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Panchkula News: देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी, वकील पर हाईकोर्ट ने ठोका 50 हजार जुर्माना
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चंडीगढ़। देवी-देवताओं को लेकर व्हाट्सएप ग्रुप में आपत्तिजनक संदेश पोस्ट करने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने वकील पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। समझौते के आधार पर एफआईआर रद्द करने की अपील मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील पर 50 हजार जुर्माना भी ठोका है। साथ ही पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल को एक वकील के आचरण की भविष्य में निगरानी का निर्देश दिया है। एडवोकेट प्रीतपाल जीत संघा ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए 2019 में दर्ज एफआईआर को शिकायतकर्ता से समझौता होने की दलील देते हुए खारिज करने की मांग की थी। याची ने बताया कि उसके खिलाफ पंजाब पुलिस ने एडवोकेट अशोक सरीन की शिकायत पर मामला दर्ज किया था। सरीन ने आरोप लगाया था कि संघा ने हिंदू समुदाय की धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंचाने के लिए जिला बार एसोसिएशन होशियारपुर के व्हाट्सएप ग्रुप में अपमानजनक संदेश पोस्ट किया था। याची ने बताया कि उसका शिकायतकर्ता से समझौता हो गया है और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा समझौते के वास्तविक एवं स्वैच्छिक होने के बारे में संतुष्टि दर्ज की जा चुकी है। इस पर जस्टिस कुलदीप तिवारी ने एफआईआर को खारिज करने का आदेश दिया है।
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने याची पर पचास हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए राशि बार काउंसिल के खाते में जमा करवाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगर यह राशि जमा नहीं करवाई जाती है तो एफआईआर रद्द करने का आदेश खारिज माना जाएगा। हाईकोर्ट ने आदेश की एक प्रति बार काउंसिल के अध्यक्ष को भेजने का आदेश दिया है ताकि आरोपी की फाइल में इसे रखा जाए। हाईकोर्ट ने बार काउंसिल को आदेश दिया है कि वे वकील के आचरण की निगरानी करें और भविष्य में यदि इस प्रकार का कोई कृत्य करता है तो उसके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
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अपने फैसले में हाईकोर्ट ने याची पर पचास हजार रुपये जुर्माना लगाते हुए राशि बार काउंसिल के खाते में जमा करवाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगर यह राशि जमा नहीं करवाई जाती है तो एफआईआर रद्द करने का आदेश खारिज माना जाएगा। हाईकोर्ट ने आदेश की एक प्रति बार काउंसिल के अध्यक्ष को भेजने का आदेश दिया है ताकि आरोपी की फाइल में इसे रखा जाए। हाईकोर्ट ने बार काउंसिल को आदेश दिया है कि वे वकील के आचरण की निगरानी करें और भविष्य में यदि इस प्रकार का कोई कृत्य करता है तो उसके खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
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