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कोड में छेड़छाड़ या काटछांट होने पर ओआरएम सीट नहीं जांची जाती
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चंडीगढ़। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ओआरएम सीट कोड में छेड़छाड़ या कोई काटछांट होने पर उसको नहीं जांचता। आयोग ने पंजाब हरियाणा उच्च न्यायालय को यह जानकारी रोहतक निवासी अभ्यर्थी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी।
मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मंजरी नेहरू कौल को याची के वकील जसबीर मोर ने बताया कि याचिकाकर्ता ने 23 अगस्त को पीटीआई भर्ती की परीक्षा दी थी। उसके अनुसार उसके 116 सवाल सही है जबकि सफल होने के लिए 100 सवाल सही होने चाहिए। लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद याची को साक्षात्कार व दस्तावेज की जांच के लिए नहीं बुलाया गया। जब सरिता ने आयोग से इस बाबत जानकारी मांगी तो उसको बताया गया कि उसने ओएमआर सीट में सवाल नंबर 90 का उत्तर सी से मिटाकर डी कर दिया था, जिस कारण उसकी ओएमआर सीट की जांच नहीं की जा सकती। याची ने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को प्रस्तुति पत्र देकर आग्रह किया कि सवाल नंबर 90 के अंक काट कर उसकी ओएमआर सीट की जांच कर ली जाए तो भी वह योग्य है। लेकिन आयोग ने अपने नियमों का हवाला देकर ओएमआर सीट की जांच से इनकार कर दिया।
मोर ने उच्च न्यायालय को बताया कि इसी विषय पर 2017 में उच्च न्यायालय ने कर्मचारी चयन आयोग के तकनीकी विशेषज्ञ को बुलाकर पूछा था कि क्या किसी उत्तर को मिटाकर अन्य उत्तर का चयन करने पर ओएमआर सीट की जांच नहीं हो सकती। इस पर पीठ को बताया गया कि केवल उन ओएमआर सीट की जांच संभव नहीं है, जिसमें ओएमआर सीट के किसी कोने को काट या छांटकर दिया गया हो या ओएमआर सीट के बार कोड के साथ छेड़छाड़ की गई हो। बाकी सभी तरह की जांच हो सकती है।
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अंडरटेकिंग के बावजूद नहीं बदले नियम
उस समय हरियाणा सरकार ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया था कि जिन भर्ती का परिणाम जारी हो चुका है, उनमें बदलाव असंभव है, इसलिए अदालत उस याचिका पर कोई आदेश जारी न करे। एडवोकेट जनरल ने अंडरटेकिंग दी थी कि आगे सभी भर्ती के लिए नियम में बदलाव कर दिया जाएगा। लेकिन तीन साल पहले अंडरटेकिंग देने के बावजूद आयोग ने व्यवस्था नहीं बदली।
कर्मचारी चयन आयोग को सीट आरक्षित रखने का आदेश
उच्च न्यायालय ने याची के वकील की दलील सुनने के बाद हैरानी जताते हुए कर्मचारी चयन आयोग को याची के लिए एक सीट आरक्षित रखने का आदेश दिया। अदालत ने याची को साक्षात्कार में शामिल करने का आदेश देते हुए आयोग को मामले के निपटारे तक उसका परिणाम सील बंद लिफाफे में रखने का भी आदेश दिया। अदालत ने हरियाणा सरकार व कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब देने का भी आदेश दिया है।
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मामले की सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मंजरी नेहरू कौल को याची के वकील जसबीर मोर ने बताया कि याचिकाकर्ता ने 23 अगस्त को पीटीआई भर्ती की परीक्षा दी थी। उसके अनुसार उसके 116 सवाल सही है जबकि सफल होने के लिए 100 सवाल सही होने चाहिए। लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद याची को साक्षात्कार व दस्तावेज की जांच के लिए नहीं बुलाया गया। जब सरिता ने आयोग से इस बाबत जानकारी मांगी तो उसको बताया गया कि उसने ओएमआर सीट में सवाल नंबर 90 का उत्तर सी से मिटाकर डी कर दिया था, जिस कारण उसकी ओएमआर सीट की जांच नहीं की जा सकती। याची ने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को प्रस्तुति पत्र देकर आग्रह किया कि सवाल नंबर 90 के अंक काट कर उसकी ओएमआर सीट की जांच कर ली जाए तो भी वह योग्य है। लेकिन आयोग ने अपने नियमों का हवाला देकर ओएमआर सीट की जांच से इनकार कर दिया।
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मोर ने उच्च न्यायालय को बताया कि इसी विषय पर 2017 में उच्च न्यायालय ने कर्मचारी चयन आयोग के तकनीकी विशेषज्ञ को बुलाकर पूछा था कि क्या किसी उत्तर को मिटाकर अन्य उत्तर का चयन करने पर ओएमआर सीट की जांच नहीं हो सकती। इस पर पीठ को बताया गया कि केवल उन ओएमआर सीट की जांच संभव नहीं है, जिसमें ओएमआर सीट के किसी कोने को काट या छांटकर दिया गया हो या ओएमआर सीट के बार कोड के साथ छेड़छाड़ की गई हो। बाकी सभी तरह की जांच हो सकती है।
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अंडरटेकिंग के बावजूद नहीं बदले नियम
उस समय हरियाणा सरकार ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया था कि जिन भर्ती का परिणाम जारी हो चुका है, उनमें बदलाव असंभव है, इसलिए अदालत उस याचिका पर कोई आदेश जारी न करे। एडवोकेट जनरल ने अंडरटेकिंग दी थी कि आगे सभी भर्ती के लिए नियम में बदलाव कर दिया जाएगा। लेकिन तीन साल पहले अंडरटेकिंग देने के बावजूद आयोग ने व्यवस्था नहीं बदली।
कर्मचारी चयन आयोग को सीट आरक्षित रखने का आदेश
उच्च न्यायालय ने याची के वकील की दलील सुनने के बाद हैरानी जताते हुए कर्मचारी चयन आयोग को याची के लिए एक सीट आरक्षित रखने का आदेश दिया। अदालत ने याची को साक्षात्कार में शामिल करने का आदेश देते हुए आयोग को मामले के निपटारे तक उसका परिणाम सील बंद लिफाफे में रखने का भी आदेश दिया। अदालत ने हरियाणा सरकार व कर्मचारी चयन आयोग को नोटिस जारी कर जवाब देने का भी आदेश दिया है।