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राम ने कहा था, पिता की आज्ञा का उल्लंघन मेरी शक्ति से परे : गणेशानंद मिश्रा
Fri, 26 Apr 2024 06:50 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
संवाद न्यूज एजेंसी, पंचकूला
Updated Fri, 26 Apr 2024 06:50 PM IST
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दुर्गा माता मंदिर सेक्टर 7 पंचकूला में चल रही राम कथा, चौथे दिन पहुंचे महापौर
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। दुर्गा माता मंदिर सेक्टर 7 पंचकूला में चल रही राम कथा के चौथे दिन कथा व्यास गणेशानंद मिश्रा ने सीता-राम विवाह कथा सुनाई गई। कथा में शुक्रवार को पंचकूला के महापौर कुलभूषण गोयल पहुंचे। महापौर ने कथा व्यास का आशीर्वाद लिया। कथा व्यास ने विश्वमित्र जी के साथ यज्ञ रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण का वन जाने का विस्तृत विवरण सुनाया। कथा व्यास ने बताया कि राम की शांत और सधी हुई वाणी सुनकर कैकेयी के चेहरे पर प्रसन्नता छा गई। उनकी मनोकामना पूर्ण हुई। राजा दशरथ चुपचाप सब देख रहे थे। स्पंदनहीन। कैकेयी की ओर देखते हुए उनके मुंह से एक शब्द निकला- धिक्कार! कैकेयी के महल से निकलकर राम सीधे अपनी मां के पास गए। उन्होंने माता कौशल्या को कैकेयी-भवन का विवरण दिया और अपना निर्णय सुनाया। राम वन जाएंगे। कौशल्या यह सुनकर सुध खो बैठीं। लक्ष्मण अब तक शांत थे। पर क्रोध से भरे हुए। राम ने समझाया और उनसे वन जाने की तैयारी के लिए कहा। कौशल्या का मन था कि राम को रोक लें। वन न जाने दें। राजगद्दी छोड़ दें। पर वह अयोध्या में रहें। उन्होंने कहा, पुत्र! यह राजाज्ञा अनुचित है। उसे मानने की आवश्यकता नहीं है। राम ने उन्हें नम्रता से उत्तर दिया, यह राजाज्ञा नहीं, पिता की आज्ञा है। उनकी आज्ञा का उल्लंघन मेरी शक्ति से परे है। आप मुझे आशीर्वाद दें। कथा व्यास ने तड़का और सुबाहु का उधार, अहिल्या का पति लोक जाना, जनक जी से राम जी की प्रथम भेंट आदि कथा विस्तार से बखान किया। राम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। राम जी की कथा में कोई ऐसी घटना नहीं, जो हमारे जीवन में हमें मुश्किल घड़ी से बाहर निकलने का रास्ता न बता पाए। ऐसे जीवन की व्यवस्था को समझाने वाली राम कथा का हमें हमेशा श्रवण करना चाहिए।
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। दुर्गा माता मंदिर सेक्टर 7 पंचकूला में चल रही राम कथा के चौथे दिन कथा व्यास गणेशानंद मिश्रा ने सीता-राम विवाह कथा सुनाई गई। कथा में शुक्रवार को पंचकूला के महापौर कुलभूषण गोयल पहुंचे। महापौर ने कथा व्यास का आशीर्वाद लिया। कथा व्यास ने विश्वमित्र जी के साथ यज्ञ रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण का वन जाने का विस्तृत विवरण सुनाया। कथा व्यास ने बताया कि राम की शांत और सधी हुई वाणी सुनकर कैकेयी के चेहरे पर प्रसन्नता छा गई। उनकी मनोकामना पूर्ण हुई। राजा दशरथ चुपचाप सब देख रहे थे। स्पंदनहीन। कैकेयी की ओर देखते हुए उनके मुंह से एक शब्द निकला- धिक्कार! कैकेयी के महल से निकलकर राम सीधे अपनी मां के पास गए। उन्होंने माता कौशल्या को कैकेयी-भवन का विवरण दिया और अपना निर्णय सुनाया। राम वन जाएंगे। कौशल्या यह सुनकर सुध खो बैठीं। लक्ष्मण अब तक शांत थे। पर क्रोध से भरे हुए। राम ने समझाया और उनसे वन जाने की तैयारी के लिए कहा। कौशल्या का मन था कि राम को रोक लें। वन न जाने दें। राजगद्दी छोड़ दें। पर वह अयोध्या में रहें। उन्होंने कहा, पुत्र! यह राजाज्ञा अनुचित है। उसे मानने की आवश्यकता नहीं है। राम ने उन्हें नम्रता से उत्तर दिया, यह राजाज्ञा नहीं, पिता की आज्ञा है। उनकी आज्ञा का उल्लंघन मेरी शक्ति से परे है। आप मुझे आशीर्वाद दें। कथा व्यास ने तड़का और सुबाहु का उधार, अहिल्या का पति लोक जाना, जनक जी से राम जी की प्रथम भेंट आदि कथा विस्तार से बखान किया। राम कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। राम जी की कथा में कोई ऐसी घटना नहीं, जो हमारे जीवन में हमें मुश्किल घड़ी से बाहर निकलने का रास्ता न बता पाए। ऐसे जीवन की व्यवस्था को समझाने वाली राम कथा का हमें हमेशा श्रवण करना चाहिए।