोषसिद्धि को भी स्थगित कर दिया, जिसकी अवधि आज तक बढ़ाई जा रही है। इस पर स्पीकर को दिसंबर 2019 में ही लोधी की सदस्यता बहाल करनी पड़ी थी।
लतिका की कालका में लग सकती है लॉटरी
प्रदीप चौधरी के अयोग्य घोषित होने के बाद अगर कालका सीट पर उपचुनाव होता है तो पूर्व भाजपा विधायक लतिका शर्मा की लॉटरी लग सकती है। लतिका बीते विधानसभा चुनाव में हार के बाद से क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रदेश में भाजपा गठबंधन की सरकार है, ऐसे में उपचुनाव जीतने के लिए पार्टी पूरा दमखम लगा देगी ताकि उसका संख्या बल और बढ़ जाए। सरकार की नजर ऐलनाबाद उपचुनाव में जीत दर्ज करने पर भी है।
स्पीकर ने छुट्टी वाले दिन जल्दबाजी में सुनाया फैसला : सैलजा
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा ने ट्वीट कर कहा है कि कालका से कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की सदस्यता रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। विधानसभा अध्यक्ष ने आनन फानन में छुट्टी वाले दिन उन्हें नोटिस दिए बिना, बिना सुने, बिना ऊपरी अदालत में जाने का मौका दिए एकतरफा फैसला सुनाया है। यह निंदनीय है।