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Panchkula News: पीडियाट्रिक वार्ड में बढ़े बुखार और नजले-जुकाम के मरीज

Sat, 05 Sep 2026 01:14 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:14 AM IST
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Rise in patients with fever and cold in the pediatric ward.
मौसम बदलते ही रोजाना 120 से 150 बच्चे पहुंच रहे ओपीडी, डॉक्टर बोले- लक्षण पहचानें और परहेज रखें
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दो दिन से ज्यादा बुखार, लगातार खांसी या सांस लेने में दिक्कत हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। मौसम में बदलाव के साथ सिविल अस्पताल सेक्टर-6 की पीडियाट्रिक ओपीडी में बच्चों में मौसमी बीमारियों के मामले बढ़ गए हैं। बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 120 से 150 बच्चे पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस समय वायरल बुखार, ऊपरी श्वसन संक्रमण यानी नजला-जुकाम और खून की कमी से होने वाली कमजोरी के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों ने अभिभावकों को बीमारी के लक्षणों की पहचान के साथ बचाव और खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है।
वायरल बुखार में ये लक्षण
वायरल बुखार में बच्चों को दो से तीन दिन तक लगातार बुखार, बदन दर्द, सिर भारी होना और भूख कम लगने जैसी समस्या हो सकती है। इसके साथ थकान और चिड़चिड़ापन भी दिखाई दे सकता है।
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नजला-जुकाम में नाक बहना प्रमुख लक्षण
ऊपरी श्वसन संक्रमण में नाक बहना, छींक आना, गले में खराश, हल्की खांसी और आंखों से पानी आने की शिकायत रहती है। सुबह और शाम ठंड बढ़ने पर इसके लक्षण अधिक परेशान कर सकते हैं।
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खून की कमी में चेहरा पड़ जाता है पीला
खून की कमी होने पर बच्चे का चेहरा पीला पड़ना, जल्दी थक जाना, पढ़ाई में ध्यान न लगना और चक्कर आने जैसी शिकायत हो सकती है। ऐसे बच्चों में बार-बार संक्रमण होने की समस्या भी देखी जा सकती है।
मच्छरजनित बुखार से करना होगा अंतर
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार वायरल बुखार को मच्छरजनित रोगों से अलग पहचानना जरूरी है। यदि बुखार के साथ तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर पर दाने या उल्टी की शिकायत हो तो डेंगू या मलेरिया की जांच करवानी चाहिए। वहीं, दो दिन से अधिक बुखार रहने, लगातार खांसी या सांस लेने में दिक्कत होने पर बच्चे को तुरंत पीडियाट्रिक ओपीडी में दिखाने की सलाह दी गई है।


रोकथाम के लिए इन बातों का रखें ध्यान
बच्चों को सुबह-शाम ठंड से बचाएं और पूरी बाजू के कपड़े पहनाएं।
घर और आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाली क्रीम का इस्तेमाल करें।
ठंडे पानी, आइसक्रीम और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बच्चों को दूर रखें।
बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें। स्कूल से आने के बाद हाथ-मुंह जरूर धुलवाएं।
बुखार होने पर खुद से एंटीबायोटिक या अन्य दवा न दें। डॉक्टर की सलाह लें।
घर और अस्पताल में साफ-सफाई का ध्यान रखें और बच्चों को हवादार कमरे में रखें।

आहार से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार मौसम बदलने पर बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए पौष्टिक आहार जरूरी है। हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए पालक, मेथी, चना, गुड़, अनार, चुकंदर और अंकुरित दालें आहार में शामिल करें। रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अमरूद, संतरा, पपीता और आंवला जैसे मौसमी फल दिए जा सकते हैं। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं। नारियल पानी, नींबू पानी और घर का बना सूप भी दिया जा सकता है। जंक फूड, ज्यादा तला-भुना खाना, कोल्ड ड्रिंक और पैकेट वाले जूस से परहेज करने
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