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संदीप बने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक जर्नल के एरिया एडीटर
अमर उजाला,पंचकूला
Updated Tue, 24 Sep 2013 09:40 PM IST
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नई तरह की तरंगों (ओमोन्स) का अध्ययन कर रहे भौतिकी विज्ञान के युवा वैज्ञानिक संदीप त्रिपाठी ने एक बार फिर पंचकूला सहित देश का नाम रोशन किया है।
बेल्जियम की संस्था यूरोपियन एलायंस फॉर इनोवेशन की ओर से जर्नल फॉर ऑगमेंटेंड मैनेजमेंट एंड टेक्नोेलॉजी (जेएएमटी) का एरिया एडीटर चुना गया है।
संस्था के अंतर्गत 12 जर्नल हैं, जिसमें दुनिया के युवा वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशित होते हैं। इसके प्रकाशन से पहले तमाम अध्ययन और शोध पत्रों की बारीकियों से रूबरू होकर बतौर विशेषज्ञ अपने विचार व्यक्त करने का भी युवा लेक्चरर को मौका मिलेगा।
चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित डीएवी स्कूल में बतौर लेक्चरर सेवारत संदीप त्रिपाठी के मुताबिक वह फिलहाल ओमोन्स कणों और तरंगों के अध्ययन में जुटे हैं।
मूलत: ओमोन्स की उत्पत्ति ऊं से हुई है। चाहे वह ऊर्जा किसी भी तरह का हो, उत्पति का एकमात्र जरिया ओमोन्स है। हमेशा नवीनतम वैज्ञानिक बदलावों से अवगत रहने वाले संदीप त्रिपाठी का कहना है कि प्राचीन भारतीय दर्शन और विज्ञान विशेषकर वैदिक विज्ञान ही ज्ञान का सबसे बड़ा स्त्रोत है।
इस विषय को लेकर ओमोन्स पर अध्ययन कर रहे हैं और गणितीय तौर तरीकों से इसे सिद्ध करने के लिए प्रयासरत हैं।
उन्होंने बातचीत में कहा कि अमेरिका में भी कुछ वर्ष पहले नौकरी लगी थी, लेकिन उन्होंने देश में रहकर काम करना अधिक पसंद किया।
मनसा देवी कॉम्पलेक्स में रहने वाले एरिया एडीटर अब दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों के शोध पत्रों पर भी अपनी पारखी नजरों से देखेंगे।
इससे पहले भी स्कवॉयर रूट का सबसे जल्दी हल निकालने के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने के अलावा सबसे अधिक लिखित परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए अमेरिकी संस्था से उपलब्धियां हासिल हो चुकी हैं।
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बेल्जियम की संस्था यूरोपियन एलायंस फॉर इनोवेशन की ओर से जर्नल फॉर ऑगमेंटेंड मैनेजमेंट एंड टेक्नोेलॉजी (जेएएमटी) का एरिया एडीटर चुना गया है।
संस्था के अंतर्गत 12 जर्नल हैं, जिसमें दुनिया के युवा वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशित होते हैं। इसके प्रकाशन से पहले तमाम अध्ययन और शोध पत्रों की बारीकियों से रूबरू होकर बतौर विशेषज्ञ अपने विचार व्यक्त करने का भी युवा लेक्चरर को मौका मिलेगा।
चंडीगढ़ के सेक्टर-15 स्थित डीएवी स्कूल में बतौर लेक्चरर सेवारत संदीप त्रिपाठी के मुताबिक वह फिलहाल ओमोन्स कणों और तरंगों के अध्ययन में जुटे हैं।
मूलत: ओमोन्स की उत्पत्ति ऊं से हुई है। चाहे वह ऊर्जा किसी भी तरह का हो, उत्पति का एकमात्र जरिया ओमोन्स है। हमेशा नवीनतम वैज्ञानिक बदलावों से अवगत रहने वाले संदीप त्रिपाठी का कहना है कि प्राचीन भारतीय दर्शन और विज्ञान विशेषकर वैदिक विज्ञान ही ज्ञान का सबसे बड़ा स्त्रोत है।
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इस विषय को लेकर ओमोन्स पर अध्ययन कर रहे हैं और गणितीय तौर तरीकों से इसे सिद्ध करने के लिए प्रयासरत हैं।
उन्होंने बातचीत में कहा कि अमेरिका में भी कुछ वर्ष पहले नौकरी लगी थी, लेकिन उन्होंने देश में रहकर काम करना अधिक पसंद किया।
मनसा देवी कॉम्पलेक्स में रहने वाले एरिया एडीटर अब दुनिया के कई देशों के वैज्ञानिकों के शोध पत्रों पर भी अपनी पारखी नजरों से देखेंगे।
इससे पहले भी स्कवॉयर रूट का सबसे जल्दी हल निकालने के लिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराने के अलावा सबसे अधिक लिखित परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए अमेरिकी संस्था से उपलब्धियां हासिल हो चुकी हैं।
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