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पंचकूला के 110 गांव में बढ़ा मलेरिया का खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jun 2016 12:57 AM IST
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मलेरिया का प्रकोप
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जिले के 110 गांवों को मलेरिया हाईरिस्क एरिया घोषित किया गया है। इसकी घोषणा हरियाणा सरकार ने पिछले तीन सालों से बढ़ रहे मलेरिया के मामलों के रिकार्ड को आधार बना कर किया है। इनमें सबसे ज्यादा एरिया मोरनी के हैं। यहां के 70 गांवों को हाईरिस्क एरिया घोषित किया गया है। इन गांवों में करीब एक हजार घरों पर स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग की नजर है। विभाग छिड़काव करवाने में भी जुट गया है।
फरवरी 2016 में हरियाणा सरकार की मीटिंग हुई थी। मीटिंग में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल थे। मीटिंग के दौरान स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अधिकारियों को 2013-2015 तक के मलेरिया के डाटा एकत्रित करने के निर्देश दिए थे। जिन ग्रामीण क्षेत्रों को हाईरिस्क एरिया घोषित किया गया है उन गांवों के पंच और पंचायतों को गुणवक्ता जांचने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग को पंचायत प्रमाणपत्र मिलेगा। अगर जांच में मलेरिया विंग की टीम ने कोताही की तो पंचायत प्रमाण पत्र स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल पाएगा। क्योंकि पंचायतों के रिपोर्ट के आधार पर ही स्वास्थ्य विभाग को प्रमाण पत्र मिलना है।
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उधर स्वास्थ्य महानिदेशक ने भी सर्जनों की ड्यूटी लगाई है ताकि वे पंच और पंचायतों पर नजर रखें कि वे गलत रिपोर्ट न दे सकें। यदि ऐसा मामला सामने आएगा कार्रवाई हो सकती है। रिपोर्ट में एक पंचायत से करीब 10-15 लोगों की राय ली जाएगी।
टॉप 20 मलेरिया हाईरिस्क गांव
110 में से जिले में टॉप 20 हाईरिस्क मलेरिया गांव को भी स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग ने पहचान कर ली है। इन गांवों में एक राउंड स्प्रे विभाग करवा चुका है। जुलाई तक विभाग की ओर से दूसरा राउंड भी पूरा कर लिया जाएगा। यहां पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देश पर पिछले दिनों डिप्टी डायरेक्टर मलेरिया ने खुद विजिट किया था। इन गांवों में हंगोला के मसूमपुर, बेबड़, गनौली, रहना, सुल्तानपुर, रायपुरानी के गोविंदपुर, रामपुर, साहपुर, बाल्दवाला, तूरों, भुण, जौली, मौलीवाला, मोरनी के सेरजवायन, सेरगुजरान, ठाठर, बासवाला, पलासरा, सिंहवाला शामिल हैं।
जिले में मोरनी के ज्यादा गांव मलेरिया हाईरिस्क हैं। इसके अलावा रायपुरानी व बारवाला भी हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर प्रॉपर तरीके से स्प्रे करवाया जा रहा है। लोगों को भी मलेरिया के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. नवजोत टिवाना, डिप्टी सिविल सर्जन, पंचकूला।
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फरवरी 2016 में हरियाणा सरकार की मीटिंग हुई थी। मीटिंग में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल थे। मीटिंग के दौरान स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने अधिकारियों को 2013-2015 तक के मलेरिया के डाटा एकत्रित करने के निर्देश दिए थे। जिन ग्रामीण क्षेत्रों को हाईरिस्क एरिया घोषित किया गया है उन गांवों के पंच और पंचायतों को गुणवक्ता जांचने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
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इसी आधार पर स्वास्थ्य विभाग को पंचायत प्रमाणपत्र मिलेगा। अगर जांच में मलेरिया विंग की टीम ने कोताही की तो पंचायत प्रमाण पत्र स्वास्थ्य विभाग को नहीं मिल पाएगा। क्योंकि पंचायतों के रिपोर्ट के आधार पर ही स्वास्थ्य विभाग को प्रमाण पत्र मिलना है।
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उधर स्वास्थ्य महानिदेशक ने भी सर्जनों की ड्यूटी लगाई है ताकि वे पंच और पंचायतों पर नजर रखें कि वे गलत रिपोर्ट न दे सकें। यदि ऐसा मामला सामने आएगा कार्रवाई हो सकती है। रिपोर्ट में एक पंचायत से करीब 10-15 लोगों की राय ली जाएगी।
टॉप 20 मलेरिया हाईरिस्क गांव
110 में से जिले में टॉप 20 हाईरिस्क मलेरिया गांव को भी स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया विंग ने पहचान कर ली है। इन गांवों में एक राउंड स्प्रे विभाग करवा चुका है। जुलाई तक विभाग की ओर से दूसरा राउंड भी पूरा कर लिया जाएगा। यहां पर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के निर्देश पर पिछले दिनों डिप्टी डायरेक्टर मलेरिया ने खुद विजिट किया था। इन गांवों में हंगोला के मसूमपुर, बेबड़, गनौली, रहना, सुल्तानपुर, रायपुरानी के गोविंदपुर, रामपुर, साहपुर, बाल्दवाला, तूरों, भुण, जौली, मौलीवाला, मोरनी के सेरजवायन, सेरगुजरान, ठाठर, बासवाला, पलासरा, सिंहवाला शामिल हैं।
जिले में मोरनी के ज्यादा गांव मलेरिया हाईरिस्क हैं। इसके अलावा रायपुरानी व बारवाला भी हैं। इन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ओर प्रॉपर तरीके से स्प्रे करवाया जा रहा है। लोगों को भी मलेरिया के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
- डॉ. नवजोत टिवाना, डिप्टी सिविल सर्जन, पंचकूला।