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स्मार्ट बनेगा पंजाब का निकाय विभाग: इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर लांच, अब हर काम होगा ऑनलाइन

Sat, 20 Aug 2022 12:42 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 20 Aug 2022 12:42 AM IST
सार

प्रशिक्षण देने के लिए चंडीगढ़ से सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की टीम संबंधित शहर में जाकर कर्मचारियों को इसकी बारीकियां बताएगी। ईपीएम के जरिये विकास योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। एक बार बना एस्टीमेट जब ऑनलाइन ईपीएम में दर्ज हो जाएगा, उसे 10 साल तक भी बदला नहीं जा सकेगा।

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The local body department will be smart, the mess of files will end
file in office - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पंजाब के निकाय विभाग को स्मार्ट करने की कवायद शुरू हो गई है। अब विभाग फाइलों के झंझट से मुक्त हो जाएगा। कंप्यूटर पर विकास योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के बाद उनकी मंजूरी ऑनलाइन ही दी जाएगी। विभाग के कंप्यूटरीकरण से काम में पारदर्शिता आने के साथ ही एस्टीमेट में छेड़छाड़ करने की संभावना भी खत्म हो जाएगी।
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पंजाब सरकार ने इसके लिए इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट मैनेजमेंट (ईपीएम) सॉफ्टवेयर लांच किया है। नगर निगमों के साथ-साथ स्थानीय निकाय विभाग के तहत आने वाली नगर पंचायतों, नगर परिषदों और इंप्रूवमेंट ट्रस्ट तक ईपीएम के जरिये ही काम करेंगे। अभी तक स्थानीय निकाय विभाग में 50 लाख रुपये से अधिक के सभी कामों की पहले डीपीआर बनती थी। फिर मंजूरी के लिए चंडीगढ़ आती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। कंप्यूटर पर ही डीपीआर तैयार होकर ऑनलाइन मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। ईपीएम को किस तरह चलाया जाएगा इसका प्रशिक्षण शुरू हो गया है। 
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प्रशिक्षण देने के लिए चंडीगढ़ से सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की टीम संबंधित शहर में जाकर कर्मचारियों को इसकी बारीकियां बताएगी। ईपीएम के जरिये विकास योजनाओं में पारदर्शिता आएगी। एक बार बना एस्टीमेट जब ऑनलाइन ईपीएम में दर्ज हो जाएगा, उसे 10 साल तक भी बदला नहीं जा सकेगा। इससे बड़ी गड़बड़ी रुकेगी।
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ऐसे मिलेगी फाइलों की मंजूरी

निकाय विभाग के जेई द्वारा एस्टीमेट को ऑनलाइन तैयार किया जाएगा। इसको आगे मंजूरी के लिए एसडीओ के पास भेजा जाएगा। एसडीओ चेक कर आगे एक्सईएन के पास भेजेगा। तकनीकी फाइनल मंजूरी एसई देगा। इसके बाद प्रशासनिक मंजूरी के लिए एसई आगे ऑनलाइन अप्रूवल के लिए निगम कमिश्नर के पास एस्टीमेट भेजेगा। उनकी तरफ से फाइनल मंजूरी के बाद एफएंडसीसी में मंजूरी देने के लिए प्रिंट मेयर के पास पहुंचेंगे। इस सारी प्रक्रिया से फायदा यह भी होगा कि अधिकारियों को फाइलें लेकर दफ्तरों में मंजूरी के लिए जाना नहीं पड़ेगा। दफ्तर बैठे ही सभी प्रकार की मंजूरी होगी। इससे समय की बचत होगी और टेंडर की प्रक्रिया में लगने वाला समय भी कम होगा।

एक करोड़ से अधिक का ऑनलाइन होगा भुगतान

अभी तक स्थानीय निकाय विभाग में जिन ठेकेदारों के काम एक करोड़ रुपये से अधिक होते थे उन्हें भुगतान के लिए चंडीगढ़ के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब ऐसा नहीं होगा विकास कार्यों का भुगतान ऑनलाइन ही किया जाएगा।
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