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Panchkula News: दरिया के नए रास्ते देख ग्रामीणों को सताने लगी भविष्य की चिंता

Mon, 27 Oct 2025 09:42 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 27 Oct 2025 09:42 PM IST
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Seeing the new river channel, villagers are worried about their future.
अनिल कुमार - संवाद
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फिरोजपुर। सतलुज दरिया के नये रास्ते देख गांव कालू वाला व टेंडी वाला के ग्रामीणों को भविष्य की चिंता सताने लगी है। सैकड़ों एकड़ जमीन से निकलकर अब दरिया घरों तक पहुंच गया है। दरिया अब अपने नए रास्ते पर भी उफान पर है।
अभी बाढ़ से ग्रामीण उबरे भी नहीं है। ऐसे में दरिया को देखकर ग्रामीणों को भविष्य की चिंता होने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि दरिया का यही हाल रहा तो आने वाले समय में टापू कालू वाला व टेंडी वाला के साथ हुसैनीवाला बाॅर्डर से सटे कई गांव दरिया में समाकर खत्म हो जाएंगे। सिर्फ नक्शे पर नाम रह जाएगा।
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ग्रामीणों ने बताया कि कालू वाला के ज्यादातर ग्रामीण अभी भी गांव नहीं पहुंचे। बाढ़ के 64 दिनों बाद कालू वाला में बिजली की सप्लाई शुरू हुई है, इसलिए ज्यादातर ग्रामीण अपने परिवार संग सुरक्षित जगहों पर टेंट लगाकर रह रहे हैं। करीब 16 परिवार गांव दुलचीके के नजदीक गांव लंगे वाला स्थित जंगलात विभाग की जमीन पर टेंट लगाकर रह रहे हैं जिन्हें अब विभाग भी वहां से उठाने का प्रयास कर रहा है। यह परिवार सोमवार को डीसी और एडीसी से गांव के सरपंच के साथ जाकर मिलेंगे, जिससे कुछ और समय तक उन्हें रहने की इजाजत दी जाए।
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गांव में रहने के हालात नहीं हैं। गांव का पानी पीने लायक नहीं है, थोड़ी देर बाद पानी पीले रंग में तब्दील हो जाता है। यह सब कुछ बाढ़ के बाद हुआ है। गांव के खेतों में रेत तीन से चार फीट भर गई है। रेत हटाने के बाद ही जमीन खेती लायक बनेगी। यूनाइटेड सिख संस्था ने टेंडी वाला और कालू वाला के किसानों को गेहूं के बीज दिए हैं। ग्रामीण मलकीत सिंह और मक्खन सिंह का कहना है कि दरिया गांव टेंडी वाला के ग्रामीणों के घर के बिल्कुल साथ बह रहा है। यह दरिया का नया रास्ता है और करीब 40 फीट गहरा है।

इस गांव की तकरीबन सौ एकड़ से ज्यादा खेतीबाड़ी वाली जमीन दरिया में समा चुकी है। इसी तरह गांव निहाले वाला की तरफ भी दरिया जमीन में समा कर गांव के नजदीक पहुंच चुका है। अगले साल दरिया ग्रामीणों के घर तक पहुंच सकता है। इसी बात की चिंता अब ग्रामीणों को सता रही है। अभी तक नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी। अगले साल बारिश का सीजन फिर से तबाही मचाएगा। दरिया अभी तक उफान पर है। दरिया के नए रास्ते भी पानी से लबालब हैं।
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