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‘अध्यापक नए सुझाव और विचारों से ऊंचा उठाएं शिक्षा व स्कूल का स्तर’
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पंचकूला। अध्यापक राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ विद्यार्थियों के भविष्य के निर्माण का काम भी करते हैं। अध्यापकों की ओर से पढ़ाए जा रहे बच्चे अलग-अलग क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर रहे हैं। हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने बुधवार को कहा कि यह विचार शिक्षा मंत्री ने बुधवार को पंचूकला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में आयोजित ‘प्रवेश उत्सव’ कार्यक्रम की मंडल स्तरीय कार्यशाला में प्रकट किए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पिछले साल सरकारी स्कूलों में करीब साढ़े चार लाख विद्यार्थियों के दाखिले हुए थे। हमारा प्रयास है कि इस वर्ष भी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या पिछले वर्ष से ज्यादा होगी। शिक्षा मंत्री ने अभिभावकों और स्कूल से जुड़े स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे निरंतर स्कूलों के संपर्क में रहें, जिससे नए-नए सुझाव और विचारों से शिक्षा और स्कूल का स्तर ऊंचा उठे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न स्कूलों के बच्चों की ओर से लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस मौके पर स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव महावीर सिंह और महानिदेशक जे.गणेशन सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
साथ ही शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने इस कार्यक्रम में शामिल हुए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, स्कूल प्रिंसिपल को निर्देश दिए कि निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में आए विद्यार्थियों से संवाद करें। उनसे सरकारी स्कूलों में आने की वजह का आम लोगों में ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें।
अध्यापक सुनिश्चित करें कि एमआईसी पोर्टल बेहतर तरीके से काम करे
शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि एमआईएस पोर्टल बेहतर तरीके से काम करें, इसे अध्यापकों की ओर से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस पोर्टल पर विद्यार्थियों से जुड़ा पूरा डाटा सही से फीड़ किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य में पुस्तकों और अन्य किसी चीज से जुड़ी कोई समस्या न आए।
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सरकारी स्कूलों में सुधार करने वालों से लें प्रेरणा
शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने कहा कि प्रदेश में जिन भी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है, हमें उन स्कूलों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने फतेहाबाद जिला की चार पंचायतों और झज्जर जिले की दो पंचायतों को सम्मानित भी किया। इन पंचायतों के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम रह गई थी। यहां की ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने सरकार के साथ मिलकर स्कूलों की व्यवस्था को ठीक किया और ग्रामीणों को सरकारी स्कूल में ही विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे इन ग्राम पंचायतों के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ। आज पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों को इनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
निजी छोड़कर सरकारी स्कूल में पहुंचे विद्यार्थियों ने रखे विचार
प्रवेश उत्सव के दौरान निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी विवेक और अंजली ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों की अपेक्षा फीस अधिक थी, किताबों पर ज्यादा खर्च होता था। इसके अलावा किसी भी वर्ष स्कूल की वर्दी बदल दी जाती थी। ऐसे में माता-पिता का हमारी पढ़ाई पर बड़ा खर्चा होता था। तभी निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है। आज सरकारी स्कूल में निजी से अच्छी पढ़ाई करवाई जा रही है और हमारे माता-पिता को पहले जितना खर्च भी वहन नहीं करना पड़ रहा है।
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साथ ही शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने इस कार्यक्रम में शामिल हुए जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी, स्कूल प्रिंसिपल को निर्देश दिए कि निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में आए विद्यार्थियों से संवाद करें। उनसे सरकारी स्कूलों में आने की वजह का आम लोगों में ज्यादा से ज्यादा प्रचार करें।
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अध्यापक सुनिश्चित करें कि एमआईसी पोर्टल बेहतर तरीके से काम करे
शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि एमआईएस पोर्टल बेहतर तरीके से काम करें, इसे अध्यापकों की ओर से सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इस पोर्टल पर विद्यार्थियों से जुड़ा पूरा डाटा सही से फीड़ किया जाना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों को भविष्य में पुस्तकों और अन्य किसी चीज से जुड़ी कोई समस्या न आए।
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सरकारी स्कूलों में सुधार करने वालों से लें प्रेरणा
शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने कहा कि प्रदेश में जिन भी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए कार्य किया जा रहा है, हमें उन स्कूलों से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने फतेहाबाद जिला की चार पंचायतों और झज्जर जिले की दो पंचायतों को सम्मानित भी किया। इन पंचायतों के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम रह गई थी। यहां की ग्राम पंचायत और ग्रामीणों ने सरकार के साथ मिलकर स्कूलों की व्यवस्था को ठीक किया और ग्रामीणों को सरकारी स्कूल में ही विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। इससे इन ग्राम पंचायतों के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा हुआ। आज पूरे प्रदेश के सरकारी स्कूलों को इनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
निजी छोड़कर सरकारी स्कूल में पहुंचे विद्यार्थियों ने रखे विचार
प्रवेश उत्सव के दौरान निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी विवेक और अंजली ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों में सरकारी स्कूलों की अपेक्षा फीस अधिक थी, किताबों पर ज्यादा खर्च होता था। इसके अलावा किसी भी वर्ष स्कूल की वर्दी बदल दी जाती थी। ऐसे में माता-पिता का हमारी पढ़ाई पर बड़ा खर्चा होता था। तभी निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है। आज सरकारी स्कूल में निजी से अच्छी पढ़ाई करवाई जा रही है और हमारे माता-पिता को पहले जितना खर्च भी वहन नहीं करना पड़ रहा है।