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Panchkula News: तरनतारन उपचुनाव में शिअद प्रत्याशी की बेटी की ब्लैंकेट बेल की मांग खारिज
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने तरनतारन उपचुनाव में शिअद प्रत्याशी सुखविंदर कौर की बेटी कंचनप्रीत कौर की वह याचिका खारिज कर दी है जिसमें उन्होंने राजनीतिक द्वेष के चलते संभावित फर्जी मुकदमों में फंसाए जाने की आशंका जताते हुए अग्रिम अथवा ब्लैंकेट बेल मांगी थी।
न्यायमूर्ति रुपिंदरजीत चाहल की एकल पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी से सात दिन पहले नोटिस देने का निर्देश देना भी अग्रिम जमानत के नाम पर ब्लैंकेट सुरक्षा देने जैसा होगा जो सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानून के विपरीत है। कंचनप्रीत कौर ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह उपचुनाव में अपनी मां की कवरिंग कैंडिडेट हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस उनकी मां के 11 नवंबर के उपचुनाव अभियान को प्रभावित करने के लिए उनके घर पर छापे मार रही है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने की आशंका है। पुलिस को किसी भी कार्रवाई से पहले 7 दिन का नोटिस देने का आदेश दिया जाए।
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राज्य के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम है जो मतदान से पहले मीडिया ध्यान और सहानुभूति पाने के लिए दायर की गई। सरकार ने तर्क दिया कि बिना किसी ठोस आरोप के ब्लैंकेट सुरक्षा देना जांच एजेंसी की वैधानिक शक्तियों में बाधा डालेगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। ब्लैंकेट प्रोटेक्शन देना सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत है। ब्लैंकेट बेल का आदेश पुलिस की जांच में गंभीर बाधा पैदा करता है।
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न्यायमूर्ति रुपिंदरजीत चाहल की एकल पीठ ने कहा कि गिरफ्तारी से सात दिन पहले नोटिस देने का निर्देश देना भी अग्रिम जमानत के नाम पर ब्लैंकेट सुरक्षा देने जैसा होगा जो सुप्रीम कोर्ट के स्थापित कानून के विपरीत है। कंचनप्रीत कौर ने हाईकोर्ट को बताया था कि वह उपचुनाव में अपनी मां की कवरिंग कैंडिडेट हैं।
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याचिका में आरोप लगाया गया था कि पुलिस उनकी मां के 11 नवंबर के उपचुनाव अभियान को प्रभावित करने के लिए उनके घर पर छापे मार रही है और उन्हें राजनीतिक रूप से निशाना बनाए जाने की आशंका है। पुलिस को किसी भी कार्रवाई से पहले 7 दिन का नोटिस देने का आदेश दिया जाए।
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राज्य के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम है जो मतदान से पहले मीडिया ध्यान और सहानुभूति पाने के लिए दायर की गई। सरकार ने तर्क दिया कि बिना किसी ठोस आरोप के ब्लैंकेट सुरक्षा देना जांच एजेंसी की वैधानिक शक्तियों में बाधा डालेगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आशंका के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती। ब्लैंकेट प्रोटेक्शन देना सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विपरीत है। ब्लैंकेट बेल का आदेश पुलिस की जांच में गंभीर बाधा पैदा करता है।