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Panchkula News: स्वयं सहायता समूह से बदली तकदीर, महिलाएं खुद गढ़ रहीं सफलता की इबारत
Wed, 28 Jan 2026 02:03 AM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Updated Wed, 28 Jan 2026 02:03 AM IST
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सेनेटरी नैपकिन व मसाला यूनिट से हर माह 30 हजार की कमाई
मोरनी की मधुबाला बनीं लखपति दीदी
चरन सिंह टिब्बी
पंचकूला। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। पंचकूला जिले के मोरनी ब्लॉक के गांव भोज जब्याल की मधुबाला दीदी इसकी जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने मेहनत, हौसले और योजनाओं के सही उपयोग से ‘लखपति दीदी’ का मुकाम हासिल किया है।
वर्ष 2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले मधुबाला एक निजी स्कूल में अध्यापिका थीं, जबकि उनके पति छोटी सी स्टेशनरी की दुकान चलाते थे। सीमित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पहले दो लाख रुपये का ऋण लेकर पति के व्यवसाय को बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
इसके बाद मधुबाला ने खुद आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने पीएमईजीपी योजना के तहत 8.50 लाख रुपये का ऋण लेकर सेनेटरी नैपकिन निर्माण की मशीन खरीदी। आज वह हर महीने करीब एक हजार पैकेट सेनेटरी नैपकिन की बिक्री कर खर्च और ऋण की किस्त चुकाने के बाद लगभग 30 हजार रुपये की शुद्ध कमाई कर रही हैं। इस कार्य से समूह की तीन अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
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इतना ही नहीं, मधुबाला ने पीएमएफएमई योजना के तहत 25 हजार रुपये का ऋण लेकर मसाला चक्की भी स्थापित की। अब वह हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर के साथ अचार और चटनी का निर्माण कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। मधुबाला आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं।
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मोरनी की मधुबाला बनीं लखपति दीदी
चरन सिंह टिब्बी
पंचकूला। हरियाणा राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं। पंचकूला जिले के मोरनी ब्लॉक के गांव भोज जब्याल की मधुबाला दीदी इसकी जीवंत उदाहरण हैं, जिन्होंने मेहनत, हौसले और योजनाओं के सही उपयोग से ‘लखपति दीदी’ का मुकाम हासिल किया है।
वर्ष 2017 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ने से पहले मधुबाला एक निजी स्कूल में अध्यापिका थीं, जबकि उनके पति छोटी सी स्टेशनरी की दुकान चलाते थे। सीमित आय के कारण परिवार का खर्च चलाना चुनौतीपूर्ण था। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने पहले दो लाख रुपये का ऋण लेकर पति के व्यवसाय को बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
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इसके बाद मधुबाला ने खुद आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने पीएमईजीपी योजना के तहत 8.50 लाख रुपये का ऋण लेकर सेनेटरी नैपकिन निर्माण की मशीन खरीदी। आज वह हर महीने करीब एक हजार पैकेट सेनेटरी नैपकिन की बिक्री कर खर्च और ऋण की किस्त चुकाने के बाद लगभग 30 हजार रुपये की शुद्ध कमाई कर रही हैं। इस कार्य से समूह की तीन अन्य महिलाओं को भी रोजगार मिला है।
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इतना ही नहीं, मधुबाला ने पीएमएफएमई योजना के तहत 25 हजार रुपये का ऋण लेकर मसाला चक्की भी स्थापित की। अब वह हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर के साथ अचार और चटनी का निर्माण कर अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। मधुबाला आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देखती हैं।