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पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले मामले में अभी हुई कार्रवाई की रिपोर्ट दे पंजाब
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चंडीगढ़। अनुसूचित जाति वर्ग के पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के करोड़ों के घोटाले मामले में पंजाब सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है यह जानकारी हाईकोर्ट ने तलब कर ली है। मंगलवार को केंद्र ने अपना जवाब दायर कर बताया कि यह स्कीम केंद्र सरकार की है, जिसमें राज्य सरकार अपना हिस्सा डालती है। केंद्र ने इस स्कीम के तहत 17 सितंबर तक अपना पूरा हिस्सा दे दिया है। जहां तक घोटाले का मामला है तो इस मामले में केंद्र ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है जो अभी तक राज्य सरकार ने भेजी नहीं है। केंद्र ने मामले की जांच के लिए दो संयुक्त सचिव अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच शुरू करवाई है जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। केंद्र के इस जवाब को हाईकोर्ट ने रिकार्ड में लेते हुए अब इस मामले में पंजाब सरकार से उनके द्वारा इस मामले में की जा रही कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
चंडीगढ़ के सतबीर सिंह वालिया ने एडवोकेट फेरी सोफत के जरिये जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया है कि पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के जरिये केंद्र अनुसचित जाति, पिछड़े वर्ग आदि के होनहार छात्रों को स्कॉलरशिप जारी करती है। यह राशि राज्य सरकार के जरिये जारी की जाती है। केंद्र ने इसके लिए मार्च 2019 में तीन किस्तों में 303.92 करोड़ रुपये जारी किए थे। गत वर्ष 18 दिसंबर की ट्रेजरी एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के अनुसार विभाग 248.11 करोड़ निकलवा चुका था और खाते में 55.81 करोड़ बचे थे, जिसे बाद में 2015-16 और 2016-17 के छात्रों के मेंटेनेंस अलाउंस के नाम पर निकाला गया। जो 248.11 करोड़ निकले गए थे, उनमें से ट्रेजरी विभाग को काफी मशक्कत के बाद भी 39 करोड़ की पेमेंट्स को फाइल या दस्तावेज मिला ही नहीं। यह राशि कई संस्थानों को जारी की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है की चाहे राज्य सरकार हो केंद्र दोनों ने ही बिना कोई मामला दर्ज किए जांच शुरू कर दी है। साफ है कि इस पूरे मामले में सही जांच नहीं की जा रही, लिहाजा इस मामले की सीबीआई जांच की याचिकाकर्ता ने मांग की है।
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चंडीगढ़ के सतबीर सिंह वालिया ने एडवोकेट फेरी सोफत के जरिये जनहित याचिका में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया है कि पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के जरिये केंद्र अनुसचित जाति, पिछड़े वर्ग आदि के होनहार छात्रों को स्कॉलरशिप जारी करती है। यह राशि राज्य सरकार के जरिये जारी की जाती है। केंद्र ने इसके लिए मार्च 2019 में तीन किस्तों में 303.92 करोड़ रुपये जारी किए थे। गत वर्ष 18 दिसंबर की ट्रेजरी एक्सपेंडिचर रिपोर्ट के अनुसार विभाग 248.11 करोड़ निकलवा चुका था और खाते में 55.81 करोड़ बचे थे, जिसे बाद में 2015-16 और 2016-17 के छात्रों के मेंटेनेंस अलाउंस के नाम पर निकाला गया। जो 248.11 करोड़ निकले गए थे, उनमें से ट्रेजरी विभाग को काफी मशक्कत के बाद भी 39 करोड़ की पेमेंट्स को फाइल या दस्तावेज मिला ही नहीं। यह राशि कई संस्थानों को जारी की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है की चाहे राज्य सरकार हो केंद्र दोनों ने ही बिना कोई मामला दर्ज किए जांच शुरू कर दी है। साफ है कि इस पूरे मामले में सही जांच नहीं की जा रही, लिहाजा इस मामले की सीबीआई जांच की याचिकाकर्ता ने मांग की है।
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