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शिक्षा के लिए संघर्ष : रायतन क्षेत्र की पथरीली डगर पर रोजाना ये बच्चे करते हैं 14 किलोमीटर का सफर

Mon, 28 Mar 2022 02:00 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 28 Mar 2022 02:00 AM IST
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Struggle for education: These children travel 14 km daily on the rocky road of Raitan region
पंचकूला। काश! कि उनके पास साइकिलें होतीं, या घर से स्कूल पहुंचने के लिए रोडवेज की बस मिलती। अन्य गांवों के बच्चों की तरह उनको भी मोबाइल कर नेटवर्क मिल पाता। इन समस्याओं का समाधान होते ही जहां उनका समय बचता, वहीं अन्य परेशानियों से भी छुटकारा मिलता। यह व्यथा जिला मुख्यालय से 25 से 30 किलोमीटर दूर पहाड़ की तलहटी में बसे गवाही, धामसू, टिब्बी सहित कई गांवों के बच्चों की है। संसाधनों की कमी के चलते यहां के बच्चे धूप में तपने, सर्दी में ठिठुरने और बारिश में भीगने को मजबूर हैं। स्कूली शिक्षा के लिए रोजाना दस से 14 किलोमीटर चलाना यहां के बच्चों की आदत बन गई है।
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एक शिक्षक के भरोसे कई प्राइमरी स्कूल
कालका विधानसभा क्षेत्र के नग्गल भागा, कंडियाला, टगरा कलीराम और ओरिया के राजकीय प्राथमिक पाठशालाएं एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रही हैं। यहां हर स्कूल में एक-एक शिक्षक की तैनाती की गई है। सबसे बुरा हाल नग्गल भागा के प्राथमिक पाठशाला का है। यहां के स्कूल में पहली से पांचवीं कक्षा तक के 70 विद्यार्थियों की जिम्मेदारी एक गेस्ट टीचर पर है। प्रश्न उठता है कि शिक्षकों की तबीयत खराब होने पर पढ़ाई कैसे चलती होगी।
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गांव में मोबाइल नेटवर्क का टोटा
गवाही गांव की रेनू, पूजा और महक का कहना है कि डिजिटल इंडिया के बावजूद पिंजौर के पहाड़ी क्षेत्र में बसे गवाही, टिब्बी, धामसू सहित कई गांव ऐसे हैं, जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं आता है। इंटरनेट की दुनिया में थ्री-जी और फोर-जी की सुविधा से भी कई गांव अभी दूर हैं। इससे ऑनलाइन पठन-पाठन के साथ ही अन्य गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। पहाड़ की चोटी पर लोग मोबाइल हाथ में लेकर सिग्नल की तलाश में निकल पड़ते हैं। भाग्य से यदि सिग्नल मिल गया तो स्वजनों से बात हो जाती है। उस दिन खुशी भी मनाते हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों में भी मोबाइल टावर लगाया जाना चाहिए।
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धामसू से मल्ला के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षा हासिल करने के लिए रोजाना करीब 14 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। हमारे गांव से स्कूल तक जाने के लिए कोई साधन नहीं है। मजबूरन हम लोगों को पैदल आना पड़ता है। - चंपक, छात्र कक्षा-10
रोडवेज की बस भी गवाही, टिब्बी और धामसू तक नहीं जाती है। हम लोगों को पैदल ही मल्ला के सरकारी स्कूल तक पढ़ाई के लिए आना और जाना पड़ता है। सबसे बुरा हाल गर्मी में हो जाता है। स्कूल से दोपहर में घर लौटते समय प्यास से गला सूखने लगता है, रास्ते में कहीं छांव भी नहीं मिलती की हमलोग आराम कर सकें। - काजल, छात्रा कक्षा-12
रोडवेज की बस नहीं मिल सकती तो साइकिल ही मिल जाए। इससे जहां समय की बचत होगी, वहीं परेशानी से निजात मिलेगी। शिक्षा का फासला भी कम हो जाएगा। वर्तमान में स्कूल से लौटने के बाद थकान इतनी हो जाती है कि होमवर्क पूरा कर पाते हैं। - महक, छात्रा कक्षा-10
गवाही और धामसू एरिया में बस चलाने के लिए सोमवार को रोडवेज के जीएम से बात करूंगा। रहा सवाल इन ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क का तो इस संबंध में कई बार जिला उपायुक्त से मिल चुका हूं, लेकिन अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया है। वहीं स्कूलों में शिक्षकों की कमी के संबंध में डीईईओ से बात करूंगा। - प्रदीप चौधरी, विधायक कालका।

अभी तक हमारे पास इन गांवों से डिमांड नहीं आई है। अगर लोग मांग करते हैं तो उस पर सकारात्मक विचार किया जाएगा। कोशिश यह रहेगी कि लोगों को बेहतर से बेहतर परिवहन सुविधाएं मुहैया करवाई जाए। रविंदर पी पाठक, जीएम पंचकूला डिपो, हरियाणा रोडवेज।
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