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पटाखे से आंख में चोट लगने से सफेद मोतिया व ग्लूकोमा का खतरा ज्यादा

Wed, 30 Oct 2019 02:24 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 30 Oct 2019 02:24 AM IST
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Risk of white cataract and glaucoma due to eye injury from fire crackers
चंडीगढ़। दिवाली की रात पटाखों से चोटिल आंखों के मरीजों का आना मंगलवार को भी जारी रहा। दो दिनों में कुल 27 मरीज पीजीआई के एडवांस आई सेंटर में पहुंचे। इनमें से छह मरीजों की दोनों आंखों में चोटें आई हैं। डाक्टरों का कहना है कि इनमें अधिकतर मरीजों की सौ फीसदी आंखें वापस आना नामुमकिन है। हर मरीज की आंखों की रोशनी कम होना तय है। किसी की ज्यादा हो सकती है तो किसी की कम। विशेषज्ञों का कहना है कि इन मरीजों में सफेद मोतिया, ग्लूकोमा और रेटिना डैमेज होने का खतरा है।
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कुछ मरीजों को तो चोट लगने के तुरंत बाद ही इसका असर दिखने लगता है और कुछ को भविष्य में खतरा रहता है। ऐसे में चोट लगने वाले मरीजों को समय-समय पर फालोअप में डाक्टर को दिखाना होगा। सोमवार को कुल 15 मरीज आए थे, जबकि मंगलवार को 12 मरीज। इनमें से 14 मरीज वे हैं, जो पटाखे नहीं फोड़ रहे थे। वे आतिशबाजी देख रहे थे या फिर पास से गुजर रहे थे। बाकी पटाखे फोड़ रहे थे। डाक्टरों का कहना है कि पिछली बार के मुकाबले इस साल मरीजों की संख्या में गिरावट है। पिछली बार दिवाली की रात ही करीब 34 मरीज पीजीआई में आ गए थे। पीजीआई में कुल 27 मरीजों में से 13 ट्राइसिटी के हैं, जबकि 14 मरीज हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा के शामिल हैं।
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पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम ने बताया कि आंख में पटाखे लगने से दो तरह की चोटें आती हैं। पहला, पटाखे से आंख में बाहरी तत्व का लगना। जैसे कि बारूद या छर्रे लगना। इससे कोर्निया, लेंस, रेटिना को चोट लगती है और उससे ब्लीडिंग, ग्लूकोमा व सफेद मोतिया होने के चांस होते हैं। दूसरा आंख की ग्लोब का फूटना। इसमें पूरी आंख का डैमेज होने का खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में मरीज की तुरंत सर्जरी करने की आवश्यकता पड़ती है। आंख में चोट लगने का सबसे बड़ा खतरा ग्लूकोमा का होता है। यदि किसी मरीज को ग्लूकोमा की वजह से आंख की रोशनी कम हो जाए तो उसका दोबारा रोशनी वापस आना मुश्किल होता है। ऐसे में मरीजों को समय-समय पर फालोअप में जरूर आना चाहिए।
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