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Panchkula News: स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर श्रेणी डाॅग बाइट के पीड़ितों की सत्यापन प्रक्रिया की शुरू
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पंचकूला। शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने डॉग बाइट पीड़ितों की सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासन के निर्देश पर डॉक्टरों के बोर्ड ने गंभीर श्रेणी के 4 मरीजों में से 3 के घावों का सत्यापन किया। इसके बाद प्रशासन की कमेटी पीड़ितों के लिए मुआवजे की राशि तय करेगी। स्वास्थ्य विभाग ने रिकॉर्ड सिस्टम को भी नया रूप दिया है। अब हर मरीज का कार्ड के साथ-साथ शॉर्ट फाइल के ताैर पर रिकार्ड रखा जाएगा। फिलहाल सिविल अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों में एंटीरेबीज इंजेक्शन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है।
गंभीर मामलों की होगी दोबारा जांच
मुआवजे की प्रक्रिया के तहत स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर श्रेणी के 4 पीड़ितों को वेरिफिकेशन के लिए बुलाया। डॉक्टरों की टीम ने इनमें से 3 मरीजों के घावों की दोबारा जांच की। जांच में कुत्ता काटने पर आए घाव की तस्दीक घटना के बाद ली गई तस्वीर देखकर की गई। यह भी देखा गया कि मरीज को एंटीरेबीज का इलाज समय पर मिला या नहीं और प्रोटोकॉल के अनुसार टीके लगे या नहीं। वेरिफिकेशन रिपोर्ट अब प्रशासन की कमेटी को भेजी जाएगी। कमेटी ही तय करेगी कि किस मरीज को कितना मुआवजा मिले। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में गंभीर और लापरवाही वाले मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए एमएलसी केस फाइल भी बनाई जा सकती है।
बढ़ते केस, बिगड़ते आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पंचकूला में डॉग बाइट के मामले तेजी से बढ़े हैं। फिलहाल रोजाना औसतन 20 लोग कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। पिछले 5 महीनों में जिले में 7 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद अब तक मरीजों का रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा जा रहा था। मरीज के कार्ड पर सिर्फ डॉग बाइट लिखकर काम चला दिया जाता था। न घाव की गहराई दर्ज होती थी, न दांतों के निशान की संख्या। अब से हर मरीज के ओपीडी कार्ड पर केस हिस्ट्री लिखकर घाव की फोटो भी जरूर देनी होगी।
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टास्क फोर्स के बाद बदली व्यवस्था
प्रशासन द्वारा गठित टास्क फोर्स ने जिले में एंटी रैबीज मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी है। टास्क फोर्स का कहना था कि बिना सही आंकड़ों के वैक्सीन की मांग, उपलब्धता और मरीजों के फॉलोअप का सही आकलन नहीं हो पा रहा। इसी के बाद विभाग ने फैसला लिया कि अब हर मरीज का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाएगा। नए सिस्टम में मरीज को कहां काटा गया, घाव कितना गहरा है, कितने दांत के निशान हैं, अस्पताल में कौन सा टीका और दवा दी गई और किस डॉक्टर ने इलाज किया, ये सभी जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज होगी। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते काटने के बाद 0, 3, 7, 14 और 28 दिन का टीका पूरा करवाना जरूरी है। बीच में इलाज छोड़ने से रैबीज का खतरा बढ़ जाता है।
डाॅग बाइट के गंभीर मामलों के चार पीड़ितों को सत्यापन के अस्तपाल बुलाया गया था, जिनमें से तीन मरीजों के घावों की तस्वीरें देखकर सत्यापन किया गया है। इनमें पिछले सप्ताह डाॅग बाइट का शिकार हुई महिला शामिल है। यह रिपोर्ट पीएमओ के बाद सीएमओ और वहां से डीसी ऑफिस भेज दी जाएगी। डॉ. मंदीप, एमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग, पंचकूला
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गंभीर मामलों की होगी दोबारा जांच
मुआवजे की प्रक्रिया के तहत स्वास्थ्य विभाग ने गंभीर श्रेणी के 4 पीड़ितों को वेरिफिकेशन के लिए बुलाया। डॉक्टरों की टीम ने इनमें से 3 मरीजों के घावों की दोबारा जांच की। जांच में कुत्ता काटने पर आए घाव की तस्दीक घटना के बाद ली गई तस्वीर देखकर की गई। यह भी देखा गया कि मरीज को एंटीरेबीज का इलाज समय पर मिला या नहीं और प्रोटोकॉल के अनुसार टीके लगे या नहीं। वेरिफिकेशन रिपोर्ट अब प्रशासन की कमेटी को भेजी जाएगी। कमेटी ही तय करेगी कि किस मरीज को कितना मुआवजा मिले। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में गंभीर और लापरवाही वाले मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए एमएलसी केस फाइल भी बनाई जा सकती है।
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बढ़ते केस, बिगड़ते आंकड़े
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार पंचकूला में डॉग बाइट के मामले तेजी से बढ़े हैं। फिलहाल रोजाना औसतन 20 लोग कुत्ते के काटने के बाद अस्पताल पहुंच रहे हैं। पिछले 5 महीनों में जिले में 7 हजार से अधिक डॉग बाइट के मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या के बावजूद अब तक मरीजों का रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा जा रहा था। मरीज के कार्ड पर सिर्फ डॉग बाइट लिखकर काम चला दिया जाता था। न घाव की गहराई दर्ज होती थी, न दांतों के निशान की संख्या। अब से हर मरीज के ओपीडी कार्ड पर केस हिस्ट्री लिखकर घाव की फोटो भी जरूर देनी होगी।
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टास्क फोर्स के बाद बदली व्यवस्था
प्रशासन द्वारा गठित टास्क फोर्स ने जिले में एंटी रैबीज मामलों की विस्तृत जानकारी मांगी है। टास्क फोर्स का कहना था कि बिना सही आंकड़ों के वैक्सीन की मांग, उपलब्धता और मरीजों के फॉलोअप का सही आकलन नहीं हो पा रहा। इसी के बाद विभाग ने फैसला लिया कि अब हर मरीज का विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाएगा। नए सिस्टम में मरीज को कहां काटा गया, घाव कितना गहरा है, कितने दांत के निशान हैं, अस्पताल में कौन सा टीका और दवा दी गई और किस डॉक्टर ने इलाज किया, ये सभी जानकारी अनिवार्य रूप से दर्ज होगी। डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते काटने के बाद 0, 3, 7, 14 और 28 दिन का टीका पूरा करवाना जरूरी है। बीच में इलाज छोड़ने से रैबीज का खतरा बढ़ जाता है।
डाॅग बाइट के गंभीर मामलों के चार पीड़ितों को सत्यापन के अस्तपाल बुलाया गया था, जिनमें से तीन मरीजों के घावों की तस्वीरें देखकर सत्यापन किया गया है। इनमें पिछले सप्ताह डाॅग बाइट का शिकार हुई महिला शामिल है। यह रिपोर्ट पीएमओ के बाद सीएमओ और वहां से डीसी ऑफिस भेज दी जाएगी। डॉ. मंदीप, एमओ, जिला स्वास्थ्य विभाग, पंचकूला