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Panchkula News: आईएमए के आह्वान पर पंचकूला के प्राइवेट डॉक्टरों ने की हड़ताल, ओपीडी रही बंद

Sun, 18 Aug 2024 04:37 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Aug 2024 04:37 AM IST
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Private doctors of Panchkula went on strike on the call of IMA, OPD remained closed
-दो सौ से अधिक डॉक्टरों ने किया हड़ताल का किया समर्थन, सीबीआई से मामले की जल्द जांच करने की मांग
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माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु लेडी डॉक्टर के साथ हुई रेप और मर्डर की वारदात के विरोध में शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन पंचकूला (आईएमए) की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया। आईएमए के आह्वान पर शहर के प्राइवेट अस्पतालों की ओपीडी बंद रही। दिनभर केवल इमरजेंसी के मरीज देखे गए।
पंचकूला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. जगदीश गोयल ने बताया कि सभी प्राइवेट अस्पतालों में ओपीडी नहीं चली। अस्पतालों की फ्रेंजाइजी और डॉक्टरों की अपने क्लीनिक पर चलने वाली ओपीडी भी बंद रखी गई।
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सेक्टर-15 स्थित आईएमए भवन में जिले के प्राइवेट अस्पतालों के 250 डॉक्टर इकट्ठा हुए। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए जाएं। डॉक्टरों ने रोष जाहिर करते हुए कहा कि प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ रेप और मर्डर की घटना की सीबीआई जल्द जांच करे और इसमें शामिल दोषियों को फांसी की सजा दी जाए।
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घटना के विरोध में डॉक्टरों की ओर से सेक्टर-14 पुलिस स्टेशन के सामने कैंडल मार्च निकाला गया। इसमें भी डॉक्टरों ने रोष जताते हुए कहा कि डॉक्टर अपने काम करने वाली जगह पर भी सुरक्षित नहीं हैं। यह प्रशासन के सामने बड़ा सवाल है। इस तरह की घटना भविष्य में न हो, इसे लेकर सख्त कानून बनाए जाएं और ट्रायल नियमित समय में खत्म किया जाए।

डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए पुख्ता कानून बनाए सरकार
पंचकूला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. जगदीश गोयल और सेक्रेटरी डॉ. कुलदीप मंगला ने कहा कि कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में प्रशिक्षु लेडी डॉक्टर के साथ बर्बर कृत्य हुआ है। सीबीआई की ओर से फास्ट ट्रैक आधार पर जांच पूरी की जानी चाहिए और दोषियों को जल्द से जल्द और अधिकतम सजा दी जाए। केंद्र सरकार से अपील है कि वह चिकित्सा प्रतिष्ठानों और कर्मियों के खिलाफ हिंसा की रोकथाम के लिए 2019 के मसौदे को स्वीकार करें और इसके लिए एक केंद्रीय कानून बनाएं। डॉक्टरों के काम के घंटे तय कर उनकी सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता कानून बनाया जाए।
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