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पंजाब में बायोमास योजनाओं से हल होगी पराली की समस्या
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पंजाब सरकार के नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री डा. राजकुमार वेरका ने दावा किया कि पंजाब में अब बायोमास प्रोजेक्टों के जरिये पराली की समस्या को हल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के 1700.77 मेगावाट की क्षमता के प्रोजेक्ट लगाए जा चुके हैं। 184.12 मेगावाट क्षमता की अन्य योजनाओं को लगाया जा रहा है।
डॉ. वेरका ने कहा कि बिजली की लगातार बढ़ रही मांग और पराली की समस्या से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने सौर ऊर्जा पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के 1700.77 मेगावाट की क्षमता के प्रोजेक्ट लगाए जा चुके हैं और 184.12 मेगावाट क्षमता के अन्य प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं। अब तक 815.5 मेगावाट क्षमता के ग्राउंड माउंटेड 136.1 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप और 20 मेगावाट क्षमता के कैनाल टॉप सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट कार्यशील हो चुके हैं। इनकी संख्या क्रमवार 71, 14 और 4 है।
डॉ. वेरका के अनुसार अकेले सौर ऊर्जा के 729.17 मेगावाट के प्रोजेक्ट स्थापित हो चुके हैं और 58.75 मेगावाट के प्रोजेक्ट प्रगति में हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के प्रोजेक्टों में बायोमास को-जनरेशन पावर प्रोजेक्ट 458.07 मेगावाट और बायोमास पावर प्रोजेक्ट 97.5 मेगावाट शामिल हैं। 23 बायो सीएनजी प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं। इनसे कुल 260 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) पैदा होगी। इनमें एशिया का सबसे बड़ा सीबीजी प्रोजेक्ट भी शामिल है, जिसकी क्षमता 33.23 टन सीबीजी प्रतिदिन है। यह प्रोजेक्ट लहरागागा तहसील में लगाया जा रहा है और दिसंबर, 2021 में चालू हो जाएगा।
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इसके अलावा एचपीसीएल तेल कंपनी की ओर से बायो इथनोल प्रोजेक्ट बठिंडा के तलवंडी साबो में निर्माणाधीन है जो कि फरवरी, 2023 तक शुरू हो जाएगा और इसमें रोजाना 500 टन पराली की खपत होगी। राज्य के लोगों को भी सौर ऊर्जा अपनाने की अपील करते हुए डॉ. वेरका ने उनको घरों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को महंगी बिजली से राहत मिलेगी, वहीं कोयले जैसे स्रोत की भी बचत हो सकेगी।
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डॉ. वेरका ने कहा कि बिजली की लगातार बढ़ रही मांग और पराली की समस्या से निपटने के लिए पंजाब सरकार ने सौर ऊर्जा पर अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करने की दिशा में कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि अब तक राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के 1700.77 मेगावाट की क्षमता के प्रोजेक्ट लगाए जा चुके हैं और 184.12 मेगावाट क्षमता के अन्य प्रोजेक्ट लगाए जा रहे हैं। अब तक 815.5 मेगावाट क्षमता के ग्राउंड माउंटेड 136.1 मेगावाट क्षमता के रूफटॉप और 20 मेगावाट क्षमता के कैनाल टॉप सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट कार्यशील हो चुके हैं। इनकी संख्या क्रमवार 71, 14 और 4 है।
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डॉ. वेरका के अनुसार अकेले सौर ऊर्जा के 729.17 मेगावाट के प्रोजेक्ट स्थापित हो चुके हैं और 58.75 मेगावाट के प्रोजेक्ट प्रगति में हैं। नवीकरणीय ऊर्जा के प्रोजेक्टों में बायोमास को-जनरेशन पावर प्रोजेक्ट 458.07 मेगावाट और बायोमास पावर प्रोजेक्ट 97.5 मेगावाट शामिल हैं। 23 बायो सीएनजी प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं। इनसे कुल 260 टन कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) पैदा होगी। इनमें एशिया का सबसे बड़ा सीबीजी प्रोजेक्ट भी शामिल है, जिसकी क्षमता 33.23 टन सीबीजी प्रतिदिन है। यह प्रोजेक्ट लहरागागा तहसील में लगाया जा रहा है और दिसंबर, 2021 में चालू हो जाएगा।
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इसके अलावा एचपीसीएल तेल कंपनी की ओर से बायो इथनोल प्रोजेक्ट बठिंडा के तलवंडी साबो में निर्माणाधीन है जो कि फरवरी, 2023 तक शुरू हो जाएगा और इसमें रोजाना 500 टन पराली की खपत होगी। राज्य के लोगों को भी सौर ऊर्जा अपनाने की अपील करते हुए डॉ. वेरका ने उनको घरों में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को महंगी बिजली से राहत मिलेगी, वहीं कोयले जैसे स्रोत की भी बचत हो सकेगी।