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मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग टीचर अब कहला सकेंगे प्रोफेसर, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने तैयार किया मसौदा
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चंडीगढ़। हरियाणा के मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग टीचर्स लेक्चरर के स्थान पर डॉक्टर्स टीचर्स की तर्ज पर प्रोफेसर कहला सकेंगे। इसके लिए हरियाणा सरकार सेवा नियमों में बदलाव करने जा रही है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में निदेशक नियुक्ति के नियमों भी संशोधन किया जाना है।
चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने इसके लिए पूरा खाका तैयार कर लिया है। संभावना ये है कि जल्द ही सरकार इसे मंजूरी दे सकती है। हरियाणा मेडिकल कॉलेजों के लिए सेवा नियम वर्ष 1988 में बने थे। इसके बाद 2008 में इनमें संशोधन किया गया था। विभाग का मानना है कि 33 साल में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ समाज में भी काफी बदलाव आया है।
इसी को आधार बनाते हुए विभाग ने पूरा खाका तैयार किया है। इस समय नर्सिंग टीचर में पदनाम और पदोन्नती की प्रक्रिया जूनियर लेक्चरर, लेक्चरर और प्रिंसिपल तक है। नए नियमों के मुताबिक इन पदों के स्थान पर एसीस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएशट प्रोफेसर और प्रोफेसर के बाद प्रिंसिपल के नाम होंगे। विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है।
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तय होगा निदेशक का कार्यकाल
इस समय एक बार नियुक्ति के बाद निदेशक कई साल तक पद पर बने रहते हैं, जब तक वह 65 साल के नहीं हो जाते। नए नियमों में इस पद का कार्यकाल तय किया जाएगा और सीनियर को ही इसमें वरियता दी जाएगी। इस समय निदेशक पद के लिए योग्यता 50 साल से ऊपर और 65 से नीचे की है। शुरू में तीन साल के लिए नियुक्त किया जाता है, लेकिन यह कार्यकाल बढ़ता रहता है। नए नियमों के तहत निदेशक का कार्यकाल तय होगा।
नई भर्तियों में कॉमन काडर लागू
हरियाणा सरकार की योजना हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की है। कई जिलों में तेजी से निर्माण कार्य चल रहे हैं। आगामी सत्र में उनको चलाने के लिए डॉक्टर समेत नर्सों की जरूरत पड़ेगी। नई भर्तियों में कॉमन काडर शुरू कर दिया गया है। इसके तहत कॉलेज स्टाफ का कहीं भी तबादला किया जा सकेगा। पहले कॉलेज खुद भर्ती करते आए हैं, लेकिन डीएमईआर ने अब पूरे हरियाणा के लिए भर्ती शुरू कर दी है, ताकि जहां भी जरूरत हो, उनको तबादला किया जा सके।
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चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने इसके लिए पूरा खाका तैयार कर लिया है। संभावना ये है कि जल्द ही सरकार इसे मंजूरी दे सकती है। हरियाणा मेडिकल कॉलेजों के लिए सेवा नियम वर्ष 1988 में बने थे। इसके बाद 2008 में इनमें संशोधन किया गया था। विभाग का मानना है कि 33 साल में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र के साथ-साथ समाज में भी काफी बदलाव आया है।
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इसी को आधार बनाते हुए विभाग ने पूरा खाका तैयार किया है। इस समय नर्सिंग टीचर में पदनाम और पदोन्नती की प्रक्रिया जूनियर लेक्चरर, लेक्चरर और प्रिंसिपल तक है। नए नियमों के मुताबिक इन पदों के स्थान पर एसीस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएशट प्रोफेसर और प्रोफेसर के बाद प्रिंसिपल के नाम होंगे। विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है।
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तय होगा निदेशक का कार्यकाल
इस समय एक बार नियुक्ति के बाद निदेशक कई साल तक पद पर बने रहते हैं, जब तक वह 65 साल के नहीं हो जाते। नए नियमों में इस पद का कार्यकाल तय किया जाएगा और सीनियर को ही इसमें वरियता दी जाएगी। इस समय निदेशक पद के लिए योग्यता 50 साल से ऊपर और 65 से नीचे की है। शुरू में तीन साल के लिए नियुक्त किया जाता है, लेकिन यह कार्यकाल बढ़ता रहता है। नए नियमों के तहत निदेशक का कार्यकाल तय होगा।
नई भर्तियों में कॉमन काडर लागू
हरियाणा सरकार की योजना हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने की है। कई जिलों में तेजी से निर्माण कार्य चल रहे हैं। आगामी सत्र में उनको चलाने के लिए डॉक्टर समेत नर्सों की जरूरत पड़ेगी। नई भर्तियों में कॉमन काडर शुरू कर दिया गया है। इसके तहत कॉलेज स्टाफ का कहीं भी तबादला किया जा सकेगा। पहले कॉलेज खुद भर्ती करते आए हैं, लेकिन डीएमईआर ने अब पूरे हरियाणा के लिए भर्ती शुरू कर दी है, ताकि जहां भी जरूरत हो, उनको तबादला किया जा सके।