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Panchkula News: सैंपलिंग के लिए जांच टीम ने शिकायतकर्ता से ही मांग लिए रुपये
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जांच के आदेश के दो माह बाद भी मौके पर नहीं पहुंची टीम, सेक्टर-11/15 और 12/14 रैली चौक का मामला
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-11/15 और 12/14 रैली चौक की टूटी मास्टिक एस्फाल्ट सड़क की जांच के लिए टीम दो माह बाद भी मौके पर नहीं पहुंच सकी है। जांच टीम के पदाधिकारी सड़क का सैंपल लेने से पहले उसके जांच पर होने वाले खर्च के लिए शिकायतकर्ता पर दबाव बना रहे हैंं। यह मामला उपायुक्त मोनिका गुप्ता के संज्ञान में आ गया है। उपायुक्त का कहना है कि सड़क नगर निगम की है।
समय से पहले सड़क कैसे टूट गई। यह जांच का विषय है, लेकिन कोई आम आदमी सड़क सामग्री की जांच के लिए नगर निगम, जिला प्रशासन से मांग करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि शिकायतकर्ता से सैंपलिंग की जांच का खर्च वसूला जाएगा। यह सड़क नगर निगम की है। इसकी सैंपलिंग की जांच का भुगतान भी नगर निगम करेगा। जिला परिषद का कोई भी कर्मचारी शिकायतकर्ता से सैंपलिंग की जांच के पैसे मांग रहा है, तो इसकी जांच की जाएगी।
दरअसल करीब 77 लाख की लागत से सेक्टर-11/15 और 12/14 रैली चौक के राउंड एबाउट पर नगर निगम ने मजबूती के लिए मास्टिक एस्फाल्ट सड़क का निर्माण करवाया था। इस सड़क की लाइफ पांच से आठ साल तक होती है, लेकिन यह सड़क महज छह माह में टूट गई। इसकी शिकायत 27 फरवरी 2024 को पंचकूला के तत्कालीन उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को पंचकूला विकास मंच ने दी। इसकी जांच की जिम्मेदारी उपायुक्त ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपी थी।
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उपायुक्त ने 12 सितंबर को जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी गगनदीप को जांच सौंपी थी। इसके लिए कमेटी बनाई गई थी। इसमें विभाग के एसडीओ और एक्सईएन सहित कई कर्मचारी शामिल किए गए थे। दूसरी ओर मंच की शिकायत के बाद नगर निगम के महापौर ने कुलभूषण गोयल के निर्देश के बाद ठेकेदार की जमानत राशि जब्त कर ली थी। कंपनी को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया गया था।
दस माह में दो बार बदले जांच अधिकारी
इस केस में दस माह में दो बार जांच अधिकारी बदल चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक महज कमेटी गठित हुई है। पंचकूला विकास मंच के प्रधान देवराज शर्मा ने बताया कि पहली शिकायत फरवरी 2024 में पूर्व उपायुक्त सुशील सारवान को दी थी। उसके बाद उपायुक्त ने जांच की जिम्मेदारी मार्च में तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त सचिन गुप्ता को दी थी, जो उस समय नगर निगम कमिश्नर भी थे। इस पर मंच ने एतराज उठाया था। कुछ दिन बाद पंचकूला से उपायुक्त सुशील सारवान का ट्रांसफर हो गया। उनकी जगह उपायुक्त का कार्यभार डॉ. यश गर्ग ने संभाला। अप्रैल में विकास मंच के पदाधिकारी डॉ. यश गर्ग से मिलकर जांच अधिकारी बदलने की मांग की। मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि जिसके खिलाफ शिकायत है, अगर वहीं जांच अधिकारी होगा तो उससे न्याय की क्या उम्मीद कर सकते हैं। जिसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को मामले की जांच के आदेश दिए थे।
इन चौक पर लागत आई
नगर निगम ने सेक्टर-11-12-12ए-14 और सेक्टर-10-11-14-15 के चौक के आसपास मस्टिक एस्फाल्ट की सड़क बनाई गई थी। इनमें एक चौक पर 37 लाख और दूसरे पर 40 लाख रुपये का काम करवाया गया था। अब दोनों चौक की मस्टिक एस्फाल्ट बीच से उखड़ गई है।
