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पंचकूला सिविल अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल: ओपीडी ठप, मरीज परेशान; ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध
Mon, 05 Oct 2026 12:09 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
Published by: Nivedita
Updated Mon, 05 Oct 2026 12:09 PM IST
सार
प्रदेश में करीब 5500 और पंचकूला में 100 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर इस हड़ताल में शामिल हैं। सुबह 10 बजे से ओपीडी और जनरल वार्डों का काम ठप हो गया है। पर्ची तो बन रही है, लेकिन इंजेक्शन, ड्रेसिंग, दवा वितरण, बीपी-शुगर जांच और एडमिट प्रक्रिया बंद है।
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नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल
- फोटो : संवाद
विस्तार
ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में पंचकूला सिविल अस्पताल सेक्टर-6 समेत प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग ऑफिसर्स हरियाणा की 2 घंटे की पेन-डाउन स्ट्राइक शुरू हो गई है। नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर 5 से 7 अक्टूबर तक रोज सुबह 10 से 12 बजे तक हड़ताल रहेगी।
प्रदेश में करीब 5500 और पंचकूला में 100 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर इस हड़ताल में शामिल हैं। सुबह 10 बजे से ओपीडी और जनरल वार्डों का काम ठप हो गया है। पर्ची तो बन रही है, लेकिन इंजेक्शन, ड्रेसिंग, दवा वितरण, बीपी-शुगर जांच और एडमिट प्रक्रिया बंद है। वार्डों में भर्ती मरीजों को ड्रिप और रूटीन इंजेक्शन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। तीमारदार खुद भागदौड़ करते नजर आए।
हालांकि इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, बच्चों की इमरजेंसी और इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर को हड़ताल से बाहर रखा गया है, वहां सेवाएं सामान्य चल रही हैं।
एसोसिएशन की स्टेट प्रेसिडेंट विनीता कुमारी ने बताया कि कैडर में 95% महिला स्टाफ है जो तीनों शिफ्ट में 24 घंटे काम करती हैं। आरोप है कि बिना सेफ्टी प्रोटोकॉल और बिना चर्चा के 5 साल पूरा होते ही जबरन दूर-दराज के जिलों में ट्रांसफर किया जा रहा है। पीएचसी-सीएचसी स्तर पर आज भी महिला नर्स को बिना महिला अटेंडेंट के अकेले नाइट शिफ्ट करनी पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट की वर्कप्लेस सिक्योरिटी गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा। प्रशासन ने बातचीत से हल निकालने की बात कही है।
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प्रदेश में करीब 5500 और पंचकूला में 100 से अधिक नर्सिंग ऑफिसर इस हड़ताल में शामिल हैं। सुबह 10 बजे से ओपीडी और जनरल वार्डों का काम ठप हो गया है। पर्ची तो बन रही है, लेकिन इंजेक्शन, ड्रेसिंग, दवा वितरण, बीपी-शुगर जांच और एडमिट प्रक्रिया बंद है। वार्डों में भर्ती मरीजों को ड्रिप और रूटीन इंजेक्शन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। तीमारदार खुद भागदौड़ करते नजर आए।
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हालांकि इमरजेंसी वार्ड, लेबर रूम, बच्चों की इमरजेंसी और इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर को हड़ताल से बाहर रखा गया है, वहां सेवाएं सामान्य चल रही हैं।
एसोसिएशन की स्टेट प्रेसिडेंट विनीता कुमारी ने बताया कि कैडर में 95% महिला स्टाफ है जो तीनों शिफ्ट में 24 घंटे काम करती हैं। आरोप है कि बिना सेफ्टी प्रोटोकॉल और बिना चर्चा के 5 साल पूरा होते ही जबरन दूर-दराज के जिलों में ट्रांसफर किया जा रहा है। पीएचसी-सीएचसी स्तर पर आज भी महिला नर्स को बिना महिला अटेंडेंट के अकेले नाइट शिफ्ट करनी पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट की वर्कप्लेस सिक्योरिटी गाइडलाइन का पालन नहीं हो रहा। प्रशासन ने बातचीत से हल निकालने की बात कही है।
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