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स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर, सेवाएं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Sep 2016 01:27 AM IST
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स्वास्थ्य कर्मचारी हड़ताल पर
- फोटो : अमर उजाला
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सेक्टर-6 के जनरल अस्पताल में शुक्रवार को करीब 80 स्वास्थ्य कर्मी हड़ताल पर रहे। इस कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं। मरीजों का अस्पताल में तांता लगा रहा, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। दोपहर एक बजे करीब आधा दर्जन ओपीडी बंद कर डॉक्टर भी निकल गए। इसके बाद ओपीडी के मरीज भी इमरजेंसी में पहुंचने लगे। नतीजा इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को भी डॉक्टर समय नहीं दे पाए। कई इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को एक बार जांच के बाद डॉक्टर पूछने तक नहीं आए। क्योंकि ओपीडी बंद होने की वजह से ओपीडी के मरीजों की तादाद अचानक इमरजेंसी में बढ़ गई। बाद में इमरजेंसी का गेट भी डॉक्टरों ने बंद करवा दिया। उधर कर्मचारी अपनी मांग को लेकर पूरे दिन प्रदर्शन करते रहे।
मिर्गी का दौरा, इमरजेंसी के बाहर तड़पता रहा मरीज
मिर्गी का दौरा पड़ने के बाद रानी माजरा के हरजिंदर सिंह अपने पिता के साथ जांच के लिए सुबह अस्पताल पहुंचे। लेकिन हड़ताल की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। पिता स्ट्रेचर पर लेकर ओपीडी और इमरजेंसी के चक्कर काटते रहे। लेकिन उनकी जांच दिन में करीब बारह बजे इमरजेंसी के डॉक्टरों ने किया। उसके बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। बार-बार इमरजेंसी की गेट अपने बेटे का हाल बताने के लिए डॉक्टर के पास जाने के लिए इमरजेंसी की गेट पर जाते पर गेट तैनात गार्ड उन्हें लौटा देता। जवाब मिलता, शनिवार को आना। आज जांच नहीं हो पाएगा। ऐसे में वह दिन में करीब तीन बजे प्राइवेट अस्पताल में उन्हें अपने बेटे को इलाज के लिए लेकर जाना पड़ा।
डॉग बाइट के केस को भी लटकाया
पंचकूला निवासी मंजीत ने बताया कि उनकी पत्नी को स्ट्रे डॉग्स ने काट लिया था। इंजेक्शन लगवाने के लिए शुक्रवार को अस्पताल में अपनी पत्नी को लेकर पहुंचे। लेकिन एक इंजेक्शन लगवाने के लिए उन्हें पांच घंटे अस्पताल के चक्कर काटने पड़े।
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प्लेटलेट्स हुआ कम, लैब टेस्ट बंद, मरीज रेफर
हड़ताल की वजह से सेक्टर-4 हरिपुर के एक 15 साल के बच्चे का लैब टेस्ट नहीं हो पाया। मजबूरन डॉक्टर को उसे चंडीगढ़ जीएमसीएच रेफर करना पड़ना। हुआ यूं कि एक 15 साल के बच्चे का प्लेटलेट्स कम हो गया था। लैब कर्मियों ने हड़ताल पर जाने की वजह उसे तत्काल डॉक्टर ने रेफर कर दिया। क्योंकि अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी में आने कुछ मरीजों का ही शुक्रवार को लैब टेस्ट हो पाया। स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर होने की वजह से ट्रेनी स्टूडेंट्स को मोर्चा संभालने के लिए बैठाया गया था।
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मिर्गी का दौरा, इमरजेंसी के बाहर तड़पता रहा मरीज
मिर्गी का दौरा पड़ने के बाद रानी माजरा के हरजिंदर सिंह अपने पिता के साथ जांच के लिए सुबह अस्पताल पहुंचे। लेकिन हड़ताल की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा। पिता स्ट्रेचर पर लेकर ओपीडी और इमरजेंसी के चक्कर काटते रहे। लेकिन उनकी जांच दिन में करीब बारह बजे इमरजेंसी के डॉक्टरों ने किया। उसके बाद भी उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। बार-बार इमरजेंसी की गेट अपने बेटे का हाल बताने के लिए डॉक्टर के पास जाने के लिए इमरजेंसी की गेट पर जाते पर गेट तैनात गार्ड उन्हें लौटा देता। जवाब मिलता, शनिवार को आना। आज जांच नहीं हो पाएगा। ऐसे में वह दिन में करीब तीन बजे प्राइवेट अस्पताल में उन्हें अपने बेटे को इलाज के लिए लेकर जाना पड़ा।
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डॉग बाइट के केस को भी लटकाया
पंचकूला निवासी मंजीत ने बताया कि उनकी पत्नी को स्ट्रे डॉग्स ने काट लिया था। इंजेक्शन लगवाने के लिए शुक्रवार को अस्पताल में अपनी पत्नी को लेकर पहुंचे। लेकिन एक इंजेक्शन लगवाने के लिए उन्हें पांच घंटे अस्पताल के चक्कर काटने पड़े।
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प्लेटलेट्स हुआ कम, लैब टेस्ट बंद, मरीज रेफर
हड़ताल की वजह से सेक्टर-4 हरिपुर के एक 15 साल के बच्चे का लैब टेस्ट नहीं हो पाया। मजबूरन डॉक्टर को उसे चंडीगढ़ जीएमसीएच रेफर करना पड़ना। हुआ यूं कि एक 15 साल के बच्चे का प्लेटलेट्स कम हो गया था। लैब कर्मियों ने हड़ताल पर जाने की वजह उसे तत्काल डॉक्टर ने रेफर कर दिया। क्योंकि अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी में आने कुछ मरीजों का ही शुक्रवार को लैब टेस्ट हो पाया। स्वास्थ्य कर्मियों के हड़ताल पर होने की वजह से ट्रेनी स्टूडेंट्स को मोर्चा संभालने के लिए बैठाया गया था।