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Panchkula News: भ्रष्टाचार मामले में आईपीएस आशीष कपूर को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आईपीएस अधिकारी आशीष कपूर को बड़ा झटका देते हुए एएसआई हरजिंदर सिंह को क्षमादान व सरकारी गवाह के रूप में शामिल कर बयान दर्ज करवाने के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज कर दी है। इसके साथ ही भ्रष्टाचार के इस मामले में ट्रायल कोर्ट के अंतिम फैसला सुनाने पर लगाई गई रोक भी हटा दी है।
याचिका दाखिल करते हुए आशीष कपूर ने हाईकोर्ट को बताया था कि 1 करोड़ रुपये की रिश्वत को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में उनके खिलाफ मामला मोहाली की विशेष अदालत में विचाराधीन है। अक्तूबर 2022 को मोहाली में विजिलेंस ने यह एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में सह आरोपी एएसआई हरजिंदर सिंह को अदालत ने क्षमादान दे दिया और वह गवाह बन गया। विशेष अदालत ने उसके गवाह के तौर पर बयान दर्ज करवाने का आदेश दिया था।
याची ने कहा कि यह आदेश सही नहीं है और इसे रद्द करना चाहिए। इसके साथ ही यह दलील भी दी कि जो जज क्षमादान देकर किसी को गवाह बनाने की अनुमति देता है वह उस मामले को आगे नहीं सुन सकता। ऐसे में किसी अन्य जज के समक्ष उनका ट्रायल पूरा हो। पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विशेष अदालत एक जिले में एक ही होती है और ऐसे में यदि याची की मांग मानी जाती है तो ट्रायल किसी अन्य जिले में संपन्न करवाना होगा। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में अंतिम आदेश जारी करने पर लगाई गई रोक भी हटा दी है।
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याचिका दाखिल करते हुए आशीष कपूर ने हाईकोर्ट को बताया था कि 1 करोड़ रुपये की रिश्वत को लेकर भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में उनके खिलाफ मामला मोहाली की विशेष अदालत में विचाराधीन है। अक्तूबर 2022 को मोहाली में विजिलेंस ने यह एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में सह आरोपी एएसआई हरजिंदर सिंह को अदालत ने क्षमादान दे दिया और वह गवाह बन गया। विशेष अदालत ने उसके गवाह के तौर पर बयान दर्ज करवाने का आदेश दिया था।
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याची ने कहा कि यह आदेश सही नहीं है और इसे रद्द करना चाहिए। इसके साथ ही यह दलील भी दी कि जो जज क्षमादान देकर किसी को गवाह बनाने की अनुमति देता है वह उस मामले को आगे नहीं सुन सकता। ऐसे में किसी अन्य जज के समक्ष उनका ट्रायल पूरा हो। पंजाब सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि विशेष अदालत एक जिले में एक ही होती है और ऐसे में यदि याची की मांग मानी जाती है तो ट्रायल किसी अन्य जिले में संपन्न करवाना होगा। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने इस मामले में अंतिम आदेश जारी करने पर लगाई गई रोक भी हटा दी है।
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