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करनाल में किसानों पर लाठीचार्ज के बाद पंजाब-हरियाणा में ठनी : मनोहर का कैप्टन पर वार, किसान आंदोलन के पीछे पंजाब सरकार

Tue, 31 Aug 2021 02:38 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 31 Aug 2021 02:38 AM IST
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Rhetoric intensified in Punjab-Haryana after lathi charge on farmers in Karnal
चंडीगढ़। करनाल में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के बाद हरियाणा और पंजाब में ठन गई है। सरकार के 2500 दिन पूरा होने पर सोमवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में मीट द प्रेस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि किसान आंदोलन के पीछे पंजाब सरकार का हाथ है। किसान नेता बलबीर राजेवाल सीएम अमरिंदर सिंह को ऐसे ही लड्डू नहीं खिला रहे। दिल्ली की सीमा पर धरना दे रहे 85 फीसदी किसान पंजाब से हैं। हरियाणा का असली किसान तो खेतों में काम कर रहा है। मनोहर ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री किस अधिकार से उनसे इस्तीफा मांग रहे या माफी मांगने के लिए कहते हैं। किसानों को भड़काने के लिए अमरिंदर को इस्तीफा दे देना चाहिए। कानून हाथ में लेने वाले किसान नहीं, बल्कि राजनीति से प्रेरित लोग हैं।
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किसानों को हुड्डा भी बरगला रहे, विपक्ष ने कृषि कानूनों पर फैलाया भ्रम
मनोहर लाल ने कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों पर कांग्रेस ने भ्रम फैलाया और भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी किसानों को बरगलाया है। कांग्रेस व वामपंथियों ने किसानों को गुमराह करने के साथ करनाल में अराजकता पैदा करने के लिए उकसाया। कांग्रेस सही को सही और गलत को गलत कहे। उसका भविष्य अंधकारमय है, जो हमारे लिए ठीक है। मनोहर ने कहा कि हम तो अगले पांच साल की तैयारी कर रहे हैं।
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किसी को अनिश्चितकाल के लिए सड़क जाम करने का अधिकार नहीं
करनाल में हिंसा भड़काने वाले नेताओं को कड़ी चेतावनी है कि अगर कोई कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेता है, तो निश्चित रूप से पुलिस कानून व्यवस्था को संभालेगी। किसी को भी अनिश्चितकाल के लिए सड़क जाम करने का अधिकार नहीं है। विपक्ष ने मंडियां व एमएसपी खत्म होने का भ्रम फैलाया। जबकि देश में मंडी खत्म हुई न एमएसपी। जो मंडियां बंद थीं वह भी शुरू की गईं। हरियाणा में 11 फसलें एमएसपी पर खरीद रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में गेहूं व धान ही खरीदा जा रहा है। किसानों को देश की परंपराओं में अपना विश्वास बनाए रखना चाहिए। केवल सकारात्मक बातचीत से ही किसी मुद्दे को हल किया जा सकता है। किसी भी बात पर अड़े रहने से कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकल सकता।
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