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आईएएस अजीत बालाजी जोशी को राहत जारी, सरकार को जवाब के लिए 12 अक्तूबर तक मोहलत
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चंडीगढ़। राइट टू सर्विस कमीशन के चेयरमैन टीसी गुप्ता द्वारा जारी आदेश में की गई तल्ख टिप्पणियों को चुनौती देने वाली हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक आईएएस अजीत बालाजी जोशी की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 12 अक्तूबर तक की मोहलत दी है। साथ ही गुप्ता के आदेश पर तब तक रोक जारी रखने का आदेश दिया है।
जोशी ने याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि एक महिला की प्रॉपर्टी के ट्रांसफर में 14 महीने की देरी पर राइट टू सर्विस कमीशन के चेयरमैन टीसी गुप्ता ने संज्ञान लेते हुए सुनवाई आरंभ की है। याची ने कहा कि सुनवाई करते हुए ट्रांसफर में हुई देरी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि यह देरी मुख्य प्रशासक के सनकीपन, अहंकार, लापरवाही व संवेदनहीनता को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने याची पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। जोशी ने याचिका में दलील दी कि यह मामला गुप्ता के अधिकार क्षेत्र के बाहर आता है और उन्होंने अपने आदेश में जो टिप्पणी की है वह अनावश्यक थी। याची ने कहा कि उसने बेहद अहम पदों पर कार्य किया है और प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। याची ने अपील की कि उसके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने का आदेश दिया जाए और गुप्ता द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द किया जाए।
पीड़िता ने प्रधानमंत्री से मांगी थी इच्छा मृत्यु
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से न्याय न मिलने पर फरीदाबाद निवासी पीड़िता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी थी। इसके बाद हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग हरकत में आया और स्वत: संज्ञान लेकर प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक से जवाब तलब किया था।
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जोशी ने याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि एक महिला की प्रॉपर्टी के ट्रांसफर में 14 महीने की देरी पर राइट टू सर्विस कमीशन के चेयरमैन टीसी गुप्ता ने संज्ञान लेते हुए सुनवाई आरंभ की है। याची ने कहा कि सुनवाई करते हुए ट्रांसफर में हुई देरी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने अपने आदेश में लिखा कि यह देरी मुख्य प्रशासक के सनकीपन, अहंकार, लापरवाही व संवेदनहीनता को दर्शाता है। इसके साथ ही उन्होंने याची पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। जोशी ने याचिका में दलील दी कि यह मामला गुप्ता के अधिकार क्षेत्र के बाहर आता है और उन्होंने अपने आदेश में जो टिप्पणी की है वह अनावश्यक थी। याची ने कहा कि उसने बेहद अहम पदों पर कार्य किया है और प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक उन्हें सम्मानित कर चुके हैं। याची ने अपील की कि उसके खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने का आदेश दिया जाए और गुप्ता द्वारा लिए गए संज्ञान को रद्द किया जाए।
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पीड़िता ने प्रधानमंत्री से मांगी थी इच्छा मृत्यु
हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से न्याय न मिलने पर फरीदाबाद निवासी पीड़िता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु मांगी थी। इसके बाद हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग हरकत में आया और स्वत: संज्ञान लेकर प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक से जवाब तलब किया था।
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