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विशेष बच्चों के सपनों को छीन रहा स्कूल
दीपक शाही, पंचकूला
Updated Thu, 26 Sep 2013 02:12 AM IST
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भगवान ने पहले ही असहाय बना दिया। हौसलों के दम पर शिक्षित होकर जिंदगी में कुछ करने की उम्मीद है, लेकिन स्कूल की छोटी सी लापरवाही उनपर भारी पड़ रही है।
सेक्टर 20 के संस्कृति मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने के लिए दो महीने से स्कूल बस नहीं आ रही है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बस नहीं आने के कारण कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। शहर के विभिन्न सेक्टरों से लेकर चंडीगढ़ तक के यह बच्चे स्कूल में पढ़ाई के लिए आते है।
स्कूल की शिक्षिकाओं ने नाम नहीं छापने के सर्त पर बताया की दो महीने से स्कूल की आधी क्लास खाली रहती है। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन बस का टेंडर खत्म हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि इसके लिए दो बार मीटिंग हो चुकी है, पर अबतक कुछ नहीं किया गया।
बस बनी अभिभावकों की परेशानी
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल बस नहीं होने से बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। कई अभिभावकों ने बताया कि सुबह स्कूल छोड़ जाते है, लेकिन दोपहर दो बजे जब छुट्टी होती है उस वक्त हम लोग दफ्तर में होते हैं। ऐसे में एक दो दिन की बात हो तो चल जाता है।
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स्कूल प्रबंधन के इस मीटिंग हो चुकी है। जब कोई व्यवस्था नहीं किया गया तो हार कर बच्चों को घर पर बैठाना पड़ रहा है।
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सेक्टर 20 के संस्कृति मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूल से लाने ले जाने के लिए दो महीने से स्कूल बस नहीं आ रही है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बस नहीं आने के कारण कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। शहर के विभिन्न सेक्टरों से लेकर चंडीगढ़ तक के यह बच्चे स्कूल में पढ़ाई के लिए आते है।
स्कूल की शिक्षिकाओं ने नाम नहीं छापने के सर्त पर बताया की दो महीने से स्कूल की आधी क्लास खाली रहती है। इस संबंध में स्कूल प्रबंधन बस का टेंडर खत्म हो गया है। अभिभावकों का कहना है कि इसके लिए दो बार मीटिंग हो चुकी है, पर अबतक कुछ नहीं किया गया।
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बस बनी अभिभावकों की परेशानी
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल बस नहीं होने से बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। कई अभिभावकों ने बताया कि सुबह स्कूल छोड़ जाते है, लेकिन दोपहर दो बजे जब छुट्टी होती है उस वक्त हम लोग दफ्तर में होते हैं। ऐसे में एक दो दिन की बात हो तो चल जाता है।
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स्कूल प्रबंधन के इस मीटिंग हो चुकी है। जब कोई व्यवस्था नहीं किया गया तो हार कर बच्चों को घर पर बैठाना पड़ रहा है।