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रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने के आदेश का नहीं हुआ पालन, यूटी प्रशासन पर 20 हजार जुर्माना
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चंडीगढ़। गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स और गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र को 58 से बढ़ाकर 65 करने के आदेश का पालन न करना चंडीगढ़ प्रशासन को भारी पड़ गया। आदेश का पालन करने की मोहलत मांगने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
दोनों कॉलेज के प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उनकी रिटायरमेंट की आयु 58 वर्ष ही रखी गई है, जबकि यूजीसी के अनुसार इसे 65 वर्ष किया जाना चाहिए। याची ने बताया था कि उन्हें 2 वर्ष की एक्सटेंशन देकर 60 वर्ष की उम्र में रिटायर कर दिया गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद गत वर्ष 1 मार्च को सुनाए अपने फैसले में कहा था कि चंडीगढ़ में कॉलेज शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष होगी। इस फैसले के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी।
सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद यूटी प्रशासन ने दिसंबर में अपील को वापस ले लिया था। अपील वापस लेने के बावजूद लगातार प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में देरी कर रहा था और इस बार कोर्ट में आदेश का पालन करने के लिए समय दिए जाने की मांग की। याची ने कहा कि आदेश का पालन करने के स्थान पर प्रशासन फाइल को एक विभाग से दूसरे विभाग में भेज रहा है। जब आदेश के खिलाफ अपील वापस ले ली गई है तो हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में अनावश्यक देरी क्यों की जा रही है।
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दोनों कॉलेज के प्रोफेसरों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि उनकी रिटायरमेंट की आयु 58 वर्ष ही रखी गई है, जबकि यूजीसी के अनुसार इसे 65 वर्ष किया जाना चाहिए। याची ने बताया था कि उन्हें 2 वर्ष की एक्सटेंशन देकर 60 वर्ष की उम्र में रिटायर कर दिया गया। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद गत वर्ष 1 मार्च को सुनाए अपने फैसले में कहा था कि चंडीगढ़ में कॉलेज शिक्षकों की रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष होगी। इस फैसले के खिलाफ चंडीगढ़ प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की थी।
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सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद यूटी प्रशासन ने दिसंबर में अपील को वापस ले लिया था। अपील वापस लेने के बावजूद लगातार प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में देरी कर रहा था और इस बार कोर्ट में आदेश का पालन करने के लिए समय दिए जाने की मांग की। याची ने कहा कि आदेश का पालन करने के स्थान पर प्रशासन फाइल को एक विभाग से दूसरे विभाग में भेज रहा है। जब आदेश के खिलाफ अपील वापस ले ली गई है तो हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने में अनावश्यक देरी क्यों की जा रही है।
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