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सेंट्रल सेक्टर योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आए : डॉ लिखी
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चंडीगढ़। भारत सरकार के कृषि मंत्रालय के तहत कृषि विभाग के अतिरिक्त सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने कहा है कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आरंभ की गई सेंट्रल सेक्टर योजना के बेेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन से वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2020 में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब राज्य में धान के अवशेष जलाने की घटनाओं की संख्या में क्रमश: 64, 52 और 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। अतिरिक्त सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने किसानों से आह्वान किया है कि वे इस वर्ष भी अपने फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें।
उन्होंने बताया कि योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए चालू वर्ष 2021-22 के दौरान 690.90 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें हरियाणा के लिए 193.35 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसमें आईसीएआर के 6.02 करोड़ रुपये शामिल है। 2021-22 में व्यक्तिगत तौर पर किसानों को 25 हजार 831 मशीनों की आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें हरियाणा के लिए 10 हजार 11 उपकरण शामिल है।
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वर्ष 2018-19 से 2020-21 के दौरान किसानों को सब्सिडी पर फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों और जागरूक करने के लिए 1749.17 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनमें हरियाणा के लिए 499.90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। पिछले 3 वर्षों के दौरान हरियाणा में 4 हजार 224 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।
उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान का भी किया दौरा
डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खेती में ड्रोन व रोबोटिक तकनीकों के समावेश किए जाने की बात पर बल दिया है। उन्होंने पेस्टिसाइड व इंसेक्टिसाइड मैनेजमेंट को लेकर किसानों को भी विभिन्न प्रचार माध्यमों से जागरूक करने के निर्देश दिए।
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उन्होंने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन से वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2020 में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब राज्य में धान के अवशेष जलाने की घटनाओं की संख्या में क्रमश: 64, 52 और 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। अतिरिक्त सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने किसानों से आह्वान किया है कि वे इस वर्ष भी अपने फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें।
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उन्होंने बताया कि योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए चालू वर्ष 2021-22 के दौरान 690.90 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें हरियाणा के लिए 193.35 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसमें आईसीएआर के 6.02 करोड़ रुपये शामिल है। 2021-22 में व्यक्तिगत तौर पर किसानों को 25 हजार 831 मशीनों की आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें हरियाणा के लिए 10 हजार 11 उपकरण शामिल है।
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वर्ष 2018-19 से 2020-21 के दौरान किसानों को सब्सिडी पर फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों और जागरूक करने के लिए 1749.17 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनमें हरियाणा के लिए 499.90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। पिछले 3 वर्षों के दौरान हरियाणा में 4 हजार 224 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं।
उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान का भी किया दौरा
डॉ. अभिलक्ष लिखी ने उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने खेती में ड्रोन व रोबोटिक तकनीकों के समावेश किए जाने की बात पर बल दिया है। उन्होंने पेस्टिसाइड व इंसेक्टिसाइड मैनेजमेंट को लेकर किसानों को भी विभिन्न प्रचार माध्यमों से जागरूक करने के निर्देश दिए।