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कानूनी अड़चन में फंसी 1158 सहायक प्रोफेसरों की भर्ती
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चंडीगढ़। पंजाब सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा 1158 प्रोफेसरों को भुगतना पड़ रहा है। राज्य सरकार ने सरकारी कॉलेजों में 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती की घोषणा करके वाहवाही तो खूब बटोरी, लेकिन अब यह मामला कानूनी अड़चन में फंस गया है और सरकार इस संबंधी केस की पैरवी भी नहीं कर रही है। इस भर्ती पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्टे लगा दी है, क्योंकि पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट में इस मामले पर समय रहते जवाब ही दाखिल नहीं किया। इस कारण उक्त भर्ती में सफल रहे युवाओं की ज्वाइनिंग नहीं हो सकी। यह सारा मामला सोमवार को 70 प्रभावित शिक्षकों ने प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में रखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है कि सरकार ने 1158 नौकरियां दे दी हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि किसी को नौकरी मिली ही नहीं है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने अक्तूबर 2021 में 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। भर्ती प्रक्रिया 45 दिन में पूरी होनी थी, जिसके लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में परीक्षा हुई। इसका परिणाम नवंबर के आखिरी हफ्ते में आया और 2 व 3 दिसंबर को चुने गए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र मिलने लगे, लेकिन इसी बीच भर्ती प्रक्रिया को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर हो गई।
याचिकाकर्ता कुलविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने नियम बनाया था कि पहले से कांट्रैक्ट पर काम कर रहे टीचरों को एक साल के अनुभव के हिसाब से 5 अंक मिलेंगे, लेकिन बाद में नियम बदल दिए गए और ये अंक केवल सरकारी कॉलेज में काम कर रहे कांट्रैक्ट टीचरों को दिए गए। जबकि कुलविंदर सिंह सरकारी एडेड कॉलेज में कांट्रैक्ट पर काम कर रहे थे, इसलिए उनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पर ही रोक लगा दी। अब जो लोग भर्ती प्रक्रिया में सफल रहे उन्हें पंजाब सरकार की नाकामी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि पंजाब सरकार जल्द ही इस मामले को हाईकोर्ट में खत्म करे और उन्हें नौकरी दी जाए।
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उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है कि सरकार ने 1158 नौकरियां दे दी हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि किसी को नौकरी मिली ही नहीं है। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार ने अक्तूबर 2021 में 1158 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला था। भर्ती प्रक्रिया 45 दिन में पूरी होनी थी, जिसके लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला और गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर में परीक्षा हुई। इसका परिणाम नवंबर के आखिरी हफ्ते में आया और 2 व 3 दिसंबर को चुने गए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र मिलने लगे, लेकिन इसी बीच भर्ती प्रक्रिया को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर हो गई।
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याचिकाकर्ता कुलविंदर सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार ने नियम बनाया था कि पहले से कांट्रैक्ट पर काम कर रहे टीचरों को एक साल के अनुभव के हिसाब से 5 अंक मिलेंगे, लेकिन बाद में नियम बदल दिए गए और ये अंक केवल सरकारी कॉलेज में काम कर रहे कांट्रैक्ट टीचरों को दिए गए। जबकि कुलविंदर सिंह सरकारी एडेड कॉलेज में कांट्रैक्ट पर काम कर रहे थे, इसलिए उनकी याचिका पर हाईकोर्ट ने पूरी भर्ती प्रक्रिया पर ही रोक लगा दी। अब जो लोग भर्ती प्रक्रिया में सफल रहे उन्हें पंजाब सरकार की नाकामी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि पंजाब सरकार जल्द ही इस मामले को हाईकोर्ट में खत्म करे और उन्हें नौकरी दी जाए।
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