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स्टिल्ट+4 : सरकार बिल्डरों के हाथों में खेल रही
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। स्टिल्ट+4 भवनों का निर्माण लंबे समय से संघर्ष कर रहे लोगों के खिलाफ है। हरियाणा सरकार ने 29 मई 2024 को आंशिक निर्णय जारी किया और कुछ अन्य शर्तों के साथ बिना अनुमति के चौथी मंजिल के भवनों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया था। 3 जुलाई 2024 को 23 फरवरी 2023 को लगाए प्रतिबंध को हटाने का निर्णय इस शर्त के साथ लिया गया कि पड़ोसियों की लिखित सहमति होनी चाहिए। अन्यथा 1.8 मीटर हिस्सा छोड़कर एस+4 भवन का निर्माण किया जा सकता है। शनिवार को नागरिक कल्याण संघ ने इस मामले को लेकर शहर के एक होटल में बैठक कर विरोध जताया। विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों का कहना था कि सरकार भविष्य के बड़े सार्वजनिक हितों से बचते हुए अपने हितों के लिए बिल्डरों के हाथों में खेल रही है। अब यह नीति अजीब और बेतुकी है। सदस्यों से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आग्रह किया कि यह नीति एचएसवीपी के नए क्षेत्रों में लागू की जानी चाहिए।
संघ के अध्यक्ष एसके नैय्यर ने कहा कि लोग लंबे समय से सूर्य की रोशनी, हवा से वंचित हैं। पंचकूला मास्टर-प्लान और इसके ज़ोनिंग-सिस्टम को सेक्टर वार बनाए रखने पर विचार करना चाहिए। इसके अलावा मौजूदा सीवरेज-सिस्टम, जल निकासी व्यवस्था, पानी की आपूर्ति प्रणाली, पार्किंग-व्यवस्था, बिजली ओवरलोडिंग/ब्रेकडाउन, अग्नि-सुरक्षा-प्रणाली, अनुमानित जनसंख्या स्तर से वंचित हैं। इसे मौजूदा बुनियादी ढांचा पूरा नहीं कर सकता है, लेकिन इसे अभी ठीक नहीं किया जा सकता/बढ़ाया नहीं जा सकता। एसके नैय्यर ने बताया कि आम जनता की सुविधा और लाभ के लिए प्रावधान किया गया है, लेकिन जनता को तदनुसार परिणाम भुगतने होंगे। वास्तव में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को शून्य और शून्य माना गया है, बल्कि रिपोर्ट को जनता के लिए आंखों में धूल झोंकने के रूप में बदल दिया गया है।
इस अवसर पर सिटीजंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एसके नैय्यर, महासचिव सुनील जैन, उप-प्रधान राकेश सोंधी, आरडब्ल्यूए सेक्टर-15 के प्रधान सुनील वशिष्ठ, सेक्टर-17 के प्रधान डीपी सोनी, सेक्टर-21 प्रधान डाॅ. एमएस कांबोज, जेएल नंदा, एचएम कपूर, शीशम बाला व अन्य उपस्थित रहे।
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पंचकूला। स्टिल्ट+4 भवनों का निर्माण लंबे समय से संघर्ष कर रहे लोगों के खिलाफ है। हरियाणा सरकार ने 29 मई 2024 को आंशिक निर्णय जारी किया और कुछ अन्य शर्तों के साथ बिना अनुमति के चौथी मंजिल के भवनों के निर्माण पर प्रतिबंध लगा दिया था। 3 जुलाई 2024 को 23 फरवरी 2023 को लगाए प्रतिबंध को हटाने का निर्णय इस शर्त के साथ लिया गया कि पड़ोसियों की लिखित सहमति होनी चाहिए। अन्यथा 1.8 मीटर हिस्सा छोड़कर एस+4 भवन का निर्माण किया जा सकता है। शनिवार को नागरिक कल्याण संघ ने इस मामले को लेकर शहर के एक होटल में बैठक कर विरोध जताया। विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों का कहना था कि सरकार भविष्य के बड़े सार्वजनिक हितों से बचते हुए अपने हितों के लिए बिल्डरों के हाथों में खेल रही है। अब यह नीति अजीब और बेतुकी है। सदस्यों से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आग्रह किया कि यह नीति एचएसवीपी के नए क्षेत्रों में लागू की जानी चाहिए।
संघ के अध्यक्ष एसके नैय्यर ने कहा कि लोग लंबे समय से सूर्य की रोशनी, हवा से वंचित हैं। पंचकूला मास्टर-प्लान और इसके ज़ोनिंग-सिस्टम को सेक्टर वार बनाए रखने पर विचार करना चाहिए। इसके अलावा मौजूदा सीवरेज-सिस्टम, जल निकासी व्यवस्था, पानी की आपूर्ति प्रणाली, पार्किंग-व्यवस्था, बिजली ओवरलोडिंग/ब्रेकडाउन, अग्नि-सुरक्षा-प्रणाली, अनुमानित जनसंख्या स्तर से वंचित हैं। इसे मौजूदा बुनियादी ढांचा पूरा नहीं कर सकता है, लेकिन इसे अभी ठीक नहीं किया जा सकता/बढ़ाया नहीं जा सकता। एसके नैय्यर ने बताया कि आम जनता की सुविधा और लाभ के लिए प्रावधान किया गया है, लेकिन जनता को तदनुसार परिणाम भुगतने होंगे। वास्तव में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को शून्य और शून्य माना गया है, बल्कि रिपोर्ट को जनता के लिए आंखों में धूल झोंकने के रूप में बदल दिया गया है।
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इस अवसर पर सिटीजंस वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान एसके नैय्यर, महासचिव सुनील जैन, उप-प्रधान राकेश सोंधी, आरडब्ल्यूए सेक्टर-15 के प्रधान सुनील वशिष्ठ, सेक्टर-17 के प्रधान डीपी सोनी, सेक्टर-21 प्रधान डाॅ. एमएस कांबोज, जेएल नंदा, एचएम कपूर, शीशम बाला व अन्य उपस्थित रहे।
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