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हक की लड़ाई के लिए नहीं होंगे पैसे खर्च, साक्ष्य भी जुटाएगा ट्रिब्यूनल
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चंडीगढ़। अपनों से हक की लड़ाई में वरिष्ठ नागरिकों को अब पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल एक्ट के सेक्शन 27 में ऐसी व्यवस्था है। वरिष्ठ नागरिकों को ऐसे केसों में आवश्यकता पड़ने पर ट्रिब्यूनल की ओर से साक्ष्य जुटाने में पूरी मदद भी की जाती है।
चंडीगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों के साथ घरेलू हिंसा और प्रॉपर्टी संबंधी मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में 2018 में पिछले वर्षों के ऐसे 335 मामले थे, जिन पर सुनवाई पूरी नहीं हो पाई थी। 2019 में 108 और नए मामले आ गए। इसके बाद ऐसे मामलों संख्या 443 तक पहुंच गई। ट्रिब्यूनल ने गंभीर मामलों पर सुनवाई शुरू की और साल के अंत तक 246 मामलों में फैसला सुनाया।
ट्रिब्यूनल के सेक्शन 27 में यह भी व्यवस्था की गई है कि अपनों से चोट खाए और आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को अपनी हक की लड़ाई लड़ने के लिए पैसे नहीं खर्चने होंगे। इसके साथ ही यदि विवाद की सुनवाई के दौरान उन्हें साक्ष्यों की जरूरत भी पड़ती है तो वह भी ट्रिब्यूनल की ओरसे अन्य विभागों से मंगाए जाएंगे। ट्रिब्यूनल में चल रहे ऐसे कुछ विवादों में वरिष्ठ नागरिकों की लिखित शिकायत पर वादों का निस्तारण हुआ और उन्हें उनका हक दिलाया।
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कोट
सिर्फ देनी होगी लिखित शिकायत
अपनों से चोट खाए ऐसे बुजुर्गों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल के सेक्शन 27 में यह व्यवस्था की गई है। बुजुर्गों की ओर से एडीसी कोर्ट में सिर्फ लिखित शिकायत करनी है, जिसके बाद ट्रिब्यूनल स्वयं ही मामलों की सुनवाई करेगा और साक्ष्य भी जुटाएगा।
-सचिन राणा, एडिशनल डिप्टी कलेक्टर, चंडीगढ़
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चंडीगढ़ में वरिष्ठ नागरिकों के साथ घरेलू हिंसा और प्रॉपर्टी संबंधी मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल में 2018 में पिछले वर्षों के ऐसे 335 मामले थे, जिन पर सुनवाई पूरी नहीं हो पाई थी। 2019 में 108 और नए मामले आ गए। इसके बाद ऐसे मामलों संख्या 443 तक पहुंच गई। ट्रिब्यूनल ने गंभीर मामलों पर सुनवाई शुरू की और साल के अंत तक 246 मामलों में फैसला सुनाया।
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ट्रिब्यूनल के सेक्शन 27 में यह भी व्यवस्था की गई है कि अपनों से चोट खाए और आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को अपनी हक की लड़ाई लड़ने के लिए पैसे नहीं खर्चने होंगे। इसके साथ ही यदि विवाद की सुनवाई के दौरान उन्हें साक्ष्यों की जरूरत भी पड़ती है तो वह भी ट्रिब्यूनल की ओरसे अन्य विभागों से मंगाए जाएंगे। ट्रिब्यूनल में चल रहे ऐसे कुछ विवादों में वरिष्ठ नागरिकों की लिखित शिकायत पर वादों का निस्तारण हुआ और उन्हें उनका हक दिलाया।
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सिर्फ देनी होगी लिखित शिकायत
अपनों से चोट खाए ऐसे बुजुर्गों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सीनियर सिटीजन ट्रिब्यूनल के सेक्शन 27 में यह व्यवस्था की गई है। बुजुर्गों की ओर से एडीसी कोर्ट में सिर्फ लिखित शिकायत करनी है, जिसके बाद ट्रिब्यूनल स्वयं ही मामलों की सुनवाई करेगा और साक्ष्य भी जुटाएगा।
-सचिन राणा, एडिशनल डिप्टी कलेक्टर, चंडीगढ़