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Panchkula News: पति के शहीद होने के बाद आईटीबीपी ज्वाइन किया, परिवार के सपोर्ट से हो पाया है आसान

Sun, 29 Sep 2024 03:18 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Sep 2024 03:18 AM IST
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Soldiers are not widows... they are brave women, they will protect the country
माई सिटी रिपोर्टर
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पंचकूला। मनीषा महरा ने शनिवार को शपथ ली कि हर हाल में देश की रक्षा करेंगी। आप इसे एक सामान्य शपथ मान सकते हैं लेकिन त्याग, बलिदान और देश के लिए अपना सबकुछ समर्पित कर देने का जो हाैसला मनीषा के पास है, वह सामान्य नहीं है। अब वह एक सैनिक की विधवा नहीं बल्कि हिम वीरांगना हैं।



भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) में तैनात मनीषा के पति संतोष सिंह महरा जनवरी 2023 में देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए थे। पति की शहादत से मनीषा के कई सपने बिखर गए लेकिन हाैसला नहीं टूटा। उन्होंने पति के देशसेवा के संकल्प को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने भी आईटीबीपी को चुना। शनिवार को हुए दीक्षांत समारोह के बाद आईटीबीपी उत्तराखंड में कांस्टेबल मनीषा महरा ने कहा कि पति के शहीद होने के बाद सास देवकी और ससुर गंगा सिंह ने उनका उत्साह बढ़ाया। उनके तीन साल के बेटे की परवरिश की जिम्मेदारी संभाली।
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इससे उन्हें आईटीबीपी में शामिल होने के हाैसले को बड़ा बल मिला। मनीषा ने कहा कि आज बेटियां बेटों से कम नहीं हैं। वह भी सीमा पर देश की रक्षा कर सकती हैं। जरूरत बस उन्हें सपोर्ट करने की है। मनीषा ने बताया कि आईटीबीपी में 44 सप्ताह के प्रशिक्षण से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है। प्रशिक्षण के दौरान मैंने हर गतिविधि में उत्साह के साथ हिस्सा लिया और प्रतियोगिताओं में ओवरऑल पहला स्थान प्राप्त किया। आज मेरे लिए बहुत खुशी का दिन है।
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शहीद पति की वर्दी व मेडल देख मिलती है देशसेवा की प्रेरणा

आईटीबीपी की कांस्टेबल अंजू के पति सुरेंद्र सिंह वर्ष 2021 में शहीद हो गए थे। पति की शहादत के बाद उन्होंने भी देशसेवा का संकल्प लिया। इसमें सास विमला देवी और ससुर रामनिवास ने साथ दिया। आईटीबीपी में भर्ती होकर उन्होंने भी 44 सप्ताह आईटीबीपी भानू में प्रशिक्षण लिया। अंजू ने बताया कि प्रशिक्षण के शुरुआती दिनों में समस्या आई लेकिन बाद में फिटनेस ठीक होने के बाद सब सामान्य हो गया। अब देश की सेवा और रक्षा करनी है। अंजू ने बताया कि उन्होंने शहीद पति सुरेंद्र सिंह की वर्दी व मेडल अपने पास रखा है, जिन्हें देखकर उन्हें शक्ति व देशसेवा की प्रेरणा मिलती है।



बेटियों को सेना में जरूर भेजें

अभिभावकों से कहना चाहती हूं कि बेटियों को बेटों से कम न आंके, सेना में जरूर भेजें। प्रशिक्षण के बाद आत्मविश्वास बढ़ा। परिवार ने सपोर्ट किया। उन्हीं के कारण मैं सेना में आ पाई। -साहिदा, कांस्टेबल, जम्मू कश्मीर



ड्रिल में पहला स्थान, देशसेवा ही लक्ष्य

आज लड़कियां हर क्षेत्र में काम कर रही हैं। सेना में भी भागीदारी बढ़ रही है। मैंने ड्रिल में पहला स्थान हासिल किया है। प्रशिक्षण के दौरान सभी चीजें दिल लगाकर सीखीं, इससे आत्मविश्वास काफी बढ़ा। अब देश की सेवा करनी है। -टीना सांगवान, कांस्टेबल, हरियाणा




अनुशासन को जीवन भर बनाए रखेंगे

मैंने प्रशिक्षण में सबसे बड़ी चीज अनुशासन सीखी है। इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को अच्छा बना सकता है। 44 सप्ताह के प्रशिक्षण में हमने सभी चीजें सीखी हैं। अनुशासन को मैं जीवन भर बनाकर रखूंगी। -पनोत जिग्नेशा, कांस्टेबल, गुजरात
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