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दुष्कर्म मामले में दो माह में जांच पूरी करे एसआईटी: हाईकोर्ट
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चंडीगढ़। पंजाब पुलिस के बठिंडा में एएसआई द्वारा युवक पर झूठा मुकदमा दर्ज करने और उसे छोड़ने की एवज में मां से दुष्कर्म के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने नए सिरे से गठित एसआईटी को दो माह में जांच पूरी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ित महिला की सुरक्षा में महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती तथा उसे महिला पुलिस अधिकारी का नंबर उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है। आवश्यकता पड़ने पर पीड़ित महिला अधिकारी को फोन कर सकेगी।
याचिका दाखिल करते हुए पीड़िता ने हाईकोर्ट को बताया कि आरोपी एएसआई गुरविंदर सिंह याचिकाकर्ता से संबंध बनाना चाहता था। जब याचिकाकर्ता ने इससे इंकार कर दिया तो उसके 20 साल के बेटे पर नशे की तस्करी का आरोप लगाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे छोड़ने की एवज में याची से संबंध बनाने की बात कही तथा 2 लाख रुपये की मांग की। याची ने एक लाख रुपये दे दिए। इसके बावजूद आरोपी ने याची से दुष्कर्म किया। इस मामले में परेशान होकर याची ने गांव वालों को इस बारे में जानकारी दी जिन्होंने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा और वीडियो भी बनाया। उच्च अधिकारियों ने शिकायत मिलने के बाद आरोपी को बर्खास्त कर दिया तथा उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला भी दर्ज किया।
पहली एसआईटी में नहीं थी कोई महिला
हाईकोर्ट ने तथ्यों को देखने के बाद कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है जिसे पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया और एसआईटी में कोई महिला शामिल नहीं की गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने नए सिरे से एसआईटी का गठन करने का आदेश दिया था जिसे महिला से दुष्कर्म के साथ ही उसके बेटे पर दर्ज नशे की तस्करी के मामले की जिम्मेदारी भी सौंप दी थी।
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आदेश से टिप्पणी हटाई
अब सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से अपील की कि पुलिस को लेकर जो टिप्पणी की गई है उसे हटाया जाए। पंजाब ने कहा कि पूर्व की एसआईटी जिसमें महिला अधिकारी के शामिल ना होने की बात कही गई थी वह महिला से दुष्कर्म की नहीं बल्कि उसके बेटे पर दर्ज एनडीपीएस मामले की जांच कर रही थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश से टिप्पणी तो हटा दी लेकिन पंजाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आदेश में यह टिप्पणी दर्ज करवाई जा रही थी तो सरकार ने इसका विरोध क्यों नहीं किया।
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याचिका दाखिल करते हुए पीड़िता ने हाईकोर्ट को बताया कि आरोपी एएसआई गुरविंदर सिंह याचिकाकर्ता से संबंध बनाना चाहता था। जब याचिकाकर्ता ने इससे इंकार कर दिया तो उसके 20 साल के बेटे पर नशे की तस्करी का आरोप लगाते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसे छोड़ने की एवज में याची से संबंध बनाने की बात कही तथा 2 लाख रुपये की मांग की। याची ने एक लाख रुपये दे दिए। इसके बावजूद आरोपी ने याची से दुष्कर्म किया। इस मामले में परेशान होकर याची ने गांव वालों को इस बारे में जानकारी दी जिन्होंने आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा और वीडियो भी बनाया। उच्च अधिकारियों ने शिकायत मिलने के बाद आरोपी को बर्खास्त कर दिया तथा उसके खिलाफ दुष्कर्म का मामला भी दर्ज किया।
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पहली एसआईटी में नहीं थी कोई महिला
हाईकोर्ट ने तथ्यों को देखने के बाद कहा कि यह मामला बेहद संवेदनशील है जिसे पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया और एसआईटी में कोई महिला शामिल नहीं की गई। इसके बाद हाईकोर्ट ने नए सिरे से एसआईटी का गठन करने का आदेश दिया था जिसे महिला से दुष्कर्म के साथ ही उसके बेटे पर दर्ज नशे की तस्करी के मामले की जिम्मेदारी भी सौंप दी थी।
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आदेश से टिप्पणी हटाई
अब सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से अपील की कि पुलिस को लेकर जो टिप्पणी की गई है उसे हटाया जाए। पंजाब ने कहा कि पूर्व की एसआईटी जिसमें महिला अधिकारी के शामिल ना होने की बात कही गई थी वह महिला से दुष्कर्म की नहीं बल्कि उसके बेटे पर दर्ज एनडीपीएस मामले की जांच कर रही थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश से टिप्पणी तो हटा दी लेकिन पंजाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आदेश में यह टिप्पणी दर्ज करवाई जा रही थी तो सरकार ने इसका विरोध क्यों नहीं किया।