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Panchkula News: सरकार और नगर निगम को 6 माह में मुआवजा या वैकल्पिक प्लॉट देने के आदेश

Wed, 05 Aug 2026 01:49 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 05 Aug 2026 01:49 AM IST
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Orders issued to the government and the municipal corporation to provide compensation or an alternative plot within six months.
23 साल बाद निजी जमीन मालिकों को मिली राहत, सरकारी स्कूल में शामिल जमीन पर कोर्ट सख्त
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संवाद न्यूज एजेंसी
पंचकूला। रामगढ़ गांव में करीब 23 वर्ष पहले बिना भूमि अधिग्रहण और बिना मुआवजा दिए निजी जमीन पर सरकारी प्राइमरी स्कूल बनाने के मामले में जिला अदालत ने प्रभावित परिवारों के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने हरियाणा सरकार और नगर निगम पंचकूला को निर्देश दिए हैं कि छह माह के भीतर भूमि मालिकों को उचित मुआवजा दिया जाए या बराबर क्षेत्रफल का वैकल्पिक प्लॉट उपलब्ध कराया जाए।
मामले में उमेश गुप्ता, रघुनंदन लाल, श्याम लाल, कैलाश चंद और उनके परिजनों ने वर्ष 2021 में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी। जिला अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए अपील स्वीकार कर ली। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि बिना वैधानिक भूमि अधिग्रहण, पंजीकृत हस्तांतरण या उचित मुआवजा दिए राज्य किसी नागरिक की निजी संपत्ति पर कब्जा बनाए नहीं रख सकता।
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दो मरला निजी जमीन पर बना दिया गया था स्कूल
याचिकाकर्ताओं के अनुसार वर्ष 2003 में रामगढ़ स्थित उनकी करीब दो मरला निजी जमीन पर सरकारी प्राइमरी स्कूल का निर्माण कर दिया गया था। उस समय न तो अधिग्रहण प्रक्रिया अपनाई गई और न ही भूमि के बदले कोई मुआवजा या वैकल्पिक प्लॉट दिया गया। वर्ष 2018 में कराई गई आधिकारिक पैमाइश के दौरान उन्हें पता चला कि उनकी जमीन स्कूल परिसर की चहारदीवारी के भीतर शामिल हो चुकी है, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान अदालत ने राजस्व रिकॉर्ड का अवलोकन किया, जिसमें संबंधित भूमि आज भी याचिकाकर्ताओं के नाम दर्ज पाई गई। वहीं हरियाणा सरकार और नगर निगम यह साबित नहीं कर सके कि जमीन का कभी विधिवत अधिग्रहण या हस्तांतरण किया गया था। अदालत ने यह भी कहा कि ग्राम पंचायत के किसी कथित प्रस्ताव के आधार पर निजी स्वामित्व समाप्त नहीं माना जा सकता, विशेषकर जब उसका कोई वैधानिक रिकॉर्ड उपलब्ध न हो।
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जनहित में स्कूल यथावत रहेगा
अदालत ने माना कि जिस भूमि पर वर्षों से सरकारी स्कूल संचालित हो रहा है, उसे हटाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इसलिए जनहित को ध्यान में रखते हुए स्कूल को हटाने का आदेश नहीं दिया गया। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि जनहित के नाम पर किसी नागरिक की निजी संपत्ति पर अवैध कब्जा बनाए रखना कानून सम्मत नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने हरियाणा सरकार और नगर निगम पंचकूला को छह माह के भीतर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने अथवा बराबर क्षेत्रफल का वैकल्पिक प्लॉट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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