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26 दिन में कपास, मूंग को हुए नुकसान की होगी विशेष गिरदावरी
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार 5 से 30 सितंबर तक भारी बारिश और जलभराव से खराब हुई कपास और मूंग की फसल की विशेष गिरदावरी कराएगी। वित्तायुक्त संजीव कौशल ने वीरवार को इसके आदेश जारी किए। गिरदावरी की सौ फीसदी प्रविष्टियों की निगरानी सर्किल राजस्व अधिकारी करेंगे। सभी मंडल आयुक्तों और डीसी को भेजे पत्र में कहा गया है कि मूंग को पहुंचे नुकसान की गिरदावरी सभी 22 जिलों में होगी, जबकि कपास की फसल की विशेष गिरदावरी पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र व यमुनानगर जिलों केा छोड़कर अन्य 18 जिलों में की जाएगी। खराब फसल की रिपोर्ट मंडलायुक्तों को डीसी निर्धारित प्रपत्र में भेजेंगे। प्रपत्र में बताना होगा कि 25 से 33 फीसदी, 33 से 50 फीसदी, 50 से 75 फीसदी के बीच कितना नुकसान है और 75 फीसदी से अधिक नुकसान कहां-कहां पहुंचा है। कपास और मूंग की फसल की बुआई कुल कितने क्षेत्र में की गई थी, सिंचित और असिंचित क्षेत्र कितना है। कुल कितने एकड़ में फसल खराब हुई और कितना मुआवजा बनता है।
एसडीओ (नागरिक) खराबा संबंधित गिरदावरी प्रविष्टियों की 25 प्रतिशत, डीसी 10 प्रतिशत और मंडलायुक्त 2 प्रतिशत निगरानी सुनिश्चित करेंगे। गिरदावरी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना या अन्य किसी बीमा योजना के दायरे में आने वाले क्षेत्र को शामिल नहीं किया जाएगा। न ही उन्हें सरकार मुआवजा देगी। उन्हें बीमा कंपनी की तरफ से मुआवजा मिलेगा। जिन किसानों को गिरदावरी के आधार पर मुआवजा दिया जाना है, उनका पूरा राजस्व रिकार्ड खसरा नंबर सहित हेलरिस व वेब हेलरिस पर अपलोड किया जाएगा। गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने पर कृषि विकास अधिकारी व उपनिदेशक को भेजी जाएगी। वे फसल बीमा योजना में शामिल किसानों के नाम के साथ रिपोर्ट में मौजूद लोगों के नाम का मिलान करेंगे। इसके बाद सही सूची को दोबारा हेलरिस व वेब हेलरिस पर अपलोड किया जाएगा। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले कृषि अधिकारी मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज प्रविष्टियों के साथ भी मिलाएंगे।
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एसडीओ (नागरिक) खराबा संबंधित गिरदावरी प्रविष्टियों की 25 प्रतिशत, डीसी 10 प्रतिशत और मंडलायुक्त 2 प्रतिशत निगरानी सुनिश्चित करेंगे। गिरदावरी रिपोर्ट में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना या अन्य किसी बीमा योजना के दायरे में आने वाले क्षेत्र को शामिल नहीं किया जाएगा। न ही उन्हें सरकार मुआवजा देगी। उन्हें बीमा कंपनी की तरफ से मुआवजा मिलेगा। जिन किसानों को गिरदावरी के आधार पर मुआवजा दिया जाना है, उनका पूरा राजस्व रिकार्ड खसरा नंबर सहित हेलरिस व वेब हेलरिस पर अपलोड किया जाएगा। गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने पर कृषि विकास अधिकारी व उपनिदेशक को भेजी जाएगी। वे फसल बीमा योजना में शामिल किसानों के नाम के साथ रिपोर्ट में मौजूद लोगों के नाम का मिलान करेंगे। इसके बाद सही सूची को दोबारा हेलरिस व वेब हेलरिस पर अपलोड किया जाएगा। रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले कृषि अधिकारी मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज प्रविष्टियों के साथ भी मिलाएंगे।
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