21 नवंबर को जिला परिषद कार्यालय से मेरे पास फोन आया था। इसमें जांच के लिए गठित कमेटी ने मास्टिक एस्फाल्ट सड़क की सैंपलिंग जांच का खर्च वहन करने की बात कही थी। टीम अब तक जांच के लिए मौके पर नहीं गई है। आने वाले मंगलवार को टीम जांच के लिए दो राउंड अबाउटों पर जाएगी। -राकेश अग्रवाल, पदाधिकारी पंचकूला विकास मंच।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। सेक्टर-11/15 और 12/14 रैली चौक की टूटी मास्टिक एस्फाल्ट सड़क की जांच के लिए टीम दो माह बाद भी मौके पर नहीं पहुंच सकी है। जांच टीम के पदाधिकारी सड़क का सैंपल लेने से पहले उसके जांच पर होने वाले खर्च के लिए शिकायतकर्ता पर दबाव बना रहे हैंं। यह मामला उपायुक्त मोनिका गुप्ता के संज्ञान में आ गया है। उपायुक्त का कहना है कि सड़क नगर निगम की है।
समय से पहले सड़क कैसे टूट गई। यह जांच का विषय है, लेकिन कोई आम आदमी सड़क सामग्री की जांच के लिए नगर निगम, जिला प्रशासन से मांग करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि शिकायतकर्ता से सैंपलिंग की जांच का खर्च वसूला जाएगा। यह सड़क नगर निगम की है। इसकी सैंपलिंग की जांच का भुगतान भी नगर निगम करेगा। जिला परिषद का कोई भी कर्मचारी शिकायतकर्ता से सैंपलिंग की जांच के पैसे मांग रहा है, तो इसकी जांच की जाएगी।
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दरअसल करीब 77 लाख की लागत से सेक्टर-11/15 और 12/14 रैली चौक के राउंड एबाउट पर नगर निगम ने मजबूती के लिए मास्टिक एस्फाल्ट सड़क का निर्माण करवाया था। इस सड़क की लाइफ पांच से आठ साल तक होती है, लेकिन यह सड़क महज छह माह में टूट गई। इसकी शिकायत 27 फरवरी 2024 को पंचकूला के तत्कालीन उपायुक्त डॉ. यश गर्ग को पंचकूला विकास मंच ने दी। इसकी जांच की जिम्मेदारी उपायुक्त ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को सौंपी थी।
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उपायुक्त ने 12 सितंबर को जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी गगनदीप को जांच सौंपी थी। इसके लिए कमेटी बनाई गई थी। इसमें विभाग के एसडीओ और एक्सईएन सहित कई कर्मचारी शामिल किए गए थे। दूसरी ओर मंच की शिकायत के बाद नगर निगम के महापौर ने कुलभूषण गोयल के निर्देश के बाद ठेकेदार की जमानत राशि जब्त कर ली थी। कंपनी को ब्लैक लिस्ट भी कर दिया गया था।
दस माह में दो बार बदले जांच अधिकारी
इस केस में दस माह में दो बार जांच अधिकारी बदल चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक महज कमेटी गठित हुई है। पंचकूला विकास मंच के प्रधान देवराज शर्मा ने बताया कि पहली शिकायत फरवरी 2024 में पूर्व उपायुक्त सुशील सारवान को दी थी। उसके बाद उपायुक्त ने जांच की जिम्मेदारी मार्च में तत्कालीन अतिरिक्त उपायुक्त सचिन गुप्ता को दी थी, जो उस समय नगर निगम कमिश्नर भी थे। इस पर मंच ने एतराज उठाया था। कुछ दिन बाद पंचकूला से उपायुक्त सुशील सारवान का ट्रांसफर हो गया। उनकी जगह उपायुक्त का कार्यभार डॉ. यश गर्ग ने संभाला। अप्रैल में विकास मंच के पदाधिकारी डॉ. यश गर्ग से मिलकर जांच अधिकारी बदलने की मांग की। मंच के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि जिसके खिलाफ शिकायत है, अगर वहीं जांच अधिकारी होगा तो उससे न्याय की क्या उम्मीद कर सकते हैं। जिसके बाद तत्कालीन उपायुक्त ने नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी को मामले की जांच के आदेश दिए थे।
इन चौक पर लागत आई
नगर निगम ने सेक्टर-11-12-12ए-14 और सेक्टर-10-11-14-15 के चौक के आसपास मस्टिक एस्फाल्ट की सड़क बनाई गई थी। इनमें एक चौक पर 37 लाख और दूसरे पर 40 लाख रुपये का काम करवाया गया था। अब दोनों चौक की मस्टिक एस्फाल्ट बीच से उखड़ गई है।
21 नवंबर को जिला परिषद कार्यालय से मेरे पास फोन आया था। इसमें जांच के लिए गठित कमेटी ने मास्टिक एस्फाल्ट सड़क की सैंपलिंग जांच का खर्च वहन करने की बात कही थी। टीम अब तक जांच के लिए मौके पर नहीं गई है। आने वाले मंगलवार को टीम जांच के लिए दो राउंड अबाउटों पर जाएगी। -राकेश अग्रवाल, पदाधिकारी पंचकूला विकास मंच।