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Panchkula News: बयान में बदलाव के बाद अदालत ने आरोपी को नियमित जमानत दी

Thu, 20 Nov 2025 12:18 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 20 Nov 2025 12:18 AM IST
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The court granted regular bail to the accused after he changed his statement.
फास्ट ट्रैक स्पेशल पाॅस्को कोर्ट ने कहा, ऐसे हालात में आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना तर्कसंगत नहीं
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। फास्ट ट्रैक स्पेशल पाॅस्को कोर्ट पंचकूला ने दुष्कर्म और पाॅस्को अधिनियम के गंभीर आरोपों में जेल में बंद सेक्टर-16 निवासी आरोपी को नियमित जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि पीड़िता ट्रायल के दौरान अपने पहले दिए बयान के विपरीत शत्रुतापूर्ण (होस्टाइल) बयान दे चुकी है और आरोपी लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है। इस हालात में उसे अनिश्चितकाल तक जेल में रखना तर्कसंगत नहीं है।
मामला महिला पुलिस थाना सेक्टर-5, पंचकूला में जुलाई 2025 को दर्ज शिकायत से संबंधित है। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि पिछले 3-4 वर्षों से आरोपी उस पर गलत नजर रखता था और धमकाकर कई बार दुष्कर्म करता रहा। गर्भवती होने पर पीड़िता ने अपनी बहन को यह बात बताई और बाद में उसकी शादी बहनोई से कर दी गई। मामले में पीड़िता का मेडिकल और साइकोलॉजिकल परीक्षण भी हुआ। आरोपी को 16 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
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पहली जमानत याचिका 29 अक्टूबर 2025 को खारिज कर दी गई थी। लेकिन 4 नवंबर 2025 को ट्रायल के दौरान जब पीड़िता अदालत में गवाही देने आई तो उसने अपने प्रारंभिक आरोपों से मुकरते हुए आरोपी का समर्थन किया। उसने अदालत को बताया कि उसने धारा 164 सीआरपीसी के तहत दिए गए बयान शत्रुतापूर्ण थे।
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बचाव पक्ष का तर्क- शत्रुतापूर्ण हो चुकी
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि जब पीड़िता का बयान शत्रुतापूर्ण है तो ट्रायल का शेष भाग केवल औपचारिकता है और आरोपी को आगे जेल में रखना न्यायोचित नहीं। वहीं सरकारी वकील ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और प्रारंभिक बयानों में पीड़िता ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाए थे। कौन-सा बयान सही है यह अंतिम निर्णय के समय तय होगा इसलिए आरोपी फरार हो सकता है।


आरोपी को राहत देने के पर्याप्त आधार
सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि मौजूदा परिस्थितियों में आरोपी को राहत देने के पर्याप्त आधार हैं। अदालत ने कहा कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकालीन हिरासत में रखना उचित नहीं। इसलिए जमानत याचिका स्वीकार करते हुए आरोपी को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानतदार के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया।
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