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पंजाब सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने को 300 करोड़ से अधिक खर्च किए हैं: अमरिंदर सिंह
Sat, 25 Jul 2020 01:52 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2020 01:52 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अकालियों की तरफ से मुख्यमंत्री राहत फंड में 64 करोड़ की राशि पर सवाल उठाए जा रहे हैं जो राज्य सरकार द्वारा कोविड के रोकथाम प्रबंधों पर खर्च की जा चुकी 300 करोड़ से अधिक रकम के मुकाबले कुछ भी नहीं है। कैप्टन ने कहा कि उनकी सरकार ने आपातकालीन उद्देश्यों के लिए यह फंड रखे हैं जिनको जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री राहत फंड में से सिर्फ 2.28 करोड़ रुपये खर्च करने पर अकालियों के सवाल को हास्यास्पद बताते कैप्टन ने कहा कि कोविड से संबंधित खर्चों के वित्त का यह एकमात्र स्रोत नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार, जिसमें अकाली भी हिस्सेदार हैं, से कोई आर्थिक सहायता न मिलने के बावजूद उनकी सरकार ने कोविड संबंधी प्रबंध करने में वित्तीय रुकावट पैदा नहीं होने दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि अकालियों को सचमुच राज्य में कोविड का फैलाव रोकने के लिए प्रबंधों की फिक्र है तो उनको केंद्र सरकार से सवाल पूछना चाहिए कि इस कठिन समय में पंजाब सरकार को सहायता क्यों नहीं दी। संबंधित नागरिकों की तरफ से मुख्यमंत्री राहत फंड में डाला जा रहा योगदान एक इमरजेंसी फंड है जिसे राज्य सरकार ने बहुत जरूरी हालत जब तत्काल कोई अन्य वैकल्पिक स्रोत मौजूद न हों, के मौके पर खर्च करने के लिए रखा है।
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कैप्टन ने कहा कि महामारी से पैदा हुई अनिश्चितता के मद्देनजर जो कई महीनों और शायद एक साल या इससे अधिक समय तक रह सकती है, किसी भी तरह की संभावित स्थिति से निपटने की तैयारियों के लिए ऐसे आपातकालीन फंड को रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
कैप्टन ने कहा कि राहत फंड में बाकी पड़े 64,86,10,456 रुपये की रकम उन करोड़ों रुपये के मुकाबले समुद्र की बूंद की तरह हैं, जो उनकी सरकार कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कोविड इलाज केंद्र स्थापित करने, अतिरिक्त मेडिकल और पैरामैडिकल स्टाफ की व्यवस्था, पीपीई किटों की खरीद और अन्य जरूरी उपकरणों पर पहले ही खर्च चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा ऐसे संकट के समय में निराधार मसलों पर समय खराब करने और लोगों को अपने गैरजरूरी और बेबुनियाद आरोपों से गुमराह करने के बजाय अकालियों को कोविड महामारी के साथ लड़ाई में राज्य सरकार का साथ देना चाहिए।
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राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री राहत फंड में से सिर्फ 2.28 करोड़ रुपये खर्च करने पर अकालियों के सवाल को हास्यास्पद बताते कैप्टन ने कहा कि कोविड से संबंधित खर्चों के वित्त का यह एकमात्र स्रोत नहीं है। महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र सरकार, जिसमें अकाली भी हिस्सेदार हैं, से कोई आर्थिक सहायता न मिलने के बावजूद उनकी सरकार ने कोविड संबंधी प्रबंध करने में वित्तीय रुकावट पैदा नहीं होने दी।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि अकालियों को सचमुच राज्य में कोविड का फैलाव रोकने के लिए प्रबंधों की फिक्र है तो उनको केंद्र सरकार से सवाल पूछना चाहिए कि इस कठिन समय में पंजाब सरकार को सहायता क्यों नहीं दी। संबंधित नागरिकों की तरफ से मुख्यमंत्री राहत फंड में डाला जा रहा योगदान एक इमरजेंसी फंड है जिसे राज्य सरकार ने बहुत जरूरी हालत जब तत्काल कोई अन्य वैकल्पिक स्रोत मौजूद न हों, के मौके पर खर्च करने के लिए रखा है।
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कैप्टन ने कहा कि महामारी से पैदा हुई अनिश्चितता के मद्देनजर जो कई महीनों और शायद एक साल या इससे अधिक समय तक रह सकती है, किसी भी तरह की संभावित स्थिति से निपटने की तैयारियों के लिए ऐसे आपातकालीन फंड को रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
कैप्टन ने कहा कि राहत फंड में बाकी पड़े 64,86,10,456 रुपये की रकम उन करोड़ों रुपये के मुकाबले समुद्र की बूंद की तरह हैं, जो उनकी सरकार कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, कोविड इलाज केंद्र स्थापित करने, अतिरिक्त मेडिकल और पैरामैडिकल स्टाफ की व्यवस्था, पीपीई किटों की खरीद और अन्य जरूरी उपकरणों पर पहले ही खर्च चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा ऐसे संकट के समय में निराधार मसलों पर समय खराब करने और लोगों को अपने गैरजरूरी और बेबुनियाद आरोपों से गुमराह करने के बजाय अकालियों को कोविड महामारी के साथ लड़ाई में राज्य सरकार का साथ देना चाहिए।