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यही हाल रहा तो पैक हो जाएगी पंचकूला की पैकेजिंग इंडस्ट्री

Wed, 25 Nov 2015 12:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Wed, 25 Nov 2015 12:19 PM IST
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panchkula package industry is not good condition

मल्टी नेशनल कंपनियों को पैकिंग का समाधान उपलब्ध करवाने वाली पंचकूला की ग्रीन पैकेजिंग इंडस्ट्री अब समस्याओं से जूझ रही है। एक तो बिजली के भारी भरकम रेट और दूसरा रॉ मैटेरियल मंगवाने के लिए दी जाने वाली ट्रांसपोर्टेशन कास्ट का सीधा असर मुनाफे पर पड़ रहा है।

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पंचकूला के उद्यमियों का कहना है कि एसएमई के लिए स्पेशल पैकेज मिले तो बात बेहतर होगी। यही नहीं इस ग्रीन इंडस्ट्री के कई उद्योगपति पॉल्यूशन की परेशानी से जूझ रहे हैं। एक उद्यमी के अनुसार पाल्यूशन होता नहीं बावजूद इसके कई बार उनको तंग किया जाता है।
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पैकेजिंग इंडस्ट्री-एक नजर

पंचकूला में कुल यूनिट्स- 4
इंडस्ट्री टर्नओवर - 20 करोड़ (औसत)
कुल रेवेन्यू - एक करोड़ रुपये (औसत)
 
यहां हरेक तरह की पैकिंग
पंचकूला की गत्ता इंडस्ट्री में हर प्रकार की पैकिंग के लिए गत्ते बनाए जाते हैं। टीवी, एलईडी, रेफ्रिजरेटर के साथ छोटी पैकिंग के लिए भी यहां गत्ते बनाए जाते हैं। इस इंडस्ट्री से लोकल मार्केट के साथ ही अंबाला और हिमाचल में भी गत्ते भेजे जाते हैं।
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ऐसे बनता है गत्ता

फिलहाल पंचकूला में किसी भी यूनिट में ऑटोमेटिक मशीन नहीं है। ऐसी यूनिट लगाने के लिए चार करोड़ की लागत चाहिए। यहां जो यूनिट्स हैं उसमें बीस लाख रुपये तक की मशीनें लगाई गईं हैं।

एक उद्यमी ने बताया कि रॉ मैटेरियल को नाली में डालते हैं, उसके बाद इसकी कटिंग और पेस्टिंग की जाती है, फिर रोटेशन और स्टाल कटिंग होती है।

बिजली के रेट ज्यादा हैं। पैकेजिंग के काम में बिजली की आवश्यकता ज्यादा होती है। इस वजह से लागत ज्यादा हो चुकी है। पंचकूला में कच्चा माल भी ज्यादा नहीं मिलता है, जो कि हमारे लिए समस्या है।
अंशुल गोयल, एएम इंडस्ट्रीज

पैकेजिंग इंडस्ट्री के लिए बिजली के रेट्स तो समस्या हैं ही साथ ही लोकल मार्केट का न होना भी एक बड़ी समस्या हो चुकी है। पैकेजिंग इंडस्ट्री में तकरीबन रॉ मैटेरियल बाहर से आता है। इसलिए ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी ज्यादा होती है।

ध्रुव राकेश, डीके इंटरप्राइजेज

स्माल और लघु उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को स्पेशल पैकेज बनाने चाहिए। बद्दी की इंडस्ट्री की सफलता की प्रमुख वजह यही है। पंचकूला में भी स्थिति और बेहतर हो सकती है, जरूरी है कि इसके लिए नए पैकेज आएं।
अंकुश जिंदल, कृष्णा इंडस्ट्रीज

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