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Panchkula News: लॉरेंस बिश्नोई के हिरासत में इंटरव्यू मामले की जांच पर उठे सवाल एमिकस क्यूरी तनु बेदी ने एसआईटी को बताया नाकाम

Tue, 30 Sep 2025 09:42 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 30 Sep 2025 09:42 PM IST
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Questions have been raised about the investigation into Lawrence Bishnoi's custodial interview.Amicus Curiae Tanu Bedi called the SIT a failure.
अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। लॉरेंस बिश्नोई के पुलिस हिरासत में हुए इंटरव्यू मामले में मंगलवार को एमिकस क्यूरी तनु बेदी ने एसआईटी रिपोर्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईटी यह पता लगाने में नाकाम रही कि इंटरव्यू के दौरान जूम एप के लिए किसके फोन या इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल हुआ, क्योंकि एप आईएमईआई ट्रेसिंग की अनुमति नहीं देता।
बेदी ने दलील दी कि जांच ज्यादातर तकनीकी पहलुओं पर केंद्रित रही है। इसमें बर्खास्त डीएसपी गुरशेर सिंह संधू और इंटरव्यू लेने वाले पत्रकार के बीच संबंध स्थापित करने पर जोर दिया गया है। उन्होंने कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया कि इंटरव्यू के वक्त दोनों के मोबाइल टावर लोकेशन एक जैसे पाए गए और वे अक्सर फोन पर संपर्क में रहते थे। उन्होंने यह भी बताया कि एसआईटी की जांच में सामने आया कि गैंगस्टर रवि राज ने खुलासा किया कि गुरशेर ने एक सहयोगी के जरिये साबरमती जेल में बंद रहते हुए उसके लिए गिफ्ट्स भेजे थे, जिन्हें बाद में लॉरेंस बिश्नोई तक पहुंचाया गया।
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इंटरव्यू में धमकियां देना लॉरेंस का अपराध
बेदी ने कहा कि एसआईटी को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की संलिप्तता साबित करने वाले किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का सुराग नहीं मिला। 10 बर्खास्त पुलिस अधिकारियों में से केवल दो गुरशेर और उसके करीबी एक कांस्टेबल को सक्रिय रूप से शामिल पाया गया जबकि बाकी आठ को ड्यूटी में लापरवाही के आधार पर बर्खास्त किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जेल में मोबाइल या इंटरनेट का इस्तेमाल किसी संज्ञेय अपराध की श्रेणी में नहीं आता। लॉरेंस का मुख्य अपराध इंटरव्यू के दौरान दी गई धमकियां थीं।
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गुरशेर के शामिल होने पर जांच आगे बढ़ेगी
एसआईटी प्रमुख प्रबोध कुमार ने कोर्ट को बताया कि जांच इस समय ठहर गई है। वह तभी आगे बढ़ सकेगी जब गुरशेर सिंह संधू जांच में शामिल होंगे। कोर्ट ने पहले गुरशेर की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने का फैसला लिया। गुरशेर के वकील ने कहा कि उनका मुवक्किल जांच में सहयोग देने को तैयार है, बशर्ते उसे राज्य सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई 16 अक्तूबर तय की है, उसी दिन गुरशेर की अर्जी पर भी विचार किया जाएगा।
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