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बड़ी पहलः पंजाब में वायु प्रदूषण पर विराम लगाने की तैयारी, अब सीएनजी से संचालित होंगे ईंट भट्टे
Mon, 31 Aug 2020 11:09 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 31 Aug 2020 11:09 AM IST
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वायु प्रदूषण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
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पंजाब में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए अब कोयले के बजाय ईंट के भट्ठों को सीएनजी से संचालित करने की सरकार तैयारी कर रही है। सरकार मिशन तंदरुस्त के तहत यह कार्य जल्द शुरू करने जा रही है। सरकार ने पंजाब स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी से कहा है कि वह ऐसी तकनीक लाएं जिससे ईंट के भट्ठों में कोयले की जगह सीएनजी का प्रयोग किया जा सके।
पंजाब में वर्तमान में 2200 ईंट भट्ठे हैं, जो सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इनमें एक सीजन में लगभग 1100 करोड़ ईंटें बनाई जाती हैं। इन ईंटों को बनाने में 16 लाख टन कोयले का प्रयोग किया जाता है। इससे राज्य में वायु प्रदूषण के स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। अब सरकार इन ईंट भट्ठों को कोयले के बजाय सीएनजी से संचालित करने की संभावनाओं को तलाश रही है।
तंदरुस्त पंजाब मिशन के निदेशक काहन सिंह पन्नू ने बताया कि दहन प्रणालियों में तकनीकी विकास ने अब कोयला आधारित ईंट भट्ठों को सीएनजी आधारित ईंट भट्ठों में बदलना संभव कर दिया है।
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हम ईंटों के भट्ठों को कोयले से सीएनजी में बदलने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। पन्नू ने बताया कि ईंटों के भट्ठों का सीएनजी में बदलाव करना न सिर्फ ईंटों के उत्पादन की लागत को घटाने में सहायता करेगा, बल्कि भट्ठों में कोयले से होने वाले वायु प्रदूषण को भी काफी हद तक घटाने में सहायता करेगा।
पंजाब स्टेट काउंसिल तलाशेगी संभावनाएं
पंजाब स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी से कहा गया है कि वह एक ऐसी तकनीक लेकर आए, जिससे ईंट भट्ठों में कोयले की जगह सीएनजी का प्रयोग किया जा सके। इस प्रक्रिया में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपेक्षित सहायता भी दे सकता है। पन्नू ने बताया कि पंजाब में अब सीएनजी आसानी से उपलब्ध हो जाती है और बड़ी संख्या में कोयला आधारित औद्योगिक इकाइयां गैस आधारित इकाइयों में बदल रही हैं।
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पंजाब में वर्तमान में 2200 ईंट भट्ठे हैं, जो सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इनमें एक सीजन में लगभग 1100 करोड़ ईंटें बनाई जाती हैं। इन ईंटों को बनाने में 16 लाख टन कोयले का प्रयोग किया जाता है। इससे राज्य में वायु प्रदूषण के स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। अब सरकार इन ईंट भट्ठों को कोयले के बजाय सीएनजी से संचालित करने की संभावनाओं को तलाश रही है।
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तंदरुस्त पंजाब मिशन के निदेशक काहन सिंह पन्नू ने बताया कि दहन प्रणालियों में तकनीकी विकास ने अब कोयला आधारित ईंट भट्ठों को सीएनजी आधारित ईंट भट्ठों में बदलना संभव कर दिया है।
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हम ईंटों के भट्ठों को कोयले से सीएनजी में बदलने की संभावनाओं को तलाश रहे हैं। पन्नू ने बताया कि ईंटों के भट्ठों का सीएनजी में बदलाव करना न सिर्फ ईंटों के उत्पादन की लागत को घटाने में सहायता करेगा, बल्कि भट्ठों में कोयले से होने वाले वायु प्रदूषण को भी काफी हद तक घटाने में सहायता करेगा।
पंजाब स्टेट काउंसिल तलाशेगी संभावनाएं
पंजाब स्टेट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नालॉजी से कहा गया है कि वह एक ऐसी तकनीक लेकर आए, जिससे ईंट भट्ठों में कोयले की जगह सीएनजी का प्रयोग किया जा सके। इस प्रक्रिया में पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अपेक्षित सहायता भी दे सकता है। पन्नू ने बताया कि पंजाब में अब सीएनजी आसानी से उपलब्ध हो जाती है और बड़ी संख्या में कोयला आधारित औद्योगिक इकाइयां गैस आधारित इकाइयों में बदल रही हैं।