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आयोजनः जैन स्नातक में दीक्षा समारोह में भगवान महावीर के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला
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जैन सभा के सदस्य मेयर कुलभूषण गोयल को सम्मानित करते हुए।
- फोटो : PKL OFFICE
पंचकूला। भगवान महावीर जयंती एवं दीक्षा समारोह का आयोजन जैन स्नातक सभा सेक्टर-17 में एसएस जैन सभा की तरफ से किया गया। कार्यक्रम में मेयर कुलभूषण गोयल बतौर विशेष अतिथि पहुंचे। कार्यक्रम में विरागनी कुमारी कनिका का दीक्षांत समारोह भी हुआ। गोयल ने भगवान महावीर के बताए रास्ते पर प्रकाश डालकर कहा कि मोक्ष पाने के बाद भगवान महावीर ने पांच सिद्धांत दर्शाएं हैं, जो समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की तरफ ले जाते हैं।
इनमें शामिल अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अंतिम पांचवां सिद्धांत अपरिग्रह है। पहला सिद्धांत है अहिंसा, इस सिद्धांत के अनुसार जैन अनुयायियों को किसी भी परिस्थिति में हिंसा से दूर रहना चाहिए। भूलकर भी किसी को कष्ट नहीं पहुंचाना है। दूसरा सिद्धांत है सत्य, भगवान महावीर कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ, जो बुद्धिमान सत्य के सानिध्य में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।
तीसरा सिद्धांत है अस्तेय, अस्तेय का पालन करने वाले किसी भी रूप में अपने मन के मुताबिक वस्तु ग्रहण नहीं करते हैं। ये लोग संयम से रहते हैं और केवल वही लेते हैं जो उन्हें दिया जाता है। चौथा सिद्धांत है ब्रह्मचर्य, इस सिद्धांत के लिए जैन अनुयायियों को पवित्रता के गुणों का प्रदर्शन करने की आवश्यकता होती है। इस कारण वे कामुक गतिविधियों में भाग नहीं लेते। पांचवां अंतिम सिद्धांत है अपरिग्रह, यह शिक्षा सभी पिछले सिद्धांतों को जोड़ती है।
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इनमें शामिल अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अंतिम पांचवां सिद्धांत अपरिग्रह है। पहला सिद्धांत है अहिंसा, इस सिद्धांत के अनुसार जैन अनुयायियों को किसी भी परिस्थिति में हिंसा से दूर रहना चाहिए। भूलकर भी किसी को कष्ट नहीं पहुंचाना है। दूसरा सिद्धांत है सत्य, भगवान महावीर कहते हैं, हे पुरुष! तू सत्य को ही सच्चा तत्व समझ, जो बुद्धिमान सत्य के सानिध्य में रहता है, वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।
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तीसरा सिद्धांत है अस्तेय, अस्तेय का पालन करने वाले किसी भी रूप में अपने मन के मुताबिक वस्तु ग्रहण नहीं करते हैं। ये लोग संयम से रहते हैं और केवल वही लेते हैं जो उन्हें दिया जाता है। चौथा सिद्धांत है ब्रह्मचर्य, इस सिद्धांत के लिए जैन अनुयायियों को पवित्रता के गुणों का प्रदर्शन करने की आवश्यकता होती है। इस कारण वे कामुक गतिविधियों में भाग नहीं लेते। पांचवां अंतिम सिद्धांत है अपरिग्रह, यह शिक्षा सभी पिछले सिद्धांतों को जोड़ती है।
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